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Feb
04

पँचतन्त्र मा हास्य व्यंग्य

Satire and its Characteristics, Panchtantra, व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य गुण /चरित्र
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पँचतन्त्र मा हास्य व्यंग्य
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(व्यंग्य – कला , विज्ञानौ , दर्शन का मिऴवाक : ( भाग – 22 )

भीष्म कुकरेती
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पण्डित विष्णु शर्माs रच्यूं कथा खौळ (संग्रह ) पँचतन्त्र आज भी उपयोगी च , लाभकारी च अर प्रासंगिक च। कथा चूँकि शिक्षा दीणो रचे गै थै त इखमा निखालिश व्यंग्य की गुञ्जैस कमी च।
फिर बि पँचतन्त्र मा व्यंग्यक झलक झळकां मिलदी च। दंभ , मिथ्याभिमान, लोलुपता , नारी दगड़ विश्वासघात आदि जन व्याख्यानों में कम ही सै व्यंग्य तो छैं इ च (सत्यपाल चुग , 1968 , प्रेमचन्दत्तरो उपन्यासों की शिल्पविधि ).
Leonard Feinberg न अपण ग्रन्थ ‘Asian Laughter (पेज 426 ) मा पँचतन्त्र का कथाओं मा हास्य व्यंग्य ढूंढ।Leonard Feinberg का हिसाब से संसार तै जानवरों आँख से दिखण अपण आप मा व्यंग्य च अर जानवरों चरित्र से मनिखों मनोविज्ञान व्याख्या करण बि एक तरां को व्यंग्य ही च।
पँचतन्त्र माँ सूक्ष्म हास्य या व्यंग्य च अर वो झळकां ही च (Meena Khorana , 1991 , The Indian subcontinent in literature for children and Young)
Mathew Johan Hodgart अपणी किताब Die Satire ( पृष्ठ 127 मा )लिखदन कि पँचतन्त्र या अन्य पुरणी कथाओं मा कथा उद्देश्य अपणा आप मा व्यंग्य च अर फिर जानवरों द्वारा कथा तै जीवन्त बणये जाण बि त व्यंग्य को एक रूप च।
सम्मेलन पत्रिका 19 77 माँ बि इनि बोले गे बल पँचतन्त्र मा अपरोक्ष रूप से व्यंग्य मिल्दो जखमा एक पात्र अर्जुन तरां संशय से भर्यूं रौंद अर दुसर चर्तित्र कृष्ण तरां उपदेश दीन्दो वास्तव मा यु सुकराती आइरोनी च।

पँचतन्त्र मा चरित्रों नाम गुण बि बथान्दन अर यो भि व्यंग्य को एक भाग च। यही शील गढ़वाली नाटक का शिरमौर भवानी दत्त थपलियालनन अपण द्वी नाटकों मा बि अपणाइ। नाम से हास्य व्यंग्य पैदा करण एक व्यंग्य शैली च

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4/ 2/2017 Copyright @ Bhishma Kukreti

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Jaspur Ka Kukreti

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