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Aug
25

किरम्वळौं कि भयात

Modern Garhwali Story
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किरम्वळौं कि भयात
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Story by: Mahesha Nand
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बिंड्डि कै किरम्वळा अपड़ा झिंट्टा-बुकळा लेकि अपड़ा ड्यार छा जांणा। कै मा नाजा भारा त कै मा लखड़्वा गड्वळा छा। हिटद-हिटद सि ऐ ग्येनि एक चौड़ा-चकळा बाठा मा। बाठम् द्वी मनिख लोखरा डिंगुला छा कटंणा। किरम्वळौं कS पदानन् बोलि— “यूं मनिख्यूं कु बाठु अड्यूं च। न हो कै फर चोट-फटाग लग, पैलि यूं थै जांण द्या। घड़ेक थौ बिसा, पाछ जौला ऐथर।”
सौब किरम्वळा बाठा छोड़ थौ खांण बैठि ग्येनि। एक दानु किरम्वळु मनिख्यूं थै टक्क लगै कि दिखंणू छौ। वेन ज्वान किरम्वळौं थैं अढ़ांद बोलि– “द्येखा रै छ्वारौं,सि मनिख लोखरा सिनसन् (चिमटा) लोखरा छींणा थै अड्येकि अर तब वे कS बरमंड मा लोखरा कै घैंणन् टमाक मारी लोखरी थैं तड़क्क-तड़क्क तुंण फर लग्यांन्। ग्याड़ु (मूरख) लोखर चड़क्क-चड़क्क टुटंण फर लग्यूं च। ब्वाला, क्य बिंग्यां ?”
“नि बिंग्यां दादा जी, तुमी बिंगा।” ज्वान किरम्वळा दंदोळम् पोड़ि ग्येनि।
“टक्क लगै कि बींगा। जु सि मनिख सूनौ छींणू, सूनौ क्वी घैंण अर सूनौ क्वी सिनसु बणै कि लोखर थैं तुंण चाला त लोखर सप्पा नि टुटंण्या। सूनु चा कतगै मैंगु किलै न धौं, वे फर इतगा सक्या(ताकत) नी कि वु लोखर थैं चड़कै साक। बिंगणै बात या च कि स्यु लोखर अपड़ि सक्या अपड़ौंयी थैं गिंडांण्म लगांणू च। मनिख बि अपड़ि सक्या मनिखी थैं कचम्वंणम् लगै दींद। तुम बि जु अपड़ि सक्या अपड़ौंयी थैं चटगांणम् लगै द्येल्या त सौब लोखरी जन टुटी नितंणा (कमजोर) हूंणा रैल्या। किरम्वळौं कि भयात अज्यूं तकै सांजिलि-मेसिलि (मिलजुल कर) कै रांद। बिस्रि बि तै लोखर अर मनिख जन नि हुंया।”
ज्वान किरम्वळौन् अपड़ा दादा खुटौंम् मुंड नवै द्या।
Copyright@ Mahesha Nand
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