«

»

Jun
14

जय भैरव नाथ ठाकुर जी

जय भैरव नाथ ठाकुर जी
-
Spiritual Garhwali Poem by Krishna Kumar Mamgain
-

कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
दैंणूं ह्वै भैरौं मेरा मुंड मां राखी हाथ ।
शरणांगत तेरा छऊं तू ही माई-बाप ॥
.
मेरू आधार तू मेरू दातार तू ।
मेरू संसार तू मेरू परिवार तू ॥
मेरू सत्कार तू मेरू उद्धार तू ।
मेरू सौकार तू मेरू हितकार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
मेरू भरतार तू मींकु अवतार तू ।
मेरू करतार तू मीं लगै पार तू ॥
मेरू आचार तू मेरू ब्योहार तू ।
दिलमां दीदार तू छै सहोदार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
ध्यान कू कार तू मान कु सार तू ।
मनकु हंकार तू छै परोपकार तू ॥
घर कि पगार तू मेरू दीदार तू ।
मेरू सुखकार तू मेरू दुखहार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
छै सलाकार तू छै मददगार तू ।
छै मेरा घार तू घर का बाहर तू ॥
सोच की सार तू पौंच से पार तू ।
दिल कु दरबार तू मेरू संसार तू ..
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
दिलमां साकार तू छै निरंकार तू ।
मनकि बयार तू भक्ति बौछार तू ॥
कष्ट उद्धार तू मेरि सरकार तू ।
मेरू दरबार तू दर कु दीदार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
छै मनोहार तू हे जगत्कार तू ।
मींकु आकार तू मींकु साकार तू ॥
मेरू दिलदार तू मेरू भरतार तू ।
जै नमस्कार तू नम कु आकार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
सृष्ठि आकार तू शेष फुँकार तू ।
ओम कू सार तू ब्योम से पार तू ॥
बेदु उच्चार तू पूजौ आधार तू ।
मेरू ओंकार तू मेरू मोंकार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
भक्ति कू सार तू मुक्ति दातार तू ।
सुखसंसार तू मन कु विहार तू ॥
मेरि मातार तू लड्लो प्यार तू ।
मुक्ति कू द्वार तू मेरू संसार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
ब्यालि यादगार तू आज की बहार तू ।
भोलै चमत्कार तू सगोर कि सार तू ॥
दिल का आरपार तू मेरू बंधनवार तू ।
मेरू सलाहकार तू छै सिपैसलार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
शंख की टंकार तू गीतकी झंकार तू ।
भजन की पुकार तू कीर्तन की सार तू ॥
धन से छै पार तू छै सदाचार तू ।
मेरू ब्यवहार तू मेरू माफिकार तू ..
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
संधि की लकार तू भाषा की पुकार तू ।
बेदू की बहार तू पूजा कू आहार तू ॥
मेरू दिलदार तू मेरू अलंकार तू ।
मेरू पालनहार तू जगकु जगत्कार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
दया कु अम्बार तू ब्वै बबू कु प्यार तू ।
दुखम खबरदार तू सुखम बफदार तू ॥
मेरू शिल्पकार तू मेरू संस्कार तू ।
मेरू चौकीदार तू मेरू ठेकादार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
.
मेरू ब्यवहार तू मेरी पौ बहार तू ।
छै मेरू दिलदार तू मीकु चमत्कार तू ॥
छै निर्बिकार तू मेरी मनसार तू ।
जै मेरा भैरौंजी ईष्ट साकार तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ।
.
भक्ति देनहार तू मुक्ती दातार तू ।
धैर्य की दीवार तू कष्ट निवार तू ॥
पैलु हिस्सादार तू पैलु रिस्तादार तू ।
सारूं कू छै सार तू मेरा भैरौं प्यारु तू ॥
.
कृपा राखी दे प्रभू जनम जनम कू साथ ।
दींणूं चा कुछ दे इनू छोड़ि न मेरो हाथ ॥
दैंणूं ह्वै भैरौं मेरा मुंड मां राखी हाथ ।
शरणांगत तेरा छऊं तू ही माई-बाप ॥
.
जय भैरव नाथ ठाकुर जी ।
जय दस जून ॥
.
.
Of and By : कृष्ण कुमार ममगांई
ग्राम मोल्ठी, पट्टी पैडुल स्यूं, पौड़ी गढ़वाल
[फिलहाल दिल्लि म] :: {जै भैरव नाथ जी की }
-
-
-
Garhwali Poems, Folk Songs , verses , ग़ज़ल्स, from Garhwal, Uttarakhand; Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Pauri Garhwal, Uttarakhand; Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Chamoli Garhwal, Uttarakhand गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; पौड़ी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; चमोली गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; टिहरी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; उत्तरकाशी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; देहरादून गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; हरिद्वार गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; Ghazals from Garhwal, Ghazals from Uttarakhand; Ghazals from Himalaya; Ghazals from North India; Ghazals from South Asia, Couplets in Garhwali, Couplets in Himalayan languages , Couplets from north India
d; Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand; Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Tehri Garhwal, Uttarakhand; Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand; Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Dehradun Garhwal, Uttarakhand; Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Haridwar Garhwal, Uttarakhand; Himalayan Poetries, North Indian Poetries , Indian Poems, SAARC countries poems, Asian Poems

Thanking You .
Jaspur Ka Kukreti

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.