Dec
09

हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में सरसावा नरेश चंद्र की हार


हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास  संदर्भ में   सरसावा नरेश चंद्र की हार    

 हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में उत्तर भारत में मुस्लिम  क्रूरता व मुस्लिम आतंकवादियों का अधिकार  भाग   -६
Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History with reference, the start Muslim Cruelty, Muslim  Terrorism in North India  -6  
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  383  

                           
हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग - ३८३            


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती -

लूट की सामग्री लेकर क्रूर , जन हत्त्यारा ,मुस्लिम  आतंकवादी महमूद अपनी सेना लेकरमुस्लिम आतंकी   महमूद मथुरा -थानेश्वर रास्ते पर बढ़ा।  सरसावा का बियर , जन हितैषी  हिन्दू नरेश राजा चंन्द्र  मुस्लिम आतंकवादी महमूद से भिड़ने तैयार था।  किन्तु शाही राजकुमार भीमपाल के परामर्श पर सरसावा नरेश हिमालय के किसी ऊँचे स्थान पर पंहुच गया।  यह स्थान के रस्ते झाड़ियों से युक्त थे।  डा डबराल ने इलियट व डाउसन का संदर्भ देते बताया कि निर्दयी , क्रूर , प्रजा हत्त्यारा महमूद ने ६ जनवरी १०१९ की अर्ध रात्रि में राजा चंद्र के शिविर में धावा बोलै जिसमे  राजा की सेना को मार दिया गया।  सैनकों व जनता के आभूषणों को निकला गया।  ३० लाख दीराम के आभूषणों के अतिरिक्त ७५ लाख न्र नारी बंदी बनाये गए वे बेचे गए।  (१ )
हरिद्वार , सहारनपुर की जनता ने अति क्रूरतम समय भोगा।
संदर्भ :
 १ – शिव प्रसाद डबराल ‘चारण ‘ ,  उत्तराखंड का इतिहास भाग ३ वीरगाथा प्रेस दुगड्डा , उत्तराखंड , पृष्ठ   ४८६ 
Copyright @ Bhishma  Kukreti 
उत्तरी भारत पर आतंकवादी मुस्लिम, लोक हत्त्यारे मुस्लिम  आक्रांताओं के आक्रमण व अधिकार समय उत्तराखंड ;

Dec
09

केवल अर  केवल छै रस 



केवल अर  केवल छै रस 

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  
 खंड – १  सूत्रस्थानम , 26  th,  छब्बीसवां  अध्याय   (  काप्यीय  अध्याय   )   पद  ९  
  अनुवाद भाग -  २०४ 
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती 
-
      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 
यां  पर पुनर्वसु भगवान आत्रेयन बोलि - रस छै इ हूंदन। यथा – मधुर , अम्ल , लवण , कटु , तिक्त , अर कसाय। यूं छै रसों उतपति स्थान पाणि इ च।  छेदन अर उप शमन यि द्वी कर्म छन।  यूं दुयूं मिलण से साधारण ह्वे जांदन।  स्वादु अर अस्वादु रूचि छन।  हित अर अहित  प्रभाव छन।  पंच महाभूत विकार छन।  यी रसक  आश्रय  स्थान छन अर यि रस नि छन।  गुरु,  लघु , शीत , उष्ण , स्निग्ध , रुक्ष द्रव्यों म आश्रित गुण छन जु प्रकृति (स्वभाव से इ मूंग मधुर तो लघु  ) विकृति (चौंळुं से बणयु खील अर सत्तू बड़ा भारी छन ) विचार (द्रव्यान्तरमेल जनकि मधु अर घीक मेल विष बण जांद  ) , देस (द्वी प्रकारौ जन भूमि व रोगी ), भूमि जनकि श्वेतकपोती विषहरी हूंद तो हिमाला की औषधि बिंडी गुण वळ हूंदन , शरीर देस जन टांगक मांश कंधा मांश से गुरु हूंद , अर समय यूंको भेद से उपजद ।  क्षार। खार रस नी च।  किलैकि क्षरण हूण से भौत सा पदार्थों से उतपन्न हूणो कारण अनेक रस हूण से , कटुक ,लवण आदि रसुं अनुभव हूण से क्षार म स्पर्श अर गंद हूण से यु द्रव्य च, रस नी अर अन्य कारणम भष्म आदि से निर्मित हूण से रस नी  ।  अव्यक्त बि रस नी किलैकि अव्यक्ता त कारणम इ च।  यांक अलावा अनुरसम अव्यक्तिभाव हूंद।  रस क पैथर जो रस हूंद वू अनुरस च।  जनकि -रुक्ष कसायानुरसो मधुर:कफपित्तहा।  यथा अनुरस म अव्यक्ता हूंद।  अर जु बुले गे बल रसों क आश्रय बिंडी हूण से रस असंख्य छन वक्तव्य ठीक नी।  किलैकि एक एक रस यूं आश्रय रुपी भावों मंगन कै एक भाव का आश्रय लेकि विशेष रुप से रौंद।  (जनकि मूंग , चौंळ , दूध , घी म मधुर रस आश्रय अलग अलग हूण पर बि मधुर रस  इकजनि   च। जनकि दूध बगुला , कपास म आश्रय अलग अलग हूण पर बि रंग सफेद इकजनि च।  आश्रय असंख्य छन किन्तु रस छै से भिन्न हूण असंभव च।  अर बुले जावो कि भिन्न भिन्न रसुं मिलण से रस असंख्य छन भी सही वक्तव्य नी च।  किलैकि दगड़म मिलण पर बि यूंक गुरु , लघु , आदि गुण या मधुर आदि स्वभाव असंख्य ह्वे जांदन।  किन्तु इखम बि मधुर आदिक प्रकृति ही त मिल्दन।  अर्थात रस मिलण से रस असंख्य नि ह्वे जांदन।  इलै मिल्यां रसुं करमुं उपदेश बुद्धिमान नि करदन।  इलै प्रत्येक रस का लक्षण अलग अलग हि बुले जाल।
 -
*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ  १९३ – २९४
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम 
चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद , हिमालयी लेखक द्वारा चरक संहिता अनुवाद , जसपुर (द्वारीखाल ) वाले का चरक संहिता अनुवाद , आधुनिक गढ़वाली गद्य उदाहरण, गढ़वाली में अनुदित साहित्य लक्षण व चरित्र उदाहरण   , गढ़वाली गद्य का चरित्र , लक्षण , गढ़वाली गद्य में हिंदी , उर्दू , विदेशी शब्द

Dec
08

रसों का प्रकार पर चर्चा – १


रसों का प्रकार पर चर्चा – १ 
 
चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद  
 खंड – १  सूत्रस्थानम , 26  th,  छब्बीसवां  अध्याय   (  भद्र काप्यीय  अध्याय   )   १ पद   बिटेन ८   तक 
  अनुवाद भाग -  २०३ 
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती 
-
      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!! 
अब भद्र काप्यीय अध्याय कु व्याख्यान करला जन कि भगवन आत्रेय बोलि छौ।  १-२।
आत्रेय , भद्र काप्यीय , शाकुन्तलेय, पूर्वाक्ष , मौदगल्य, हिरण्याक्ष, कौशिक , भरद्वाज , कुमारशिर, वार्योविद , वैदेह महाराज , निमि , महाराज वडिश , श्रेष्ठ ब्रह्विक , कंकायन क वववृद्ध अर जितेन्द्रिय महर्षि चैत्र रथ नामौ सुंदर वन म विहार करणा छा।  तब उख रस द्वारा आहार का निर्णय करण पर चर्चा ह्वे।  ३ -७।
 भद्र काप्यन बोलि – रस एकि च जैतै पाँचों इन्द्रियों का विषयों मदे एक जीबक विषय बुल्दां , यु रस जल से अभिन्न च अर एकि च ।
शाकुंतलेय ब्राह्मणन बोलि - रस द्वी छन एक छेदनीय अर दुसर उपशमनीय।
पूर्वाक्ष मौदगल्य ऋषिन बोलि – रस तीन छन यथा -छेदनीय , उपशमनीय अर अर्थात साधारण।
हिरण्याक्ष कौशिकन बोलि -रस चार छन।  स्वादु  (प्रिय ) हितकारी , स्वादु अहितकारी , अस्वादु हित अर अस्वादु अहित।
कुमारशिरा भरद्वाजन बोलि – रस पांच हूंदन।  पृथ्वीका , पाणीका , तेजका , वायुका , आकाशका।
राजर्षि वारयोविदन बोलि – रस छै हूंदन।  गुरु , लघु , शीत , उष्ण , स्निग्ध अर रुक्ष।
वदेह निमिन बोलि – रस सात छन -मधुर , अम्ल , लवण , तिक्त , कटु , कसाव अर क्षार।
धाभार्गव बडिन बोलि – रस आठ छन – मधुर , अम्ल , लवण , तिक्त , कटु , कसाव,  क्षार अर अव्यक्त।
कंकायनन बोलि – गुण , कर्म संस्वाद भेदों से रस अगणित ह्वे जांदन।  ८।
 -
*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ   २९२  -२९३
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम 
चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद , हिमालयी लेखक द्वारा चरक संहिता अनुवाद , जसपुर (द्वारीखाल ) वाले का चरक संहिता अनुवाद , आधुनिक गढ़वाली गद्य उदाहरण, गढ़वाली में अनुदित साहित्य लक्षण व चरित्र उदाहरण   , गढ़वाली गद्य का चरित्र , लक्षण , गढ़वाली गद्य में हिंदी , उर्दू , विदेशी शब्द

Dec
08

रोमानिया बिटेन चुटकला , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा

रोमानिया   बिटेन  चुटकला   ,  हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा 
-
 रोमानिया     देस का चबोड़ , चखन्यौ , मजाक , हौंस 
Humour from    Romania 
-
 (यूरोपीय हास्य , प्रहसन, खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा  श्रृंखला )
-
इकबटोळ – भीष्म कुकरेती चबोड़ाचार्य’  
-
 एक जर्मन , एक जिप्सी अर एक रोमाइनयायी हवाइ जाज से यात्रा करणा  छा।
अचाण्चक जर्मन उठ अर वैन एक चांदी चमच भैर चुलै दे।
पुछण पर वैन बथाइ -  या मेरी जन्म भूमि च  अर हमम यु भौत च।
थोड़ा देरम जिप्सीन  सोना क चमच भैर चुलै दे।  पुछण पर जिप्सिक जबाब छौ -
या मेरी जन्म भूमि च ।  अर हमर इख यी भौत छन।
इना जिप्सीन जबाब दे  उना रमैनियाईन जिप्सी भैर चुलै दे अर बुलण लग -
या  मेरी जन्म भूमि च अर हमम यी भौत छन।
XX
 एक नरभक्षक अर वैक नौनु नदी छाल पर जाणा छा कि दुयुंन एक युवती तै नयांद देखि।
नॉन चिल्लाई – बाबा ! बाबा ! भौत बढ़िया भोजन।  चलो मार दींदा। आज सुंदर मांश मीलल।
बुबान समजायी – न  ना ब्यटा ! तैं तैं  ड्यार लिजौंदा अर आज तेरी मा ही हमर भोजन होली।
XX
एक दादा जी कथा सुणाना छा कम्युनिस्ट शासन म  सेक्युरिटी हृदय जन छा।
सी हर समय बीटिंग अर बीटिंग ही करदा छा।
XX
एक पुलिस अधिकार रोमैनयायी गाँव म गे अर वैन पूछ – इख दारु कख कख छणे जांद ?
उत्तर – सि समिण पर एक भवन दिखणा छा , भवन हां।  स्यु चर्च च।  तख छोड़ि सब घरों म।
XX
अलग अलग राष्ट्र का लोग एक मयखानाम गेन अर  बियर कु ऑडर दे।  हरेक क गिलासुंद मक्खी छे पड़ीं।
स्वीडननीन वै इ गिलासम नयी बियर मांग।
ब्रिटिशन नया गिलासुंद नयी बियर मंगाई।
फिनलैंड वळन मक्खी भैर चलै अर बियर पे गे।
रूस वळ स्यूं मक्खी बियर पे गे।
चीनीन मक्खी खायी अर बियर उनी रण दे।
यहूदीन मक्खी भैर  गाड अर मक्खी चीनी तैं बेच दे।
 रोमानिया वळन तीन चौथाई बियर पे अर  होटल वळ  तै मक्खी दिखाई अर हैंक मुफ्त बियर   गिलास मंगाई।
Copyright  2021
   रोमानिया   बिटेन   चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा   
यूरोप के चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , यूरोप से जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा  यूरोपीय     श्रृंखला निरंतर चलती रहेगी।  

Dec
06

सर्बिया बिटेन चुटकला , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा

सर्बिया  बिटेन  चुटकला   ,  हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा 
-
     देस का चबोड़ , चखन्यौ , मजाक , हौंस 
Humour from    Serbia 
-
 (यूरोपीय हास्य , प्रहसन, खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा  श्रृंखला )
-
इकबटोळ - भीष्म कुकरेती चबोड़ाचार्य’  शक्ति 
-
एक पुण्यात्मा बीमार पोड़ अर मरणों  कुण  तीन इ मैना छा बच्यां। भगवानन सोचि बिचारो ये जमन म बि पुण्यात्मा च तो खोज खबर लिए जाव।
भगवान पुण्यात्मा म पोँछ अर बुलण लगिन – भल मनिख ! तू पुण्यात्मा छे ! मांग तीन  बरदान  मांग मि द्योलु।
पुण्यात्मान कुछ क्षण घड्याइ अर मांगी – थाळी भोरी कछबोळी अर स्कॉच व्हिस्की मिल जावो तो भौतिक जीवन तर जावो।
भगवानन तुरंत इच्छा पूर कर दे। कछबोळी खांद खांद अर पींद पींद पुण्यात्मान सोची कि क्या मंगण।
पुण्यात्मान बोलि – भगवन म्यार परिवार तै सुखि -शान्ति रखिन।
भगवानन बोलि – चिंता नि कौर।  त्यार परिवार सदा सुखमय जिंदगी बिताल। अब तिसर बरदान मांग।
“प्रभु जिंदगी भर जाणै बड़ी इच्छा छे किंतु मि  तै हवाइ जाज अर पाणि जाज से डौर लगद।  त अमेरिका तक सड़क बणाइ द्यावो जां से मि अमेरिका जै सकुं।” पुण्यात्मान तिसर बरदान मांग।
भगवान न आँख बंद करिन , स्वाच अर ब्वाल – पुण्यात्मा ! ये प्रोजेक्ट तै पूर हूंद हूंद कई वर्ष क्या युग लगजाल।   . तू दुसर बरदान मांग।  “
पण्यात्मान सोचि अर बोलि - प्रभो ! मीन चार दैं ब्यौ कार अर चर्री दैं तलाक ह्वे। . मि तै तुम इन तागत द्यावो कि मि महिलाओं तर्क शक्ति अर विचार करणै शक्ति समज सकूं।
भगवान न कुछ देर तक स्वाच अर ब्वाल - ठीक च अमेरिका कुण सड़क कति  लेन की चएंदी ? द्वी लेन या फॉर लेन ?
XX
एक यहूदी न्यूआर्क म टैक्सी वळ से मोल भाव करणु छायी।
यहूदी – वाशिंगटन तक कथगा ह्वालु ?
टैक्सी ड्राइवर – 500 डॉलर।
यहूदी – मुफ्त म नि ह्वे सकद क्या ?
ड्राइवरन सोचि अर बोलि – ठीक च पर यात्राम तुम तै एक बि शब्द नि बुलण निथर किराया १००० डॉलर होलु।
तो अब टैक्सी न्यूआर्क से वाशिंगटन जाण लग गे।  ड्रावर इन चालणु कि हर समय टैक्सीम  झकळा -झकोळ हूणु छौ अर मोड़ पर तो टैक्सी १५० की स्पीड पर ही चलणी राई।
वाशिंगटन आयी।  ड्राइवर बड़ो आश्चर्य म छायो।  ड्राइवरन यहूदी पूछ – आपन कमाल कर दे।  सरा यात्रा म तुम चुप रावो।  साब इन बथावदी यीं यात्राम सबसे कठिण क्षण को छौ तुमकुण ?
यहूदीक जबाब छौ – जब वै मोड़ पर म्यार बच्चा टैक्सी से भैर गिर।
XX
एक सर्बियाई राजनीतिज्ञ मैक्सिको यात्रापर गे।  राष्ट्रपतिन अपण  व्यक्तिगत भवन पर बुलाई।  भवन बड़ो  व आलिशान छौ।
सर्बियाई नेतान पूछि – इथगा बड़ो व आलिशान भवन कनै बणाइ तुमन ?
राष्ट्रपति क जबाब छौ – सि थोड़ा दूर एक पुळ दिखणा छा ? पुळ की चौड़ाई पांच मीटर हूण चयेणि छे मीन साढ़े चार मीटर चौड़ इ बणवाई पर कागजुंम पांच मीटर इ च पुळ चौड़ाई।
सर्बियाई राजनेता खुश छौ।
कुछ समय बार सर्बियाई नेता सर्बिया क राष्ट्रपति बण गे अर  मैक्सिको राष्ट्रपति तै सर्बिया आणो न्यूत दिये गे।  मैक्सिकी राष्ट्रपति ऐन।  मैक्सिको क राष्ट्रपति तै सर्बियाई राष्ट्रपतिन अपण आलिशान व्यक्तिगत भवन म ठहराई।
मैक्सिकन राष्ट्रपतिन पूछ – तुमन इथगा बड़ो आलिशान भवन कनै बणाइ ?
सर्बियाई राष्ट्रपतिन समिण अंगुळ करी दिखाई अर ब्वाल – स्यु समिण पुळ दिखणा छा बड़ो पुळ जैक चौड़ाई दस मीटर च   …..
मैक्सिकन राष्ट्रपतिन उत्तर दे – पुळ ? दस मीटर चौड़ पुळ ? कखम च पुळ ?  कखम   ….
XX
Copyright  2021
  सर्बिया    बिटेन   चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा   
यूरोप के चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा  यूरोपीय     श्रृंखला निरंतर चलती रहेगी।  

Older posts «

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.