मेहनत तो बहुत से लोग करते हैं लेकिन सफलता सभी को नहीं मिलती है|कुछ की आशाओं को पंख मिलते हैं और कुछ के सपने ख़ाक हो जाते हैं…
बेडुपाको.कॉम शुरू करने से पहले हमारे मन में कई शंकाएं थी.. क्या ये प्रयास सफल होगा? क्या लोग इस से जुड़ेंगे ? क्या हम अपनी भावनाओं को दूसरों तक पहुंचा पाएंगे? क्या लोग इसका महत्व समझेंगे? और भी जाने क्या क्या …पर मन में एक लगन भी थी , एक इच्छा भी थी अपनी देवभूमि के संगीत को लुप्त होने से बचाने की… जो नए ज़माने के हिप-हॉप, जैज़ और अंग्रेजी गानों के बीच कहीं खो-सा गया है| इसे फिरसे इसकी वही पहचान दिलाने की जो श्री गोपाल बाबु गोस्वामी , श्री नरेन्द्र सिंह नेगी, श्री हीरा सिंह राणा आदि गीतकारों और संगीतकारों ने बनायी थी और जिसे श्री प्रीतम भर्त्वान, श्रीमती मीना राणा, आदि आगे ले जा रहे हैं|
हमारा सौभाग्य है की हमारी इस यात्रा में कई लोग हमसे जुडे और हमारे साथ हो लिए| कुछ ने हमारे प्रयास को सराहा, कुछ ने आलोचना की और कुछ इसमें भी हमारा कोई छुपा हुआ मकसद तलाशने में जुट गए| बेडुपाको.कॉम से हमारा लक्ष्य केवल इतना-सा है कि पहाड़ से पलायन के इस दौर में जहां पहाड़ी बोलियों (कुमाऊनी, गडवाली, जौनसारी) का इस्तेमाल कम होता जा रहा है, वहीं हमारा लोक गीत-संगीत भी लुप्त न हो जाए| बेडुपाको.कॉम के जरिये हम एक माध्यम प्रदान करने कि कोशिश कर रहे हैं उन सभी इच्छुक वासी एवं प्रवासी उत्तराखंडियों को जिनके दिल में आज भी पहाड़ बसता है और जो आज भी पहाड़ से जुड़े रहना चाहते हैं|


अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को हम यूँ ही नष्ट न होने देंगे हम निरंतर कार्यरत हैं एक ऐसा मंच तैयार करने में जिसे दिखाकर हम अपनी आने वाली पीड़ियों को बता सकेंगे : ये हैं मेरे तुम्हारे पहाड़ की देन |हम अपने लक्ष्य तक अभी पहुंचे नहीं हैं पर आपके साथ से अब लगता है दिल्ली दूर नहीं…यहाँ तक आये हैं तो मंजिल भी पा ही लेंगे|
यदि आप उत्तराखंड के किसी भी विषय पर अपनी बात अपने लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं तो हमें अवश्य ईमेल करें….bedupako@gmail.com पर हमें आपकी ईमेल का इंतज़ार रहेगा|