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संसद एवं विधानसभा सदस्यों के लिए आचार संहिता……….

25 नवम्बर, 2001 को संपन्न सर्वदलीय राष्ट्रीय सम्मेलन में संसद एवं विधानसभाओं की मर्यादा बनाये रखने तथा इन सदनों में अनुशासनहीनता को रोकने के उद्देश्य से एक आचार संहिता का निर्माण किया गया है। इस आचार संहिता के प्रमुख बिन्दु निम्नवत् हैं–

  • प्रश्नकाल के दौरान सदन में शान्ति बनाये रखना।
  • सदन के बीच में आने से बचने की कोशिश की जाये।
  • यदि कोई सदस्य किसी सरकारी दस्तावेज़, काग़ज़ या रिपोर्ट के किसी गोपनीय मुद्दे पर हवाला देना चाहता हो तो उन्हें पहले इसकी सूचना अध्यक्ष को देनी चाहिए, ताकि वह इस पर उचित फ़ैसला कर सके।
  • प्रत्येक सदस्य को अपनी सम्पत्ति की घोषणा करनी चाहिए या किसी मामले से यदि वह सम्बद्ध है तो पर चर्चा से पहले उन्हें सदन को यह बताना चाहिए।
  • राष्ट्रपति या राज्यपाल के अभिभाषण के समय सदन में एकजुटता, सम्मान और मर्यादा का परिचय दें।
  • यदि किसी का व्यक्तिगत हित सार्वजनिक हित के आड़े आता है तो उसे सार्वजनिक हित को तरजीह देनी चाहिए।
  • सदस्यों को अपने कर्तव्यों का सदैव ध्यान रखना चाहिए।
  • कोई सदस्य जब किसी मसले पर बोल रहा हो तो अन्य सदस्यों को शोर-शराबा करके उसकी बात में व्यवधान पैदा नहीं करना चाहिए। किसी सदस्य के बोलने के समय टोकाटाकी करने से अन्य सदस्यों को बचने का प्रयास करना चाहिए।
  • सदन में किसी तरह की नारेबाज़ी नहीं की जानी चाहिए।
  • विरोध व्यक्त करने के लिए सदन में कोई दस्तावेज़ फाड़ा नहीं जाना चाहिए।
  • संसद विधानमण्डलों अथवा केन्द्रशासित प्रदेशों की विधान सभाओं के भीतर या उसके परिसर में कहीं पर भी सत्याग्रह अथवा धरने पर नहीं बैठना चाहिए।
  • सदनों में सेल्यूलर फ़ोन अथवा पेजर लेकर नहीं जाना चाहिए।
  • बिना स्पीकर को नोटिस दिये किसी के ख़िलाफ़ किसी तरह का आरोप अथवा उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाली कोई बात नहीं कही जानी चाहिए।
  • चर्चा के दौरान ऐसे किसी मामले अथवा तथ्य ज़िक़्र नहीं करना चाहिए, जो कि न्यायालय में लम्बित हो।
  • पीठ की बिना पूर्व अनुमति के सदस्यों को सदन में कोई बयान नहीं पढ़ना चाहिए।
  • स्पीकर की व्यसस्था पर न तो कोई सवाल उठाया जाना चाहिए और न ही किसी तरह की टिप्पणी की जानी चाहिए।
  • अध्यक्ष द्वारा अनुमति दिये जाने के पूर्व सदस्यों को किसी मसले पर नहीं बोलना चाहिए।
  • सदन की किसी भी समिति के साक्ष्यों को किसी सदस्य अथवा अन्य व्यक्ति द्वारा तब तक नहीं छापा जाना चाहिए, जब तक वे सदन में पेश न कर दिये गये हों।
  • सदन की समितियों को किसी मामले के तथ्यों को जानने के लिए तब तक यात्रा पर नहीं जाना चाहिए, जब तक कि वह बेहद ज़रूरी न हो।
  • स्थानीय अधिकारियों से चर्चा से पूर्व तो ऐसे टूर कतई नहीं आयोजित किए जाएँ।
  • किसी संगठन से सम्बद्ध सदस्य उसके लिए सरकार के साथ किसी तरह का व्यापार न करें।
  • सदस्य को उपलब्ध कराए गए सरकारी आवास को यह किराये आदि पर न देकर उससे किसी तरह का आर्थिक लाभ वर्जित न करें।
  • ऐसे किसी मामले में जिसमें सदस्य के हित परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हों किसी सरकारी अधिकारी अथवा मंत्री पर दबाव डालने का प्रयास न किया जाए।
  • सदस्यों को अपने किसी रिश्तेदार, परिचित की नौकरी या व्यापारिक सुविधा के लिए किसी सरकारी अधिकारी को पत्र नहीं लिखना चाहिए तथा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में रुचि नहीं लेनी चाहिए।
  • सदन में किसी प्रकार का बैज लगाकर न जाएँ।
  • किसी भी तरह का हथियार लेकर सदन में न जाएँ।
  • सदन में कोई झण्डा, निशान या इसी तरह की अन्य वस्तु का प्रदर्शन न करें।
  • ऐसा कोई लिटरेचर, प्रश्नावली, परचा प्रेस विज्ञप्ति संसद या विधानमंण्डल के परिसर में वितरित नहीं करें, जिसका सदन के कामकाज़ से मतलब न हो। इस आचार संहिता का उल्लंघन करने पर सम्बन्धित सदस्य के ख़िलाफ़ दण्डात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें उसको डाँट-फटकार, निन्दा, सदन से बाहर करना आदि सम्भव है, इसके अलावा उसका सदन से स्वत: ही निलम्बन भी सम्भव है।

( स्रोत:विभिन्न इन्टरनेट साईटस )

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