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Mar
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शकुंतला का पौराणिक वर्णन

History Aspects of Shakuntala with reference History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur

हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में शकुंतला का पौराणिक वर्णन

History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur Part –70

हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास -भाग -70

इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

शकुंतला ब्रह्मर्षि विश्वामित्र व अप्सरा की पुत्री मेनका की पुत्री थी जिसका पालन पोषण महर्षि कण्व आश्रम में कण्व की देखरेख में हुआ। कण्वाश्रम मालनी नदी के तट पर था । मालनी नदी गढ़वाल से बिजनौर के नजीबाबाद के पश्चिम में बहकर गंगा से मिल जाती है। यही कारण है कि शकुंतला को गढ़वाल व बिजनौर के पौराणिक इतिहास से जोड़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि शकुंतला का बचपन भाभर में बीता और यह भाभर बिजनौर , हरिद्वार और गढ़वाल तीनो क्षेत्र का हिस्सा है।
कण्व मुनि तब आश्रम में नही थे जब एक बार राजा दुष्यंत भाभर में वन आखेट हेतु आया और उसकी भेंट शकुंतला से हो गयो। दोनों को प्रेम हो गया। तुरंत गन्धर्व विवाह में दुष्यंत ने शकुंतला को अंगूठी भेंट की। कुछ दिन शकुंतला के साथ विताने के वाद दुष्यंत अपने राज्य की और चला गया।
कण्व ऋषि को भी दोनों के गन्धर्व विवाह की बात पता चल गयी थी।
शकुंतला से भरत नाम का पुत्र हुआ। शकुंतला पुत्र सहित दुष्यंत की रजधानी पंहुची। अंगूठी खो जाने से दुष्यंत ने शकुंतला को पहचानने से मना कर दिया। अंत में आकाशवाणी होने से दुष्यंत ने शकुंतला को पहचाना। शकुंतला -दुष्यंत पुत्र भरत बड़ा पराक्रमी व वीर राजा हुआ और जिसके नाम से जम्बूद्वीप का नाम भारत पड़ा।

** संदर्भ – —
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड इतिहास – भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India 2/3/15 /2015

History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur to be continued Part –71

हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास to be continued -भाग -71

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