Nov
25

प्यारा घर , स्वीट होम याने युद्ध क्षेत्र

प्यारा घर , स्वीट होम याने युद्ध क्षेत्र

(Best of Garhwali Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट ::: भीष्म कुकरेती

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घर चाहे गांवक तिभित्त्या बड़ो कूड़ ह्वावो , चाहे ड्याराडूणम कोठी हो या मुंबई मा एक रूम कु आलिशान फ़्लैट हो सब प्यारा घौर हूंदन , स्वीट हून्दन। हरेक अपण गाँव अर घर तै महानतम स्वर्ग समजद। अर हमेशा बड़ो स्वर्ग की आकांक्षा रखद।
हर घर प्यारा घर हूंद , स्वीट होम हूंद किन्तु वास्तव मा घर सबसे बड़ो युद्ध क्षेत्र हूंद। हिन्दुस्तान -पाकिस्तान बॉर्डर पर उथगा सीमा उललंघन नि हूंदन जथगा घौरम बॉर्डर क्रॉसिंग नियमों उलंघन हूंदन। भारत -चीन बॉर्डर पर द्वी देस उथगा सावधानी नि बरतदन अर युद्ध कौशल नि दिखान्दन जथगा सावधानी हम अपण घौरम दिखांदा।
जी घर स्वीट होम ना वास्तव मा एक वार जोन हूंद जै तै हम सुविधा भोग्युंन लव जोन नाम दे द्याई।
दिन मा या रात मा पता नी कथगा दैं पति पतन्यूं मध्य अमेरिका अर क्यूबा जन तनाव हूंद धौं। जन भौत दैं अमेरिका अपण मिसाइल तैनात कर दींदु अर कथगा दैं क्यूबा बि उधार का मिसाइल अमेरिका जिना घुमै दींद उनी पति -पतन्युं मध्य तनाव चलण इ रौंद। जन क्यूबा -अमेरिका तनाव मा रौंदन किन्तु संधि नि कर सकदन उनि भौत सा पति पतन्यूं हाल हूंदन , जोड़ी तनावप्रेमी ह्वे जांदन। स्वीट होम मा तनाव का माहौल हमेशा रौंदन ।
भौत सा प्यारा डियर होम मा पति पतन्यूं मध्य जैदिन वाक् युद्ध नि हो तो पड़ोस्यूं निंद भंग ह्वे जांद जन जैदिन समाचार हो कि पाकिस्तानन सीमा रेखा का उललंघन नि कार तो भारतीयों क नींद हर्चि जांद।
कुछ प्यारा घरम वाक् युद्ध शारीरिक युद्ध मा परिवर्तित ह्वे जांद अर जन हमेशा ही अमेरिका की हेकड़ी हि जितद तनि गृह युद्ध मा गृहणी कु मुंड फुटद। हां कबि कबि क्वी बीरांगना जापान बण जांदी अर अमेरिकी हवाई द्वीप तहस नहस कर दींदी किन्तु हमेशा ही रानी की ही हार हूंद जन अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर न्यूक्लियर बमबारी से जापान तै शांति पत्र पर जबरन दस्तखत करण पोड़िन उनि पत्नी तै पति की शान्ति शर्त मनण ही पड़द निथर घौरम इजरायल -फिलिस्तान जन माहौल बण्यूं रौंद।
सास ब्वारिक युद्ध पर तो पता नि कथगा साहित्य सरा दुनिया मा लिखे गे धौं। सास -ब्वार्युं युद्ध त भारत -पाक या इजरायल -फिलिस्तान जन स्थति च। द्वी जगा द्वी देस पड़ोसी नि बदल सकदन , पर शांति की जगा युद्ध तै ही पर्याय समजदन उनि सास ब्वारी बि मनमिटाव तै अंतिम पड़ाव समजदन।
संजैत प्रॉपर्टी का बान भाइयों मध्य क्या क्या युद्ध नि हूंदन यु बताणै जरूरत नी च किन्तु फिर बि घौर तो स्वीट होम ही माने जांद। कश्मीर की समस्या अर प्रॉपर्टी बान भायुं लड़ै इकजनि च।
फिर भौत सा घरम बच्चा बिगड़न पर युद्ध हूंद इ रौंदन। अमूनन जन अमेरिका या चीन पाकिस्तान तै हर दैं सह दीणा इ रौंदन अर पाकिस्तान दिनों दिन उछ्यदी हूणी जाणु च उनि बच्चा बि या तो ब्वे या बाबु सह से ही बिगड़द।
हरेक युद्ध मा शरणार्थी पैदा हूंदन उनि प्यारा सा गृह युद्ध मा क्वी ना क्वी शरणार्थी पैदा हूंदी च। गृह युद्ध मा अधिकतर बच्चा ही शरणार्थी बणनो मजबूर हूंद अर वेकी शरणार्थी स्थल हूंद स्वीट होम का क्वी कूण्या , भैर बिगड्यां छवारों संगत या रिश्तेदारों छत्र छाया। जन शरणार्थी दुसर देस मा समस्या खड़ी करदन बच्चा जब रिश्तेदारों क इख शरण लींद त शरण दाता का ड्यार कुछ ना कुछ समस्या खड़ी त कौरी दीन्द। रोहिंग्या शरणार्थी का बान त भारत मा सेक्युलर अर नेशनलिस्टों मध्य तलवारबाजी शुरू ह्वे गे छे। जब क्वी बच्चा अपण मामा या चाचा -बाडा का घौर शरण लींद तो उख मामा -मामी मध्य अलग तरां कु तनाव पैदा ह्वे जांद जन कि रोहिंग्या शरणार्थीयों वजै से भारतम बिन बातौ तनाव पैदा हुयुं च।
जनकि हर युद्ध कु जन्मस्थल अहम् च उनि घौरम बि युद्ध का जनम अहमौ कारण ही हूंदन।
अब आपि बथावो बल हमर घर स्वीट होम च या छुट मुट वार जोन ?

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25/11 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India

*लेख की घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने हेतु उपयोग किये गए हैं।
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—– आप छन सम्पन गढ़वाली —-
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Nov
24

सारस

सारस
Sarus Crane or Sarus ( Grus antigone)

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गढ़वाल की चिड़ियायें – भाग -23

( Birds of Garhwal; Birding and Birds of Garhwal, Uttarakhand, Himalaya —– 23)
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आलेख : भीष्म कुकरेती , M.Sc.
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उड़ते पक्षियों में सबसे ऊँचा पक्षी सारस है। सिलेटी सफेद रंग के सारस का सिर और उपरी गर्दन लाल होती है। इसकी कलगी राख जैसी होती है। इलेती सफेद पंख किनारे से नीचे से काले होते है जो उड़ते समय दीखते हैं। सारस जोड़ी में ही रहता है और दलदल स्थल पसंद करता है। सारस का भोजन कंद , कीड़े मकोड़े होते हैं। सारस की प्रजाति खतरे में है। सारस भाभर व मैदानी भागों में पाया जाता है।
सारस की लम्बाई 115 से 167 सेंटी मीटर तक व भार 6 से 8 किलो ग्राम तक होता है

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सर्वाधिकार @सुरक्षित , लेखक व भौगोलिक अन्वेषक

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Nov
24

खुंकरी गोरखा जैसी, तोप बोफोर्स जैसी और दोस्ती तेरे जैसी

खुंकरी गोरखा जैसी, तोप बोफोर्स जैसी और दोस्ती हो तो तेरे जैसी

(Best of Garhwali Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट ::: भीष्म कुकरेती

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प्रिय मित्र – जैन मि तैं बीमार कार,
त्वेकुण भौत दिनुं बिटेन त्यार म्यार ड्यार आणो वास्ता धन्यवाद दीणो सुचणु थौ पर जब बि मि डियर फास्टेस्ट फ्रेंड लिखदु इ थौ कि फकाफक छींक ऐ जावो। अर म्यार मूड त छोड़ आस पास की धरती बीज बूण जोग ह्वे जांद छै। इन बरषीली , पंद्यरि , ह्यूमिड अवस्था मा मि दगड़्या कुण चिट्ठी या मेल भिजण मुनासिब नि समजदु।
किन्तु प्रिय मित्र ! तेरी घनिष्ट मित्र प्रेम की मि प्रशंसा कर्युं बगैर नि रै सकुद। मि त त्यार समिण तुच्छ मित्र छौं जु जुकाम की स्थिति मा अपण दगड़्या कुण चिट्ठी नि भेज सकणु छौं अर एक तु छे जु इथगा भयंकर बीमारी की स्थिति मा मि तैं मिलणो ऐ। सचमुच मा त्यार सखा प्रेम कृष्ण से बि बड़ो च जु बाढ़युक्त छींकाछींकी अवस्था मा बि मि तै मिलणो ऐ।
वास्तव मा हमर परिवार त्यार गाढ़ो प्रेम से गदगद छौ कि तु भयंकर खांसी , छींकापटी आर बगदा नाक का साथ हमर ड्यार पधारी। त्यार मित्र प्रेम देखिक त उख सुदामा सखा कृष्ण बि शरमाणा होला।
तेरी बीमारी की कथा से हम सब तैं मजा आयी अर बड़ो सकून मील कि तीन दिन पैल तेरी खांसी दस बार प्रति घंटा छे अर तब पांच बार प्रति घंटा छे अर हमन वास्तव मा तीन घंटा मा पंदरा बार ही तेरी खांसी म्यूजिक सूण। बड़ी खुसी ह्वे छे तब तीन दिन पैल त्यार बुखार 103 डिग्री छे अर तू 102 डिग्री मा हमर ड्यार ऐ। तेरी छींक प्रतिशतता मा कमी सूणी बि हम सब तै प्रसन्नता ह्वेई। कख त्यार आठ रुमाल प्रति घंटा भिजदा छा अर हमर ड्यार तीन घंटा मा केवल आठ रुमाल भीगेन अर ऊं आठ रुमाल मादे हमर पांच रुमाल छा। जब बि गिनीज बुक मा मित्र प्रेम कु इतिहास लिखे जालो त्यार नाम अवश्य आलो। गिनीज बुक मा त्यार नाम नि आलो त कैक नाम आलो। भीगी भीगी आँखों का साथ जु दुख्यर मित्र दर्शन अर हम सुख्यरुं हाल चाल पूछणो आलो त अवश्य ही वु ही सच्चो फ्रेंड होलु।
ए फ्रेंड इज इनडीड ए रियल फ्रेंड हू गिव्ज सम मेमोरेबल गिफ्ट्स टु हिज फ्रेंड।
वास्तव मा तु हमर वास्तविक फ्रेंड छे। तेरी फ्री गिफ्ट्स हमकुण मिमोरेबल गिफ्ट छै। जनि तु हमर ड्यार से दूर ह्वे कि तेरी प्रेम भेंट का असर सरा घौर पर शुरू ह्वे गे छा।
सबसे पैल मीन तेरी मित्र भेंट का खुलेआम प्रदर्शन कार। मीन सरा फ़्लैट मा छींकारौळ डांस शुरू कौर दे। मेरी छींकारौळ से हमर हरेक रूम की ह्यूमिडिटी (आद्रता ) मा अचानक उछाळ ऐ गे। हमर घौर मा जथगा भी रुमाल छा वु सब छींक ह्यूमिडिटी की भेंट चढ़ गेन।
म्यार छींकारौळ डांस से मेरी मा बि बड़ी प्रभावित ह्वे अर ये मेरी ब्वे ! मेरी मा बि छींकारौळ डांस करण मिसे गे। हमर इख ह्यूमिडिटी ग्राफ और बि बढ़ण मिसे गे अर आउडिओ लेबल मा भयंकर इजाफा हूण शुरू ह्वे गे। हम माँ -बेटा की छींका छींकी प्रतियोगिता से मेरी पत्नी बड़ी ही प्रभावित ह्वे अर वीन बि स्नीजिंग डांस शुरू कौर दे।
कुछ देर बाद खांसी छींक से जळण -भुनण लग गे अर हम सब्युं पर खांसी शुरू ह्वे गे , इथगा मा टेम्प्रेचर तैं यूं दुयूंक नाटक से गुस्सा ऐ गे अर वो गुस्सा मा मथि चड़न लग गे।
बड़ नौनु तै हमर ह्यूमिडिटी इन्हैन्सिंग डांस पसंद नि ऐ अर उ हम तै डाक्टरम ली गे।
डाक्टर हम पर बुखार से बि अधिक गरम ह्वे गे अर बुलण लग ,” आप लोगों तैं कुछ कॉमन सेन्स च कि ना ? फ़्लू सीजन चलणु च अर तुम फ़्लू वळ बीमार तै दिखणो गेवां ?”
अब मित्र ! हम क्या बतांदा कि हम सुख्यर लोग दुख्यर दिखणो नि गौंवां अपितु दुख्यर सुख्यरुं हाल चाल पुछणो ऐ छौ।

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24/11 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India

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Nov
23

स्वर्ग लोक का गेट /स्वागत द्वार और भीष्म कुकरेती के शीर्षक

स्वर्ग लोक का गेट /स्वागत द्वार और भीष्म कुकरेती के शीर्षक
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सिपड़ी चींटी – भीष्म कुकरेती
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एक भग्यान तपस्वी मरणोपरांत उस लोक में गए। उन्हें कुछ दिन नरक भोगना था व कुछ दिन स्वर्ग भोगना था।
चित्र गुप्त सचिव – तपस्वी जी आपको नरक भी भोगना है और स्वर्ग लोक भी। अब आप बताईये पहले कौन सा लोग जाना पसंद कीजियेगा ?
तपस्वी – मुझे पहले जांचना पड़ेगा कि कौन सा लोक कैसे है।
सचिव – जी आपको मैं किसी भी लोक में अंदर तो नहीं ले जा सकता किन्तु दोनों के बाह्य स्वागत कोष्ठ या स्वागत स्थल दिखा सकता हूँ।
सचिव तपस्वी को सर्व प्रथम नरक के स्वागत द्वार पर ले गया।
नरक का स्वागत स्थल सुनसान बीरान पड़ा था। कॉंग्रेस, भाजपा व अन्य पार्टियों जैसे ही नरक के ाभ व नरक में मिलने वाली सुविधाओं व आश्वासन व फेसबुक में राजनीतिज्ञों के प्रेरणात्मक जैसे नीरस लेखों से होर्डिंग भरे पड़े थे। नरक का स्वागत स्थल नीरस था।
तपस्वी को नरक का नीरसपन जंचा नहीं।
सचिव तपस्वी को स्वर्ग के स्वागत स्थल की और ले गया। स्थल आने से पहले ही तपस्वी की नाक में नाना प्रकार के सुंगंधित इत्र व भुने मुर्गों के मसालों की लालसायुक्त सुगंध घुस गई। कुछ दूर से ही तपस्वी को स्वर्ग लोक के होर्डिंग में पोर्नो फिल्म के पोस्टर दिखने लगे , तपस्वी श्रृंगार रस में बगैर नहाये ही नहा लिए। कहीं पर नौरसी अप्सराएं नृत्य कर रहीं थीं , कहीं पर आशाराम, राम रहीम सरीखों के प्रेम नाटक चल रहे थे। बड़े सुंदर आखेटक नाट्य नृतिका चल रहे थे। कुछ लोग बड़े सुखदायी अवस्था में सो रहे थे। सब जगह श्रृंगार, स्मित हास्य व सुख की बयार बह रही थी।
जैसे कि आशा थी तपस्वी को स्वर्ग भा गया।
तपस्वी ने स्वर्ग लोक जाने की इच्छा जाहिर की।
सचिव – यह आपका अंतिम निर्णय है ना ?
तपस्वी – इसमें पुनः निर्णय की बात ही नहीं है। रसयुक्त स्वर्ग का रस्वादन ही उपयुक्त है।
सचिव तपस्वी को स्वर्ग के आंतरिक प्रकोष्ठ में ले गया।
तपस्वी बेहोस हो गए।
कुछ समय पश्चात तपस्वी को होश आया।
स्वर्ग में हर स्थल पर मनुष्य व मनुष्यता पर गहन चिंतन हो रहा था। चिंतन तार्किक ढंग से हो रहा था। कहीं रणनीति पर व्याख्यान -विमर्श हो रहा था। , कहीं कृषि पर विमर्श चल रहा था , कहीं बौद्धिक विकास पर चिंता जताई जा रही थी। पूरे स्वर्गलोक में मनुष्य हित की बात हो रही थी। पूरा वातवरण चिंता व विमर्श युक्त था।
तपस्वी ने सचिव से पूछा – यह कहाँ ले आये मुझे ?
सचिव -स्वर्ग लोक ।
तपस्वी -इतना चिंतित , इतना गंभीर , इतना विमर्श युक्त स्वर्गलोक ?
सचिव – जी हाँ यही तो स्वर्गलोक का असली कर्तव्य है
तपस्वी – यहां तो स्वागत द्वार के बिलकुल विपरीत स्थिति है
सचिव – जी हाँ। स्वागत कक्ष वास्तव में स्वर्ग का विज्ञापन और पब्लिक रिलेसन विभाग संभालते हैं तो …
तपस्वी – स्वर्ग का स्वागत कक्ष तो भीष्म कुकरेती के लेख शीर्षकों जैसे है। सभी सेल्स या मार्केटिंग वाले एक जैसे ही होते हैं चाहे स्वर्ग में हों या पृथ्वी पर – सभी विज्ञापन कर्मी शीर्षक को आकर्षक बना कर ही परोसते हैं ।

Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India
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Nov
22

पुस्तक को कितनी बार और हर बार किस रूप में पढ़ना चाहिये

Preparation for IAS Exam, UPSC exams
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पुस्तक को कितनी बार और हर बार किस रूप में पढ़ना चाहिये

( गढवाल भ्रातृ मंडल (स्थापना -1928 ) , मुंबई की मुहिम –हर उत्तराखंडी IAS बन सकता है )

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IAS/IRS/IFS कैसे बन सकते हैं श्रृंखला -36

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गढ़वाल भ्रातृ मण्डल हेतु प्रस्तुति – भीष्म कुकरेती

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पहली बार किस तरह पढ़ना चाहिए
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हर बार तनाव रहित होकर ही पुस्तक पढ़ना चाहिए
कोई भी किताब हो परीक्षार्थी को पहली बार ऐसा पढ़ना चाहिए जैसे कोई उपन्यास या जीवनी पढ़ी जा रही हो।
प्रथम बार यह ना सोचा जाय कि पुस्तक परीक्षा हेतु पढ़ी जा रही है।
पढ़ते परीक्षा आदि की कोई चिंता नहीं करनी चाहिए कि परीक्षा दृष्टि से यह टॉपिक महत्वपूर्ण है कि नहीं
पढ़ने की गति सामन्य याने ना तो मंद गति ना ही तीब्र गति से पढ़ा जाय। धीमी गति से ऊब पैदा होती है और तेज गति से कुछ भी समझ में नहीं आता है। जिस तरह आप सामन्य गति से पढ़ते हैं उसी गति से पढ़ें।
पढ़ते वक्त यदि पाठ समझ में नहीं आ रहा है तो पहली बार पुस्तक विषय से सामन्य परिचय हो जाय।

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शेष IAS/IPS/IFS/IRS कैसे बन सकते हैं श्रृंखला – 35 में…..
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कृपया इस लेख व ”

हर उत्तराखंडी IAS बन सकता है”
आशय को 7 लोगों तक पँहुचाइये प्लीज !
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Sitting on other exams ,
Should IAS Aspirant take other employment while preparing for exams?, Balancing with College Study ,
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