उत्तराखण्ड में नेताओं की चिल्लपों का शौर अब थम गया है, 6-मार्च को चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य में संसाधनों की लूट-खसोट किये जाने की नयी पंचवर्षीय योजना शुरू हो जायेगी, लेकिन इस लुट खसोट में कोषागार से जो धन निकलेगा वह होगा आम आदमी की जेब का. यह सब तब होता जब हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है, अब बात हो कुछ लोक अधिकारों की, लोकसेवकों के हिसाब-किताब की, उनके कर्तव्यों की और जनता के नौकर होने की ।
यह सही है कि हम में से बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि लोक सेवको के आम जनता प्रति क्या कर्तव्य है या जनता का लोकसेवको पर अधिकार क्या है ? राज्य का प्रत्येक लोक सेवक जन सेवक है और वह जनता के प्रति जवाबदेह है, चाहे वह भारत का राष्ट्रपति हो, प्रधानमंत्री हो, मुख्यमंत्री हो, मुख्य सचिव हो, पुलिस प्रशासन हो या जिलाधिकारी हो या किसी विभाग का सबसे निचले पायदान का कर्मचारी, ये सभी जनसेवक हैं जो हमारे द्वारा चुकाए गये टैक्स से अपना वेतन पातें हैं । हम लोग आज तक इस बात को समझ नहीं पायें है, और जिस दिन इस प्रकार की जागरूकता आ जायेगी तो वह दिन भी दूर नहीं कि उत्तराखण्ड क्या भारत में भी भ्रष्टाचार का कोई नाम लेवा भी नहीं होगा साथ ही जनता राजनैतिक रूप से परिपक्व भी । यदि हम स्वयं इस विषय पर जागरूक होंगे तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ी को सम्मान के साथ जीना सीखा पायेंगे ।
आम जनता का यह अधिकार कि वह कुछ सार्वजनिक सेवाओ को तय समयावधि में पाने का हक रखती है ‘सेवा का अधिकार‘ कहलाता है । इसके तहत तय समयसीमा में काम का निबटारा करना सम्बंधित अधिकारियों की बाध्यता होती है । समयसीमा के अंदर सेवा नहीं उपलब्ध करानेवाले अधिकारियों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है, इस सेवा के अधिकार का मुख्य उद्देश्य सेवा के लिए लम्बे इंतजार से लोगों को राहत दिलाना है ।
सेवा का अधिकार कानून को वर्तमान में भ्रष्टाचार के खिलाफ देशभर में चल रही अन्ना की मुहिम के परिप्रेक्ष्य में भी देखा जाना चाहिए है । हमारे उत्तराखण्ड राज्य में भारत के उन चंद राज्यों में से एक है जहाँ 4 अक्टूबर 2011 से यह प्रभावी हो गया है ।
एक ओर जहां देश में भ्रष्टाचार मिटाने के लिए आंदोलन और चर्चा का दौर जारी है, हम आप जब तक इस क़ानून से परिचित नहीं होंगे तब तक भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता । एक अनुमान के मुताबिक इन सेवाओं के सही ढंग से लागू होने के बाद राज्य में प्रतिवर्ष 200 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी पर लगाम लगेगा । इस क़ानून से ऐसे मध्यम दर्जे के लोगों को काफी लाभ मिल सकता है, जो अब तक अपने काम को पूरा करवाने के लिए एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस के चक्कर लगाते रह जाते हैं और अंततः उन्हें थकहार अपना काम करवाने के लिए रिश्वत या सिफारिस रूपी अवैध हथियार का मजबूरी इस्तेमाल करना पड़ता हैं । इस क़ानून से आप हम सभी किसी भी कार्य हेतु सरकारी कार्यालय के महीनों चक्कर लगाने की परेशानी से बच सकते हैं । इसके तहत विभिन्न कार्यो व सेवाओं के लिए एक तिथि निर्धारित की गई है। जिसके तहत प्रदेश वासियों को उनकी संबंधित सेवा प्रदान की जाएगी। सूचना के अधिकार कानून के साथ सेवा का अधिकार कानून को जोड़ दिए जाने से लोकतंत्र और अधिक मजबूत बनेगा ।
आम जनता के लिए सीधे तौर पर मुफीद इस कानून के लागू होने से वर्तमान में खाद्य तथा नागरिक आपूर्ति, राजस्व, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, आवास, परिवहन, पेयजल, समाज कल्याण, शहरी विकास, विद्यालय शिक्षा तथा गृह विभाग जैसे कुल 10 विभागों में सेवा का अधिकार अधिनियम लागू कर दिया गया है जिससे विभिन्न प्रकार की लगभग 65 महत्वपूर्ण सरकारी सेवायें इसके दायरे में आ गयी है, सरकारी विभाग को एक तय समय सीमा के भीतर आवेदक का कार्य करके देना होगा, यदि आवेदक का आवेदन पत्र ख़ारिज किया जाता है तो उसके आवेदन पत्र को खारिज किये जाना का कारण भी बताना होगा । सेवा का अधिकार कानून से तात्पर्य ऐसी आवश्यक सेवाओं से है जिनसे हम आप और आम आदमी का रोजाना साबका पड़ता है । जैसे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाणपत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, ड्राईविंग लाईसेंस, विकलांग व विधवा पेंशन के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज, निवास प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र,खसरा-खतौनी, किसान-बही,पेयजल कनेक्शन,दैवीय आपदा सहायता राशि आदि ।
ये सभी सेवाएं ऐसी हैं जो आवश्यक तो हैं मगर आम आदमी को इनको हासिल करने के लिए लोहे के चने चबाने पड़ जाते है । शायद ही इन सेवाओं में से कोई ऐसी न हों , जिसके लिए जनता को बगैर सुविधा शुल्क दिये इनका लाभ मिल सके । सेवा का अधिकार कानून में यह प्रावधान हैं कि इसके दायरे में आने वाली सेवाओं को आवेदक को उपलब्ध कराने के लिए एक निश्चित समयावधि तय कर दी गयी है और संबंधित विभाग के अधिकारी को विधी द्वारा निरधारित की गयी समयावधि के भीतर आवेदक को वह सेवा उपलब्ध करानी होगी । ऐसा न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई एवं आर्थिक दण्ड का प्रावधान भी किया गया हैं ।
आज अगर सरकारें इस प्रकार के कानून बनाने को बाध्य हो पायी है तो इसकी मुख्य वजह है आम जनता का, आप-हम सभी का जागरूक होना, और इस प्रकार से जनता को जागरूक करने में माननीय अन्ना जी के आंदोलनों का, और अन्य कई सामाजिक सगठनों का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है, जिसे आप हम सब लोगो ने मिलकर सफल बनाया, लेकिन इन सबके बावजूद भी लोग अभी पूरी तरह से जागरूक नहीं हुए हैं, लोगो को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने में आन्दोलनों के अगुवा रहे अन्ना जी व अन्य सामाजिक आंदोलनों को निरंतर, गाँव-गाँव, शहर-शहर, राज्य में और पुरे देश में जारी रखने में आप-सबका सहयोग अपेक्षित है, क्योंकि अधिकारों की लड़ाई के इस काले दौर में ये सामाजिक आन्दोलन ही आस के, विश्वास के और सुनहरे भविष्य के ख्वाब को ज़िंदा रखने वाले एकमात्र दीपक हैं । यदि सत्ता के षड्यंत्र ने इस दीये को बुझाने में सफलता पा ली तो कम से कम आने वाले दो-तीन दशक तक फिर ऐसे आंदोलन उठने वाले नहीं । यदि हम चाहते हैं कि आने वाली नस्लें अपने भारतीय होने पर गर्व कर सकें और सही अर्थों में यह देश खुशहाल, समृद्ध और भ्रष्टाचार मुक्त बने तो हमें बदहाली की इस आंधी में अन्ना रूपी शमा को जलाए रखने की सख्त जरूरत है । शहरयार के शब्दों में……
आँधी की जद में शम्मा ए तमन्ना जलाई जाये,
जिस तरह भी हो लाज जुनूं की बचाई जाये !
जानें कौन-कौन सी सेवायें है सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में …….हिंदी में……… http://uk.gov.in/files/Documents/notificationHin-rts.pdf
जानें क्या कहता है शासनादेश…… सेवा का अधिकार अधिनियम के बारे में ….हिंदी में …… http://uk.gov.in/files/Documents/guidelines-rts.pdf
जानें क्या है सेवा का अधिकार अधिनियम……. हिंदी में …….. http://uk.gov.in/files/pdf/Right_to_Service_Act,_2011_in_Hindi.PDF









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