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May
08

हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में कनिष्क के उत्तराधिकारी

Heirs of Kanishka & History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur

हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में कनिष्क के उत्तराधिकारी

Ancient History of Haridwar, History Bijnor, Saharanpur History Part –

हरिद्वार इतिहास , बिजनौर इतिहास , सहारनपुर इतिहास -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग –

इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

वनिष्क व द्वितीय

कनिष्क के मृत्यु उपरान्त उसके पुत्र वनिष्क ने चार साल शासन चलाया। वनिष्क की कोई मुद्रा उपलब्ध नहीं है।
किसी अन्य कनिष्क की मुद्रा मिलने इतिहासकार मानते हैं कि यह राजा कनिष्क द्वितीय है। कनिष्क द्वितीय का राज्य भी अल्पकालीन था।
हुविष्क

उपरोक्त राजाओं का उत्तराधिकारी हुविष्क हुआ रजयकाल 35 -40 वर्ष का था.
हुविष्क के अनेकों मुद्राओं व अभिलेखों अनुसार हुविष्क एक प्रतापी शासक था। हुविष्क शासन काल कुषाण काल का स्वर्ण काल माना जाता है।
हुविष्क ने भी अपनी मुद्राओं में देवी देवताओं के चित्र बनवाए। उसकी मुद्राओं में देवी , यूनानी देवता , शिव , देवी , स्कन्ध , कुमार आदि की प्रतिमाएं अंकित हैं। हुविष्क कनिष्क उदारवादी था और अन्य धर्मों को सम्मान देता था।

वासुदेव
कुषाण साम्राज्य का राजा वासुदेव हुआ। वासुदेव के नाम व मुद्राओं से सिद्ध होता है किअब कुषाण शासक पूर्ण तरह से हिन्दू संस्कृति में घुलमिल गए थे। उसकी मुद्रा में उसका नाम ‘महाराजा राजतिराज देवपुत्र शाही वासुदेव ‘ अंकित है। वासुदेव की मुद्राओं में केवल ननादेवी (उमा ) और शिव की आकृति मिलती हैं। वासुदेव भी अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णु था।

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India 8/ 5/2016

History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur to be continued Part –

हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास to be continued -भाग -

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