Nov
13

आज खायी कखड़ी भ्वाळ खायी बखरी (सुल्ताना डाकू की कथा )

आज खायी कखड़ी भ्वाळ खायी बखरी (सुल्ताना डाकू की कथा )

कथा संकलन – आचार्य भीष्म कुकरेती

कथा सुणाण वळि : स्व. श्रीमती श्रीमती सदानंद डबराल (डवोली , डबराल स्यूं )

.

-

दक्षिण गढ़वाळम इन गौं सैत क्वी नि ह्वालु जख सुल्ताना डाकू कथा प्रचलित नि रै होली। बुल्दा त इन छन बल अंग्रेजूं अत्याचार से सुलतान बल सुल्ताना डाकू बौणअर बिजनौर को रोबिन हुड

छौ बल जी सरकारी खजाना लूटि गरीब गुरबों म बंटदो छौ। पर हमर जिना याने डवोली डबराल स्यूं या जसपुर ढांगू म सुल्ताना डाकू की कथा कुछ हौरि इ च। यांकुणि बुल्दन बल लोक कथाओं स्थानीय भेद। आज खायी कखड़ी भोळ खायी बखरी सुल्ताना डाकू पर फिट बैठदी। मेरी नानी स्व श्रीमती श्रीमती सदानंद डबराल न या कथा कुज्याण कथगा दै सुणै होली धैं।

भौत वरसों ना सि यार ददा जी बगतो की इ छ्वीं होली बल ऊना भाभर जिना गुज्जर अडगैं (क्षेत्र )म एक निर्दयी क्रूर डाकू ह्वे बल सुल्ताना डाकू। बल लाट साब अर ग्वारा सिपै बि तै डाकू नाम सुणि डरण बिसे जांद छा बल। सौकार बिचारा त बल तैक डौरन सींद ई नि छा बल। हुस्यार इथगा छौ बल कथगा लाट साब ऐन अर कथगा सिपै लैन पर क्वी वै गुज्जर डाकू नि पकक्ड़ सकिन भै। दुर्जन कथगा बि हुस्यार ह्वावो पकड़म आयी जान्दो बल।

एक दिन बल एक लाट साबन सुल्ताना डाकू पकड़ इ द्याई अर काळों डांड अदालत म खड़ कर दे। ये ब्वे कन अदालत हूंदी रै होली तब झट झटाक काजीन फाँसीक सजा सुणाइ दे वे डाकू तैं। डाकू हाकिम से दरख्वास्त कार बल मि तैं ना बल्कणम मेरी ब्वे तै फांसी सजा सुणाओ।

इन मा हाकिमन सुल्तानाक ब्वै भट्याई। सुल्तानान अपण ब्वै कुण ब्वाल बल इखम आ मि कुछ बथ सुणाण चाणु छौं। वै सुल्तानान ब्वेक कंदूड़ म ब्वाल, ” बल ये ब्वे जैदिन मीन कखड़ी चोरी छे त तू म्यार कंदूड़ पकड़िक पीटी दींदी त आज मीन फांसी नि चढ़न छौ अर तीन निपूतो नि हूण छौ ”

बल ह्वे क्या छौ बल छुट मा एक दिन सुल्ताना न कैकि कखड़ी चोरी अर अपण माम ल्है गे। ब्वै रंडोळन अड़ानो जगा सुल्ताना की बड़ी बड़ैं कार। अब दुसर दिन बिटेन सुलतानू कबि कैक गुदड़ी चुरावो , कबि मूळा चुरावो अर ब्वे रंडोळ रूणो जगा पुळेक सुल्ताना क बड़ैं करदी छे।

हूंद करदो करदो सुल्ताना बड़ो चोर ह्वे गे अर एक दिन वैन बड़ो पधान जीक बखरी चोरी दे . पधान इ ठैर वू हौरुुं तरां चुप नि राई। पधान न पटवारी भटे दे. पटवारी सुल्ताना तैं पकड़ नो ग्यायी सुल्ताना जंगळ भाजी गे. अर उख भौत बड़ो डाकू बण गे।

तबि त बुल्दन बल आज खायी कखड़ी भोळ खायी बखरी। बूबा कबि चोरी नि करण बल।

संदर्भ – भीष्म कुकरेती ( 1985 ) गढ़वाल की लोक कथाएं , बिनसर परकासन , दिल्ली

Copyright@ Acharya Bhडरदा ishma Kukreti, 2018

Folk Stories of Dacoits from Pauri Garhwal South Asia ; Folk Stories of Dacoits from Chamoli Garhwal, South Asia ; Folk Stories of Dacoits from Rudraprayag Garhwal, South Asia ; Folk Stories of Dacoits from Tehri Garhwal; Folk Stories of Dacoits from Uttarkashi Garhwal, South Asia ; Folk Stories of Dacoits from Dehradun Garhwal; Folk Stories of Dacoits from Haridwar Garhwal, South Asia ; Folk Stories of Dacoits from Garhwal, South Asia
पौड़ी गढ़वाल की डाकू संबंधी लोक कथाएं ; चमोली गढ़वाल की डाकू संबंधी लोक कथाएं ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल की डाकू संबंधी लोक कथाएं ; टिहरी गढ़वाल की डाकू संबंधी लोक कथाएं ; उत्तरकाशी गढ़वाल की डाकू संबंधी लोक कथाएं ; देहरादून गढ़वाल की डाकू संबंधी लोक कथाएं ;

Nov
13

Gorkha Attack on Garhwal

Gorkha Attack in Childhood age of Sudarshan Shah
History of King Sudarshan Shah of Tehri Riyasat – 29
History of Tehri Kingdom (Tehri and Uttarkashi Garhwal) from 1815 –1948- 29
History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) – 1255
By: Acharya Bhishma Kukreti (History Student)
There was chaos in Kumaon and Garhwal from the day Sudarshan Shah took birth. When Sudarshan Shah might be five ix years old, Gorkha attacked on Kumaun in 1790. It is said that Harshadeva Joshi invited Gorkha for attacking on Kumaon that Mohan Chand is ousted from horn of Kumaon.
By help of Harshadeva Joshi, Gorkha captured Almora in February 1790 by outing Kumaon ruler Mohan Singh and Lal Singh and his uncle Lal Singh.
Gorkha planned a strategy for capturing Garhwal in 1791. Harsha Dev Joshi helped Gorkha for capturing Garhwal too. However, no Garhwali was ready for breaching his mother land as Joshi . With all odds the Garhwali people and kingdom officers were satisfied with King Pradyumana Shah.
Gorkha used to attack with flanking strategies on Garhwal Kumaon border regions. Gorkha attacked through Bhabhar Kotdwara and reached to Langurgarh (Dwarikhal and near Gumkhal). There was fierce battle between Gorkha and Garhwali soldiers in Bhabhar and Langurgarh. Gorkha soldiers remained stationed in Langurgarh for many months. Sirmour King came with army to Langurgarh. There was accord between Gorkha and Garhwal Kingdoms. It was decided forcefully that a ambassador of Garhwal would be in Nepal and a Nepal ambassador would be in Garhwal. Garhwal Kingdom had to pay for the both. Nepal government increased tax or Uphar amount to 9000. Nepali officers used to come for religious tour and Garhwal Kingdom used to pay the expenses. In reality, Garhwal kingdom was spending more than Rs 25000 on Nepalese.
References –
Copyright@ Acharya Bhishma Kukreti, bjukreti@gmail.com
Gorkha Attacks , History of Tehri Garhwal; Gorkha Attacks , History of Uttarkashi Garhwal; Gorkha Attacks , History of Ghansali, Tehri Garhwal; Gorkha Attacks , History of Bhatwari , Uttarkashi Garhwal; Gorkha Attacks , History of Tehri, Tehri Garhwal; Gorkha Attacks , History of Rajgarhi Uttarkashi Garhwal; Gorkha Attacks , History of Narendranagar, Tehri Garhwal; Gorkha Attacks , History of Dunda , Uttarkashi Garhwal; Gorkha Attacks , History of Dhantoli, Tehri Garhwal; Gorkha Attacks , History of Chinyalisaur Uttarkashi Garhwal; Gorkha Attacks , History of Pratapnagar , Tehri Garhwal; Gorkha Attacks , History of Mori, Uttarkashi Garhwal; Gorkha Attacks , History of Devprayaga, Tehri Garhwal; Gorkha Attacks , History of Puraula, Uttarkashi Garhwal; Gorkha Attacks , History of Jakhanikhal Tehri Garhwal; Gorkha Attacks , History of Gangotri- Jamnotri Uttarkashi Garhwal to be continued …

Nov
13

केरल आयुर्वेद पर्यटन विकास में वन औषधि पादप विपणन भूमिका

केरल आयुर्वेद पर्यटन विकास में वन औषधि पादप विपणन भूमिका

(प्रतियोगिता समझना आवश्यक है )

Ayurveda manufacturing Companies in Kerala

i

मेडिकल टूरिज्म विकास प्रतियोगिता को समझना -16

Understanding Competition for Medical Tourism Development in Uttarakhand -16

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 209

Medical Tourism development Strategies -209

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 315

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -315

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

वन औषधि पादप विपणन

केरल की भौगोलिक स्थिति इ पहाड़ हैं , ढलान हैं , घाटी है , नदी हैं , गदन हैं , समतल भूमि है और समुद्र तट भी है जो केरल को औषध पादप हेतु सही भूमि प्रदान करता है। कह सकते हैं केरल में सबसे अधिक औषध पादप उगते व उगाये जाते हैं।

जैसा की सभी जानते हैं बल सबसे बड़ी कठिनाई वन औषध पादपों का एकत्रीकरण , समय रहते भण्डारीकरण व फिर उनको बिकवाना है। केरल में भी यही कठिनाई हैं किन्तु एक सौ साल के आयुर्वेद चिकित्सा विकास ने औषधि वनस्पति विपणन समस्या की कम कर दिया है।

केरल में केरल स्टेट फेडरेसन ऑफ़ सिडूल्ड कास्ट ऐंड सिडूल्ड ट्राइब कॉपरेटिव्स लिमिटे गैर काष्ठ वन औषधि पादप खरीदती है और उनका विपणन भी करती है। फेडरेसन के अंतर्गत सरे केरल में फैली 34 आदिवासी कॉपरेटिव संस्थाएं है जो पादप खरीदती व विपणन करती हैं।

केरल सहकारी संस्थानों के अतिरिक्त गैर सरकारी व्यापारी व स्वयं एकत्रीकरण कर्ता भी औषध पादप बेचते हैं।

व्यापारी आदि वासियों को अग्रिम भोजन , पैसा दे देते हैं व फिर दबाब के तहत आदि वासी या अन्य औषधि पादप इन व्यापारियों को बेच देते हैं और व्यापारी पादपों या पादप अंगों को निर्माताओं को बेचते हैं।

माइनर फारेस्ट प्रोडक्ट कमेटियां क्षेत्रीय आदि वासी सहकारी संस्थाओं को पादप एकत्रीकरण हेतु वन आबंटित करते हैं। ये आदि वासी संथाएं वनों में टेम्पोरेरी डिपो जबजल में खोल देते हैं फिर इन्हे बड़े केंद्र में लाया जाता है और फिर इन एकत्रित औषधि पाड़पों की नीलामी की जाती है।

कुछ पादपों को भण्डारीकृत कभी किया जा सकता जैसे सिदारहोमबीफीफोलिया या डेस्मोडियम गैंगेटिकम आदि को सीधे निर्माताओं को निगोशिएसन द्वारा बेचा जाता है।

सरकार व सहकारी संतानों के अथक पर्यटन के बाद भी 70 प्रतिशत गैर कायस्थ वन औषधि वनस्पति व्यापारियों को ही बेचा जाता है क्योंकि व्यापारी कुछ सुविधाएं ( कोई प्रशासनिक झंझट नहीं ) व अग्रिम धन देते हैं। ये व्यापारी खरीदे पादपं को आढ़तियों को बेच देते हैं जो इन पादपों को विदेश व अन्य भारतीय राज्यों में निर्यात करते हैं।

कई जिलों में पादप एकत्रिकर्ता बाजार में बुधवार व शनिवार अपना एकत्रित किया पादप नीलामी द्वारासीधे बेचते हैं (अग्यसत्म बायलोजिकल पार्क कोट्टूर ) . नीलामी फेडरेसन की देखरेख में होता है जिससे व्यापरी आदि वासियों का दोहन न कर सकें। वैसे यह विधि शायद पाचीनतम विपणन विधि है तब फेडरेसन नहीं थे।

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2018, bjkukreti@gmail.com

Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Garhwal , Uttarakhand ; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Chamoli Garhwal , Uttarakhand; Cold Storage for Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Pauri Garhwal , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Tehri Garhwal , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Uttarkashi Garhwal , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Pithoragarh Kumaon , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Champawat Kumaon , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Almora Kumaon , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Nainital Kumaon , Uttarakhand; Marketing of Medicinal Plants in Kerala, Medical Tourism development in Udham Singh Nagar Kumaon , Uttarakhand;

पौड़ी गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; उधम सिंह नगर कुमाऊं मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; चमोली गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; नैनीताल कुमाऊं मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; अल्मोड़ा कुमाऊं मेडिकल टूरिज्म विकास; टिहरी गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; चम्पावत कुमाऊं मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; उत्तरकाशी गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास ; पिथौरागढ़ कुमाऊं मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; देहरादून गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; रानीखेत कुमाऊं मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ; हरिद्वार गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास ; डीडीहाट कुमाऊं मेडिकल टूरिज्म विकास में औषधि पादप विपणन व्यवस्था ;

Nov
12

चखुलुं अंडा फुड़णो पाप

चखुलुं अंडा फुड़णो पाप

सलाणी लोककथौं जणगरु : आचार्य भीष्म कुकरेती

कथा सुणाण वळि : श्रीमती दमयंती कलीराम कुकरेती (जसपुर ढांगू ) .
-
एक दैं मि अर मेरी मां धाणी जाणा था त एक छुटु बेडु डाळम चखुलो घोल देखि मीन नील आकर्षक अंडों पर हाथ लगै दे। आसपास चखुल चूं चूं करणा छा तो मांन जोर की आवाजम ब्वाल – ना ना अण्डों पर हाथ नि लगा त्यार हथ लगाणो बाद चखुलूंन घोल म आण बंद कौर दीण। मि झसकेक भ्युं ऐ ग्यों।
तब मांन या कथा लगै छे -
भौत साल पैल कै गां म एक मनिख छौ सुल्तानु। बड़ो भलो मनिख छा। संत स्वभाव को सुलतान पवित्तर आत्मा छे बल। लोगुं भौत काम आंद छौ। कैक बि मौ मदद करणम पैथर नि रौंद थौ सुलतानू। गाँव वळ सुलतानु भौत बड़ैं करदा था। कुज्याण क्या कांड लगिन धौं बल बुड्या हूण से पैल इ सुल्तानु कुचर काणु ह्वे गे निरपट अन्धो। कथगा इलाज कराई कथगा घड्याळ धरिन धौं पर सुल्तानक आँख ठीक नि ह्वेन कुचरकाणो कुच्यर काण ही राई अर अन्धो ही भग्यान ह्वे।
मरणो बाद बल ज्यूंरा सुलतान तैं भेमाता दरबार म ली गेन। भेमाता (ब्रह्मा ) न निर्णय दे बल सुल्तानन सब पुण्य काम करिन त ये तैं सोरग भयाजो। यु नर्क लैक नी। जु बि एन पाप कौरी छ वांक सजा भूलोक म इ भुक्तिक ऐ गे। बिचारो कथगा साल अंधा राई धौं।
सुल्तानन पूछ – तो भेंटा जी मीन क्वी पाप कार जु मि अंधा हूं ?
भीमाता क जबाब थौ – हाँ तीन पाप कार छौ तो तू अँधा ह्वे।
“मीन क्या पाप कौर जु मि अँधा हूं ?” सुल्तानन पूछ
भीमाता क उत्तर छौ – एक ना तीन पांच छै दैं निरीह चखुलों अंडा फोड़िन जु एक जघन्य पाप च।
या छे पर्यावरण बचाणै कथा।

संदर्भ , भीष्म कुकरेती , सलाण बटें लोककथाएं (श्रृंखला 2003 , रंत रैबार , देहरादून
Copyright@ Acharya Bhishma Kukreti , Mumbai, 2018

Folk stories about environment protection from Jaspur Dhangu , Folks stories about environment protection from Garhwal , Folks stories about environment protection from Uttarakhand ; Folks stories about environment protection from Mid Himalayas; Folks stories about environment protection from North India; Folks stories about environment protection from South Asia , जसपुर मल्ला ढांगू गढवाल की पर्यावरण संबंधी लोक कथाएँ ; गढवाल की लोक कथाएं ; गढवाल , उत्तराखंड की पर्यावरण संबंधी लोक कथाएं ; गढवाल, उत्तराखंड , मध्य हिमालय की पर्यावरण संबंधी लोक कथाएं ; गढवाल, उत्तराखंड , मध्य हिमालय , उत्तरी भारत की पर्यावरण संबंधी लोक कथाएं ; गढवाल, उत्तराखंड , मध्य हिमालय , उत्तरी भारत, दक्षिण एसिया की पर्यावरण संबंधी लोक कथाएं ;

Nov
12

Hospitals , Hospital Construction in Skanda Purana

Hospitals and Construction process of Hospitals in Skanda Purana
History of Medical Tourism, Health and Wellness Tourism in Purana Literature – 8
History of Medical Tourism, Health and Wellness Tourism in India, South Asia – 52
(Special mentions of History of Medicines in India)
By: Acharya Bhishma Kukreti (Medical Tourism Historian)

Atideva states that many Purana describe Arogyashala (Hospitals or Sanatoriums ) . Skanda Purana (7th century AD) admires that an establishment of Arogyashala (hospitals or Sanatoriums ) Skanda Purana describes that one who erects Arogyashala (Hospitals or Sanatoriums ) equipped with qualified physicians and suitable accessories gets the fruits of pious deeds. There is no limit for fruits of pious deeds. Skanda Purana put Arogyadan on top of all donations. Skanda Purana illustrates –
आरोग्यशाला य: कुर्यात म्हावैद्यपुरुस्कृताम
सर्वोपकरवणओपेताम तस्य पुण्यफल शृणु
(Example by Atideva)
Skanda Purana also describes the Hospital construction process and essentials in hospitals (Ayurveda ke Prerarna Srotra ).
Skanda Purana describing building hospitals suggests that there must be sufficient medicines and beds. There must be wise and learned doctor in hospitals .There must be sufficient quantity of food articles in hospitals. Charak Samhita and Kalidasa also described in the same tone or Purana took references from Charaka Samhita about characteristics of hospitals and importance of arranging medical facilities for patients (Atideva) .
It is evident that hospitals were attracting ill tourists from other regions too thus creating medical tourism if not modern way of medical tourism but medical tourism of the respective period.

References –
Atideva, (1960) Ayurveda ka Vrihad Itihas, Hindi Sahitya Sammelan , Banaras pages 117-18
Viadyaraj Pundit Jagish Prsad Shrma bhinandan Samiti 1977

Copyright @ Acharya Bhishma Kukreti, //2018 bjkukreti@gmail.com
History of Medical, health and Wellness Tourism in India will be continued in next chapter –

Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , North India , South Asia; Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , South India; South Asia, Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , East India, , Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , West India, South Asia; Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , Central India, South Asia; Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , North East India , South Asia; Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , Bangladesh , South Asia; Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India, Pakistan , South Asia; Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , Myanmar, South Asia; Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , Afghanistan , South Asia ; Hospitals in Skanda Purana Medical, health and Wellness Tourism in India , Baluchistan, South Asia, to be continued

Older posts «

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.