Category Archive: Women in Uttarakhand

Nov
01

अपण धरोहर अपण कोशिश: Aipan (उत्तराखंड की लोककला- ऐपण)

Aipan

हमारी उत्तराखंडी संस्कृति में विभिन्न प्रकार की लोक कलाएं मौजूद है। उन्ही में से एक प्रमुख कला “ऐपण” भी है। उत्तराखंड की स्थानीय चित्रकला की शैली को ऐपण के रूप में जाना जाता है। मुख्यतया ऐपण उत्तराखंड में शुभ अवसरों पर बनायीं जाने वाली रंगोली है। ऐपण कई तरह के डिजायनों से पूर्ण किया जाता …

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Aug
01

अपण धरोहर अपण कोशिश: लोकगायिका कबूतरी देवी

Kabutari Devi

उत्तराखण्ड की तीजन बाई कही जाने वाली श्रीमती कबूतरी देवी जी वह नाम है जिसने पर्वतीय लोक गीतों को उस समय पहचान दिलाई जब उसे जानने वाला कोई नहीं था।। कबूतरी देवी मूल रुप से सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ के मूनाकोट ब्लाक के क्वीतड़ गांव की निवासी हैं।  जहां तक पहुंचने के लिये आज भी अड़किनी से ६ कि०मी० पैदल चलना पड़ता है। इनका जन्म काली-कुमाऊं (चम्पावत जिले) के एक मिरासी परिवार् में हुआ था। संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा इन्होंने अपने गांव के देब राम और  देवकी देवी और अपने पिता  श्री रामकाली जी से ली, जो उस समय के एक प्रख्यात  लोक गायक थे। लोक गायन की प्रारम्भिक शिक्षा इन्होंने अपने पिता से ही ली। पहाड़ी गीतों में प्रयुक्त होने वाले रागों का निरन्तर अभ्यास करने के कारण इनकी शैली अन्य गायिकाओं से अलग है। विवाह के बाद इनके पति श्री दीवानी राम जी ने इनकी प्रतिभा को पहचाना और इन्हें आकाशवाणी और स्थानीय मेलों में गाने के लिये प्रेरित किया। उस समय तक कोई भी महिला संस्कृतिकर्मी आकाशवाणी के लिये नहीं गाती थीं। ७० के दशक में इन्होंने पहली बार पहाड़ के गांव से स्टूडियो पहुंचकर रेडियो जगत में अपने गीतों से धूम मचा दी थी। कबूतरी देवी किसी स्कूल कालेज में नहीं पढ़ी, न ही किसी संगीत घराने से ही उसका ताल्लुक रहा बल्कि उसने पहाड़ी गांव के कठोर जीवन के बीच कला को देखा ,अपनाया, उसे अपनी खनकती आवाज से आगे बढ़ाया। लोगों ने …

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Jun
06

कबूतरी देवी- आभाव में उखड़ती साँसें

Kabootri Devi First Female Folk Singer of Uttarakhand

पहाड़ की तीजनबाई कौन है ? नई पीढ़ी को तो मालूम नहीं है । हाँ, अब सरकार के साथ लोग भी भूलने लगे हैं । लोक गायिका कबूतरी देवी को कभी उत्तराखण्ड की तीजनबाई के नाम से जाना जाता था । अब वह गंभीर रूप से बीमार हैं । बचपन से ही विरासत में मिली …

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Jun
03

एक द्वी ही भौत छन,नौनु हो या नौनि दा

A beautiful poem by Dr. Gauniyal emphasizing on the need of the hour "Population Control" (Photo courtesy:http://www.mountain.org/blog/2012/02/a-solution-to-hunger-starting-with-a-seed/)

एक द्वी ही भौत छन,नौनु हो या नौनि दा. होलि मुश्किल सैंतणा की,निथर तब हे दिदा. बिंडी ह्वाला तब क्य खाला,पुट्गी राली खाली दा. सबि नंगा-भूखा उन्नी राला,तब क्य होलू हे दिदा. ल्यखणु-पढणु, झुल्ला-गफ्फा,आलो कख बिटिकी रे. फिर एक बन्दा अर सौ धंधा,तब क्य होलू हे दिदा. भर्ती हूणू इस्कुलों मा,ह्वैगे मुश्किल यूं दिनों. ढेबरा-बखरा …

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May
25

पहाडा कि नारी ! तू जाग-जाग !!

पहाड़ा कि नारी,पहाड़ा कि लाज . त्यारा कान्ध्यों मा, भार च आज. दरवल्य़ा ह्वैगेनी मर्द आज. तौंकू नि छा क्वी काम-काज. अपणा पति तू, जब बाट ल्हेली. ख़ुशी-ख़ुशी तू ,तब ही रैली. नारी तू जाग,जाग तू जाग. तिन बणोण खुद अपणो भाग. पहाड़ा कि बेटी,ब्वारी सूणि ल्यावा. नौनि-नौना तै तुम, खूब पढ़ावा. नौनि-नौना मा, नि …

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