Jan
29

, ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते , गढ़वाली, व्यंग्य

 

भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -     गढ़वाली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश   B - 82

 

(English -Garhwali  Dictionary of Satire , Sarcasm,  Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )

(गढ़वाली ,  व्यंग्य,  हंसी, जोक्स ,  चिढ़ाते , धृष्टता करते ,ठट्टा लगाते  ,

ताना मारते , झिड़कते शब्द -परिभाषा शब्दकोश , व्यंग्यकोश     )

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संकलन - भीष्म कुकरेती

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War,जुद्ध = शांति रखणो बान करे जांद

Warfare व्यापारियों कुण भौत लाभकारी

Warlike,लड़ाकू = मि ना स्यु

Warrant,वारंट, परवाना  = गरीब कुण सौकार कुण ना

Wart,मस्सा = ब्वे कथगा बि ब्वालो जन्म चिन्ह च पर असलियत तो सबि  ..

Wasteful,हानिकारक = अमेरकी घमंड

Watching निगराणी  करण =या बुरी आदत सब्युं की हूंद

Waterfall झरना /छिंछ्वड़ = प्रकृति को विज्ञापन

Waterproof जलरोधक = गंदा बच्चा

Wealth धन =कै कुण सुपिन कैकुण बुरो सुपिन

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Copyright@ Bhishma Kukreti , 2020

गढ़वाली हास्य , गढ़वाली व्यंग्य , ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते , गढ़वाली,  व्यंग्य, मजाक उड़ाते गढ़वाली व्यंग्यकोश  , Roasting Garhwali satire , Sarcastic definitions in Garhwali , Sarcasm from  North  India Garhwal ,Garhwali  South Asian Satire , भारतीय सभ्य हंसी व व्यंग्य , Satire from Uttarakhand  , South Asian satire, Mid Himalayan  satire,

 

Jan
28

सौड़ गांव के बण्वा सिंह नेगी की पारम्परिक भवन की तिबारी में काष्ठ उत्कीर्ण कला

सौड़ गांव के बण्वा सिंह नेगी की पारम्परिक भवन की तिबारी में काष्ठ उत्कीर्ण कला 

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Traditional House Wood Carving (Tibari )  Art of Saur village , Dhangu , Garhwal, Himalaya

सौड़  संदर्भ में ढांगू गढ़वाल , हिमालय  की पारम्परिक भवन की तिबारियों पर अंकन कला -7

Traditional House wood Carving Art on Tibari  of Dhangu , Garhwal, Himalaya -7

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उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी ) काष्ठ अंकन लोक कला ( तिबारी अंकन )  -   11

Traditional House Wood Carving Art (Tibari Art ) of Uttarakhand , Himalaya -

( चूँकि आलेख अन्य पुरुष में है तो श्रीमती , श्री व जी शब्द नहीं जोड़े गए है )

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संकलन – भीष्म कुकरेती

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सौड़ मल्ला ढांगू (द्वारीखाल ब्लॉक ) पौड़ी गढ़वाल का एक छोटा गाँव है जो  प्राचीन काल में सैकड़ों सालों से  जसपुर ग्रामसभा का हिस्सा था।  अब सौड़ जसपुर से अलग कर अलग ग्रामसभा बना दी गई है।  सौड़ में सभी परिवार नेगी हैं।  सौड़ कम से कम दो सालों से भवन  निर्माण शिल्प (ओड ) व भवन व घरेलू उपकरण काष्ठ शिल्प हेउ प्रसिद्ध रहा है।  1970 से पहले सौड़ में प्रत्येक परिवार भवन निर्माण शिल्प से जुड़ा था।  अब सौड़ के नेगी परिवार भवन निर्माण तो नहीं करते किन्तु भवन निर्माण ठेकेदारी करते हैं।  सौड़ गांव सदा से ही उपजाऊ जमीन व भरपूर फसल हेतु जाना  जाता  रहा है।  कर्मठता हेतु भी सौड़ का बड़ा नाम रहा है।  सौड़ जसपुर के पश्चिम में जसपुर व गोदेश्वर पर्वत की घाटी में चौरस स्थान का गांव है और सौड़ क्र पश्चिम में इसी घाटी में छतिंड गाँव है।

सौड़ में बण्वा  सिंह नेगी व शेर सिंह नेगी की दो तिबारियां अभी तक सही सलामत है किन्तु   बण्वा  सिंह नेगी  की तिबारी खप सी रही है क्योंकि  बण्वा सिंह नेगी ने  1960  के लगभग नया मकान बना लिया था।  दोनों तिबारी काष्ठ  कला दृष्टि से भव्य या उच्च मानी जाती है।

बण्वा  सिंह नेगी की   तिबारी (Tibari ) में   पक्षी व पशु अलंकरण  (Figurative ) अंकन है,  प्राकृतिक अलकंरण  व ज्यामितीय चारों  प्रकार के अलंकरण  चित्रित या उतकीर्त हैं।   बण्वा  सिंह नेगी की तिबारी में मानव अलंकरण नहीं मिलते है न ही कोई नजर न लगे वाला महामानव का अलंकरण मिलता है।

बण्वा  सिंह नेगी  की तिबारी (Tibari ) वास्तव में    बण्वा  सिंह नेगी  के पिता ने निर्मित करवाई थी।

बण्वा  सिंह नेगी की तिबारी (पहली मंजिल का खुला बरामदा ) भी ढांगू की अन्य तिबारियों की तरह ऊपरी पहली मंजिल पर ही स्थापित है याने नीचे दो दो दुभित्या कमरे हैं व ऊपरी मंजिल पर बाहर के दो कमरों  के ऊपर बरामदा है और बरामदा के द्वार पर  चार स्तम्भ / सिंगाड़ है जो तीन मोरी / द्वार बनाते हैं।   दो किनारे के काष्ठ स्तम्भ  अन्य काष्ठ कड़ी के जरिये दीवार से जुड़े होते हैं। तिबारी के कोने वाले स्तम्भ को जोड़ने वाले स्तम्भ या शाफ्ट पर भी कला कृतियां उत्त्कीर्णित हैं (carved ) .  दिवार व स्तम्भ को जोड़ने वाली कड़ी /शाफ़्ट पर  प्राकृतिक  अलंकरण दोनों अंकित है।  दिवार -स्तम्भ जोड़ कड़ी  या खम्भे पर  बेल  बूटे दृष्टिगोचर होते हैं। इस तिबारी स्तम्भ -दीवार जोड़ खम्भे पर पशु -पक्षी या मानवीय अलंकरण बिलकुल नहीं है।

सौड़ गांव के इस तिबारी में भी निम्न तकनीक प्रयोग हुयी हैं

उभरी या उभारी गयी नक्कासी (Relief Carving Technique )

अधः काट नक्कासी तकनीक (Under Cutting Carving   Technique )

तेज धार /छेनी से कटाई तकनीक /खड्डा करती विधि  (Incised Carving Technique )

मूर्ति सदृष्य सदृश्य /मूर्तिवत नक्कासी ( Sculpturesque Carving   Technique)

वेधित करती नक्कासी तकनीक  (Pierced Carving  Technique)

इसके अतिरक्त -

दरवाजों पर छीलने वाली तकनीक (Chips Carving )

बण्वा  सिंह नेगी की  तिबारी के चारों  मुख्य  स्तम्भ ज्यामितीय कला, अलंकरण कला दृष्टि व  नाप दृष्टि से एक जैसे ही है.  प्रत्येक तिबारी  स्तम्भ कुम्भाकार आधार पर पत्थर के छज्जे पर टिका है।  कुम्भकार आधार  वास्तव में अधोगामी पदम् पुष्प दल कृति है।  अधोगामी पदम् पुष्प दल  के आधार पर उपधानी /गोलगुटका नुमा व गड्ढा से नीचे आते है व इसी उपधानी से ऊर्घ्वाकार पदम् पुष्प दल शुरू होते हैं व कुछ ऊपर  खिल जाते हैं।  जब खिलता कलम समाप्त होने होता है वहां से खम्भा  /शाफ़्ट पर ज्यामितीय अलंकरण है।  गड्ढे वाली  रेखा व उभरी खड़े रेखाएं।

स्तम्भ /column से जब मेहराब  शरू होने वाली होती है तो उससे पहले उपधानी से नीचे अधोगामी कमल पुष्प दल उभर कर आते है और कमल पुष्प जड़ से उपधानी के ऊपर की ओर प्रकृति जन्य अंकन ( पत्ती  जैसे फर्न की पत्ती  हो ) उभर कर आते है। यहीं से मेहराब का अर्ध मंडल (arch ) शुरू होता है जो ऊपर दूसरे स्तम्भ के अर्ध मंडल से मिलकर मेहराब बनता है।  मेहराब के दोनों मंडलों में किनारे पर शुभ प्रतीक चंद्राकार पुष्प दल हैं व पुष्प के मध्य में गणेश  चिन्ह (अर्ध अंडाकार ) स्थापित है। जहां पर दोनों स्तम्भ के अर्ध मंडल मिलते हैं वहां एक शुभ संकेत प्रतीक है।

मेहराब की पत्ती पर बेल बूटों का अंकन   बड़ा आनंद दायी है।

तिबारी स्तम्भ में जहां से मेहराब के अर्ध मंडल शुरू होते हैं वहीँ से स्तम्भ पर ऊपर छत की और एक बड़ी प्लेट (थांत ) शुरू होता है जो मेहराब के शीर्ष /सर से मिलता है।  इस थांत के ऊपर मोर नुमा चिड़िया का गला व चोंच उभर कर आते हैं  (अभिवार या bracket ) ये मोर भी नयनाभिराम छवि देते हैं और कुल चार मयूर पक्षी उभारे गए हैं।

अब तो तिबारी के मेहराब के ऊपर मेहराब शीर्ष  की लकड़ी समाप्ति पर ही है किन्यु  जिन्होंने देखा है वे बताते हैं छत के नीचे प्लेट्स /पट्टियों पर हाथी भी अंकित थे।  मेहराब शीर्ष से ऊपर  की पट्टियों में बेल बूटे अंकित हैन व छत की पट्टी से शंकुनुमा आकृतियां लटकी हैं।

सौड़ ढांगू के बण्वा  सिंह नेगी की  तिबारी   तिबारी कला का एक उम्दा उदाहरण है जिसमे सभी प्रकार की कलाएं – प्राकृतिक , ज्यामितीय , प्रतीकत्मक , व मानवीय (Figurative ornamentation ) अलंकरण हुआ है। व भारत में उपलब्ध सभी उत्कीर्ण अंकन  तकनीक का प्रत्योग हुआ है (

बण्वा  सिंह नेगी की  तिबारी  में गढ़वाल ,की अन्य तिबारी   जैसे साम्यता  ही नहीं अपितु गुजरात के   कई काष्ठ  तिबारियों  से भी मेल खाती  है गुजरात में तिबारी अधिकतर तल मंजिल पर थीं बाद में ब्रिटिश काल में काष्ठ स्तम्भ व लकड़ी ब्रैकेट /अभिवार पत्थर के बनने लगे ( देखें —-जय ठक्कर  , 2004 , नक्श , स्कूल ऑफ इंटीरियर डिजायन , पृष्ठ 6 , 7 , 11 व इंट्रोडक्शन अध्याय, व वी   . ऐस  . परमार , 2001 द वुड कार्विंग ऑफ़ गुजरात ,  सूचना विभाग प्रकाशन , पृष्ठ प्रवेश अध्याय व प्लेट अध्यन  )

बण्वा  सिंह नेगी की  तिबारी के निर्माण समय व तिबारी कलाकारों के बारे में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है।

कभी यह तिबारी भी शेर सिंह नेगी की तिबारी जैसे ही शान शौकत वाली तिबारी थी किन्तु अब संरक्षण की प्रतीक्षा में है।  राज्य सरकार को क्षेत्र के कॉलेज छात्रों की सहायता से क्षेत्र में तिबारियों का सर्वेक्षण करवाना चाहिए व तिबारियों के स्थान पर तिबारी मालिकों को वैकल्पिक जगह देकर तिबारी तोड़न बंद करवाना चाहिए व तिबारियों का संरक्षण रोमा शहर मुताबिक करना चाहिए ।

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सूचना व फोटो आभार – आलम सिंह नेगी,  कीर्ति  सिंह नेगी , व दीनू  नेगी  (सौड़ )

Copyright @ Bhishma Kukreti , 2020

House Wood Carving Art of, Dhangu, Himalaya; House Wood Carving Art of  Malla Dhangu, Himalaya; House Wood Carving Art of  Bichhala Dhangu, Himalaya; House Wood Carving Art of  Talla Dhangu, Himalaya; House Wood Carving Art of  Dhangu, Garhwal, Himalaya; ढांगू गढ़वाल (हिमालय ) की भवन काष्ठ कला , हिमालय की  भवन काष्ठ कला , उत्तर भारत की भवन काष्ठ कला Glossary Tibari a House  wood Art of Uttarakhand , Himalaya ;  Tibari a House  wood Carving Art of Garhwal , Uttarakhand

Jan
28

ठट्टा लगाते , ताना मारते , झिड़कते शब्द

भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -     गढ़वाली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश   B - 81

 

(English -Garhwali  Dictionary of Satire , Sarcasm,  Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )

(गढ़वाली ,  व्यंग्य,  हंसी, जोक्स ,  चिढ़ाते , धृष्टता करते ,ठट्टा लगाते  , ताना मारते झिड़कते शब्द -परिभाषा शब्दकोश , व्यंग्यकोश     )

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संकलन - भीष्म कुकरेती  

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Wager,दांव =अधिकतर अधिकित्र लोगुं सही नि लगद

Wagon,गाड़ी – सबसे बिंडी लोग यां  मंगन गिर्दन

Wail,विलाप = बच्चों द्वारा अलार्म बजाण

Waist,कमर , कटि = रतिकालीन कवियों प्रिय विषय

Waiter वेटर = एक कौम जु टिप्स अर गाळी खाणो बान जिन्दा रौंद

Waitress वट्रेस्स =मथि जनि बस यौन शोषण ऑवर जोड़ द्यावो

Wake,जगण,  जगाण = इच्छा से दूर

Walking घुमण = जै तै बेकार म एक्सरसाइज नाम दिए गे

Wallet, बटुआ =   सड़क म  बसम आदि जगा म खुले  आम  नि दिखये जांद

Wallflower,भित्ति पुष्प  = पार्टी म मी भी

 

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Copyright@ Bhishma Kukreti , 2020

गढ़वाली हास्य , गढ़वाली व्यंग्य , ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते , गढ़वाली,  व्यंग्य, मजाक उड़ाते गढ़वाली व्यंग्यकोश  , Roasting Garhwali satire , Sarcastic definitions in Garhwali , Sarcasm from  North  India Garhwal ,Garhwali  South Asian Satire , भारतीय सभ्य हंसी व व्यंग्य , South Asian satire, Mid Himalayan  satire,

Jan
27

गढ़वाली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश

 

भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -     गढ़वाली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B - 80

 

(English -Garhwali  Dictionary of Satire , Sarcasm,  Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )

(गढ़वाली ,  व्यंग्य,  हंसी, जोक्स ,  चिढ़ाते , धृष्टता करते ,ठट्टा लगाते  , ताना मारते झिड़कते शब्द -परिभाषा शब्दकोश , व्यंग्यकोश     )

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संकलन – भीष्म कुकरेती

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Volunteer , स्वयंसेवक = चूसक

Vote वोट = इथगा तागतवर नि हूंद जथगा समजे जांद

Voter वोटर – ढिबरुं  की अलग जाति

Voucherवाउचर = बौगाणो कागज जु बेवकूफ बणान बरोबर ही हूंद

Vulture गिद्ध = जु बि विज्ञापन से जुड्युं  हो

 

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Copyright@ Bhishma Kukreti , 2020

गढ़वाली हास्य , गढ़वाली व्यंग्य , ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते , गढ़वाली,  व्यंग्य, मजाक उड़ाते गढ़वाली व्यंग्यकोश  , Roasting Garhwali satire , Sarcastic definitions in Garhwali , Sarcasm from  North  India Garhwal ,Garhwali  South Asian Satire , भारतीय सभ्य हंसी व व्यंग्य , South Asian satire, Mid Himalayan  satire,

 

Jan
26

बजारी कठूड़ में जोत सिंह /प्रताप सिंह या नत्थी सिंह नेगी की तिबारी (कोठाभितर ) में काष्ठ कला

 

बजारी कठूड़ में जोत  सिंह /प्रताप सिंह या नत्थी सिंह नेगी की तिबारी (कोठाभितर )की  काष्ठ कला

कठूड़ संदर्भ में ढांगू गढ़वाल , हिमालय  की तिबारियों पर काष्ठ अंकन कला -4

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उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी ) काष्ठ अंकन लोक कला ( तिबारी अंकन )  -   8

( चूँकि आलेख अन्य पुरुष में है तो श्रीमती , श्री व जी शब्द नहीं जोड़े गए है )

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संकलन – भीष्म कुकरेती

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बजारी कठूड़ में कई तिबारियां हैं और ‘क्वाठा भितर ‘ की तिबारी  अध्क प्रसिद्ध हुयी।  ‘क्वाठा भितर ‘ अर्थात किले के भीतर।  साफ़ है कि यह तिबारी थोकदारों की या सौकारों की तिबारी थी।  पारिवारिक रूप से जोत  सिंह नेगी व प्रताप सिंह नेगी आखरी उत्तराधिकारी थे जिन्होंने देहरादून स्थांनतर  होने के बाद यह तिबारी /क्वाठा भितर  नत्थी सिंह नेगी को बेच दी थी जिसे अब नत्थी सिंह नेगी की तिबारी कहा  जाता है।

क्वाठा भितर की तिबारी भव्य या उच्चकोटि श्रेणी में आती  है

कोठा भितर की  तिबारी भी पहली मंजिल पर ही है।  तिबारी में चार काष्ठ स्तम्भ हैं , दो स्तम्भ  दिवार से लगे हैं व ये चार  काष्ठ स्तम्भ तीन खोली , मोरी /द्वार बनाते हैं। प्रत्येक  स्तम्भ  पत्थर  के छज्जे पर आधारित हैं व हाथीपांव जैसे आधार छवि प्रदान करते हैं।

उल्टा कमल  दल व ऊर्घ्वाकर पदम् पुष्प दल व   गुटके

स्तम्भ आधार के बाद उलटा पदम् पुष्प दल है जो उलटे कमल शुरू होने  के बाद गुटके नुमा आकृति में बदल जाता है।  फिर ऊर्घ्वाकार कमल दल आकृति है व ऊपर की ओर आगे जाकर  स्तम्भ मेहराब  से जुड़ जाता है। दो  स्तम्भों से मेहराब का अर्ध धनुष या मंडल आपस में मिलकर मेहराब बनाते हैं।

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मयूर पक्षी आकृति

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जहां से मेहराब शुरू होता है स्तम्भ पर  मयूर  नुमा पक्षी का गला व चोंच आकृति उभरती है।

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पुष्प आकृति

प्रत्येक मेहराब में किनारे पर  एक एक चक्राकार नुमा पुष्प  उत्कीर्णित है व बीच में गणेश प्रतीक है।

शुभांकर

मेहराब के शीर्ष के ऊपर  चौड़ी प्रस्तर पट्टिका है जिस  पर कई प्रकार की जाली व बेल बूटे की आकृतियां उभरे हैं , इस प्रस्तर (entablature ) के मध्य स्तम्भ के ठीक ऊपर शंकुनुमा व डमरू छवि लिए काष्ठ आकृति ऊपर से लगे हैं।  कुल चार इस तरह के शुभ प्रतीक की आकृतियां हैं

अंत में प्रस्तर या मेहराब के ऊपर की पट्टी /पत्तियां छत के आधार वाले काष्ठ पट्टी से मिल जाते हैं

दीवार से स्तम्भ को जोड़ने वाली  खड़ी काष्ठ पट्टी पर बेल नुमा आकृति उभरी हैं।

अपने शुरुवाती दिनों में अवश्य ही यह तिबारी भव्य रही होगी।

तिबारी का समयकाल की सूचना  नहीं मिल सकीय है किन्तु 1900 के बाद ही इस तिबारी का निर्माण हुआ होगा।  इसी तरह तिबारी में काष्ठ कलाकारों  /उत्त्कीर्णकारों ) की कोई सूचना उपलब्ध नहीं है हाँ इतना कहा जा सकता है कि क्वाठा भितर तिबारी  के काष्ठ कलाकार ढांगू के नहीं थे क्योंकि ढांगू के स्थानीय तिबारी काष्ठ कलाकारों की कोई संस्कृति नहीं थी।

सूचना व फोटो साभार – सतीश कुकरेती (बजरी कठूड़ )

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Copyright @ Bhishma Kukreti , 2020

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