Sep
17

CEO must learn to focus on fix point at a time

 

 

CEO must learn to focus on fix point at a time

Different Marketing Strategies for fighting with Competitors

Strategies for Executive for marketing warfare

Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 375

Bhishma Kukreti (Marketing Strategist)

s= आधी अ

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कलाsभिलक्षिते देशे यंत्राद्यस्त्र निपातानम् I

The pitching or throwing arms and ammunition towards a fixed point (enemy ) is an art.

 

(Shukraneeti, Chapter 7 Vidya Va  Kala Nirupan- 59   )

The Chief Executive Officer should focus on one point at a time and should avoid taking many points at a time.

Taking a focal point at a time does not create confusion among the responders or staff .

Taking single point for action is surety to complete the job while taking many jobs at a time is the guarantee of many unfinished jobs. .

Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 221

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

Strategies for Executive for marketing warfare

Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Marketing

 

 

 

Sep
16

शरीर जन्य शोथ ) सूजन कारण

 

 

शरीर जन्य  शोथ ) सूजन  कारण 

 

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  

 खंड – १  सूत्रस्थानम अठारवां    अध्याय  (  त्रिशोथीय   अध्याय,   )    पद   बिटेन      तक 

अनुवाद भाग -  १४१ 

गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती 

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 !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 

निज अर्थात शरीर क शोथ – स्नेह ,स्वेद , वमन , विरेचन ,आस्थापन , अनुवासन , शिरोविरेचन के अति या हीन अथवा मिथ्या योगन यूं कर्मों पैथर अपथ्य , वमन , अलसक ,विसूचिका , श्वास , खास , अतिसार , शोष , पाण्डु रोग , जौर , पुटुकौ रोग , प्रदर , भगंदर , प्रदर , अर्श रोगन  , संशोधन कर्म से , कुष्ठ , खाज ,पिडका आदि से , छींक , डंकार , शुक्र , मल , वायु क वेग रुकण से , संशोधन कर्मों से उतपन्न रोगों से , उपवासन ,शरीर क अधिक कर्षणन , एकदम से भारी , खट्टा नमकीन भोजन खाण से , पीठि  से बण्यू    भोजन से ,  फल , शाक , राग (रायता ), खीर , दही हरी भुज्जी , मद्य , धीमा मद्य , अंगर्यां अन्न , शूक धान्य ग्युं आदि , शामी धान्य ,उड़द , मूंग , जलचर प्राणियों सेवनन ,मिट्टी , कीचड़ , खाण से , बिंडी लूण खाणन , गर्भ पर दबाब से , गर्भपात से , प्रसव पश्चात , उचित परिचरय्या नि हूण से , दोषों बढ़न से शोथ उतपन्न हूंद।  यी शरीर जन्य साथ क लक्षण छन।  ४।

 

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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य

संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ  २२०   बिटेन    तक

सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021

शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

 

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद ,

 

Sep
15

हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में कत्यूरी युग : नरेश ललित शूर

हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में   कत्यूरी युग :  नरेश ललित शूर                

 हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में उत्तराखंड पर कत्यूरी राज भाग  – २५
Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History with reference  Katyuri rule -25 
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  327 

                           
हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  ३२७                 


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती -

  कत्यूरी नरेश इष्टगण देव के पुत्र ललित शूर के दो ताम्रपत्र उपलब्ध हुए हैं  (२ ) ।  दोनों ललित शूर के ताम्रशासनों में ललित शूर व ललित शूर के पुरुखों की प्रशंसा हुयी है (२ )।  पहले ताम्रशासन में दूसरे  ताम्रशासन से दो श्लोक अधिक अंकित हैं (३ )।  ललित शूर की उपाधि दोनों ताम्रशासनों में परमभटारक महाराजधिराज परमेश्वर अंकन हुआ है (१ )।
 ललित शूर के ताम्र शासन में  ललित शूर ने अपने को परम महेश्वर परमब्रह्मण्य  घोषित किया है।  ललित शूर के ताम्र शासनों में ललित शूर को शौर्य -वीरातव में ललित शूर की समानता कीर्तिबीज , पृथु व गोपाल से की गयी है (२ )।
ललित शूर के ताम्रशासनों में पाल वंशजों के अभिलेखों का प्रभाव मिलता है (१ )।
ललित शूर के ताम्रशाशनों में ललित शूर के वंशज , राजयधिकारी व भूदानों का उल्लेख तो हुआ है किन्तु अन्य ऐतिहासिक घटनाओं का समावेश नहीं हुआ है (३ ) ।
संदर्भ :
  १- शिव प्रसाद डबराल ‘चारण ‘ ,  उत्तराखंड का इतिहास भाग ३ वीरगाथा प्रेस दुगड्डा , उत्तराखंड , पृष्ठ  ४५३
२- ललित शूर के ताम्रपत्र पृष्ठ  ५ व ६  
३ शिव प्रसाद डबराल ‘चारण ‘ ,  उत्तराखंड का इतिहास भाग  १  वीरगाथा प्रेस दुगड्डा , उत्तराखंड , पृष्ठ३७९
Copyright @ Bhishma  Kukreti 
हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का  कत्यूरी युगीन प्राचीन  इतिहास   अगले खंडों में , कत्युरी वंश इतिहास और हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर , ललित शूर कत्यूरी राजा का ताम्रशासन , कत्यूरी ,  ललितशुर का चरित्र 

Sep
15

बाह्य जनित सूजन का कारण

बाह्य जनित सूजन का कारण 

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  
 खंड – १  सूत्रस्थानम ,  अठारवां    ध्याय  (  त्रिशोथीय   अध्याय )  १  पद  ३  बिटेन   तक 
  अनुवाद भाग -  १४० 
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती 
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 
ये से अगनै त्रिशोथिय अध्याय कु  व्याख्यान करला जन न बोलि  छौ।  १ -२।
शोथ या सूजन तीन प्रकारा  हूंदन – वातन , पित्तन , कफ़न जन्म्या सूजन।  यु तीन प्रकारौ शोथ फिर द्वी प्रकारौ हूंदन – १ शरीर म पैदा हूण  वळ निज  २ व  भैर से प्रभावित आगन्तु सूजन।  यूंमा आगन्तु शोथ छेदन , भेदन /फड़न , चूरा  करण ,भंजन या सर्जरी , भौत जोर कैक दबाण से , पीसण , लपेटन , चोट , मरण , बंधण , पीड़न आदि से हूंद।  या भिलाव क पुष्प रस से , कौंच की  फली से , रोंयेदार कीड़ा से , बिच्छू घास /कंडाळी पत्तों से , झाड़ -झंकारक स्पर्श से , आगन्तु शोथ पैदा हूंद।  अथवा विषयुक्त प्राणियों पसीना /मैल /मल से , शरीर पर चलण -फिरण से , विषैला  दाढ़ , ,सींग  नंग क प्रहार से , कृत्रिम विषयुक्त वायु से , वर्फ या ागक स्पर्श से हूंदन।  यी आगन्तु शोथ प्रथम कारणों से प्रकट होंदन।  आगन्तु शोथ से पैल लक्छण पैदा हूंदन अर बीमारी पैथर।  यी पट्टी , लेप , मंत्र ,ौषध प्रलेप , सेक आदि से या शोधन रोपणादि चिकित्सा से शांत हूंदन।  ३।
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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ  २२०   बिटेन    तक
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम 
चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद , त्रिशोथ अध्याय , त्रिशोथ चर्चा

Sep
14

CEO must understand the Means of hand to hand fight

CEO must understand the Means of hand to hand fight

Different Marketing Strategies for fighting with Competitors

Strategies for Executive for marketing warfare

Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 373

Bhishma Kukreti (Marketing Strategist)

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मृतस्य तस्य न स्वर्गो यशो नेहापि विद्यते I

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कृत निपीडनं गेयं तन्मुक्तिस्तु प्रतिक्रिया II

That who died in one to one fight neither gets heaven nor gets praise in this earth. The hand to hand fight should be fought till last breath. Because, there must be fight till the pride of enemy is zeroed. .  Attack by hands, defend the hand attack, attacking various means by hand, attack by hand with speed, continuous attack on enemy, kill or injure the enemy, injuring or killing the enemy by taking benefit of carelessness of enemy, all the cited fighting is called Nipeedan  (offence or attack) and defence is called Pratikriya (  defence or reaction). All these hand to hand fight are part of art.

(Shukraneeti, Chapter 7 Vidya VA Kala Nirupan- 56 -58  )

Physically, CEO does not need to fight hand to hand with the competitors. However, there are many instances where the strategies of hand to hand fight are used in dealing with the competitors (organizations or individually) . All marketing fights are equal to the war /battle or fight in action especially, in creating marketing strategies.

Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 221

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

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Strategies for Executive for marketing warfare

Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Marketing

Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Brand Image

Strategies for the Chief Executive Officers responsible for winning Competitors

Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer

(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)

(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)

Successful Strategies for successful Chief executive Officer

 

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