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Aug
12

स्याळ

स्याळ

कवि— हरीश जुयाल ‘कुटज’

डंडवाक् पाणी चरणा छन

माछा तीसन मोरणा छन इ

बिर्ल्यों की ह्वै गे खल्गdडी

मुसा चुल्खंदों क्वर्ना छन

दिन घुघ्त्यों का जांदा रैन

ढन्ग्र्यों गरुड़ घुरणा छन

स्यू-बाघ ह्वैगेन लुंज

स्याल्यूं का ठाठ चलणा छन

जैन हैंका की jaldi उग्तैन

आज वी औंग्रणा छन

Copyright @Harish Juyal, Pauri garhwal, uttarakhand 2010

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