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Jan
25

सरसु संघार दैंत संघार से बि कठिन युद्ध हूंद

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सरसु संघार दैंत संघार से बि कठिन काम हूंद
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युद्ध पुराण व्यास ::: भीष्म कुकरेती

दैंत संघार कु गीत , जागर त भौतुंन सूण ह्वलु पर सरसु संघार कविता भौत कम कवियोंन सूण ह्वेलि। सरसु संघार कविता दुनिया का 207 महान कवियों मादे एक कवि स्व कन्हैयालाल डंडरियाल की प्रसिद्ध कविता च। यीं कविता पढ़िक मि तैं लग डंडरियाल जीन हमर गाँव मा हमर डिंडळम हुयीं घटना देखिक या कविता लेखी होली। फिर वेक बाद मै याद नी कि कै गढ़वळि साहित्यकारन सरसु संघार पर कलम चलाई ह्वेलि।
अथ: मतकण: (सरसु ) संहार अध्याय प्रारम्भ
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सरसु संघार कौंळ , विद्या , स्किल हरेक भारतीय तै आण जरूरी च इख तक कि मुकेश अम्बानी , अडानी अर असुद्दीन ओवैसी तैं बि। जी हाँ ! यूं बड़ आदिमुं तैं सरकारी ऑफिसक कुर्सी म बैठण पड़दि ह्वाल त सरसु , खटमल या बेडबगुं से पूठाभेंट त करणी पड़द ह्वेलि कि ना ? सरकारी दफ्तरक कुर्सी याने सरसुं दगड़ पूठाभेंट की सर्वोत्तम जगा।
हमर युग याने घी युग , याने डीडीटीबिहीन युग याने सरसुं , खटमलुं स्वर्णिम युग। तब हम तै पाटी दिखावो या ना दिखावो पर लिखल संघार , जूं संघार अर सरसु युद्ध अवश्य सिखाये जांद छा अर पारम्परिक शिक्षक ना तो नाळी लींद छा, ना सरकार से सब्सिडी लींद छा अर ना इ घमंड करदा छा। असल मा तब ब्वे बाब अपण बच्चों तै शिक्षा दीणम सरकार से मुवाजवा नि मंगद छा। तब जूं संघार व सरसु संघार की शिक्षा एक कर्तव्य माने जांद छौ।
तब सरसु संघार कृत्य आवश्यक छौ. आज बि रेल यात्रा , बस यात्रा इख तलक कि हवाई जाज यात्रा मा सरसु संघार आवश्यक च। तब यदि तुमर घौर नागराजा -ग्विल की कृपा से सरसु , खटमल , बेड बग राज खतम बि ह्वे गे हो तो हौर मौ -थोक मा सरसु अंडा ही काफी हूंद छौ कुछ दिन मा आतंकबाद फैलाणो कुण। लकसरे तोयबा या तालाबीनी आतंकबाद से तो क्वी बि लौड़ सकुद किन्तु खटमली आतंकबाद का समिण ट्रम्प का ट्रम्प कार्ड बि फेल हूंद।
सरसु संघार कु सबसे नायब हथियार हूंद छौ हस्तशस्त्र। हस्तशस्त्र कबि बि , कखिम बि प्रयोग करे जाण वळ शस्त्र हूंद छौ जैकी औपचारिक ट्रेनिंग नि दिए जांद छौ अर छै सालक बच्चा बि हस्तशस्त्र चलाणम पारंगत ह्वे जांद छौ। मि तैं लगद सरसुं संघार का वास्ता हस्तशस्त्र चलाणै कौंळ प्रकृति जन्य गुण होलु। सरसु दिखदी तर्जनी अंगुळी बगैर कै बि सेनापति की आज्ञा से अफिक चार्ज ह्वे जांद छे अर तब तक चार्ज ही रौंदि छे जब तक मतकुण रुधिर (खटमल खून ) से हस्त प्रक्षालण नि ह्वे जावो। मतकुण रुधिरौ हस्त प्रक्षालणसे योद्धा कु जोश वृद्धि ह्वे जांद छौ अर जोधा खटमलुं रुधिर दिखणो वास्ता सहस्त्र मतकण हत्या हेतु त्यार ह्वे जांद छौ। यदि सरसु कवि हूंदा त ऊंक कवितौं मा पाळी पर लगीं मतकण रुधिर पिठाइ कु करुणामय वर्णन हूंद। जैक पाळ यूं पर जथगा अधिक खटमल रुधिर टीका वो उथगा बड़ो सरसू मार माने जांद छौ।
कुछ आयुर्वैदिक याने हिंसाहीन या ग्रीन विपन्स बी प्रयोग हूंद था। जन कि खटला की चौक मा कुटळजड़ से थिंचाई -पिटाई। यां से सरसु सेना मा भगदड़ मच जांदी छे अर सरसू सेना भ्यूं गिर जांद छा। कुछ सरसू चरण चक्र से धरासायी करे जांद छा त कुछ हस्तशस्त्र से कचाये जांद छौ। काळरात्रि जन माहौल चौक मा बण जांद छौ अर पाद रुधिर प्रलाक्षण व हस्त रुधिर प्रलाक्षण की लालिमा दिखण लैक हूंद छौ। कुछ बीर जांबाज सरसू छुपाछुपी रणनीति का तहत छुपिक कखि चल जांद छा।
एक हैंक ग्रीन बग किलिंग सरमनी, रुधिर हीन हत्त्या याने आयुर्वैदिक हत्या ब्यूंत बि सरसू संघार का वास्ता प्रयोग हूंद छौ। याने खटला कु गरम गरम पाणी से स्नान। या रुधिर बिहीन हत्त्या सर्वाधिक कारगार युद्ध छौ किलैकि गरम पाणी से कूड़ जळो या नि जळो खटमलुं अर खटमल अंडौं जड़नाश ह्वे जांद छौ किन्तु न्यार कमजोर ह्वे जांद छौ।
फिर पर्यावरण विरोधी हथियार आयी जैक नाम छौ मिट्टी तेल याने कैरोसिन ऑइल। मिट्टी तेल से बि खटलाौं तै नवाणो रिवाज भौत सालुं तक राई।
फिर आयी एक हैंक पर्यावरण विरोधी अस्त्र। ये अस्त्र कु नाम छौ -डीडीटी या फ्लिट। कई दशकों से यु हथियार अबि बि प्रयोग हूंद हाँ अब नया अवतार मा येकुण हिट बुले जांद।
एक बात मेरी समझ मा अबि तक नि आयी कि चरक , शुश्रुता या भाव प्रकाश सरीखा वैद्याचार्योंन विभिन्न सहस्त्रों आयुर्वैदिक औषधि खोज करिन किन्तु मतकुण , खटमल या सरसु संघारक औषधि किलै अन्वेषित नि कौरी होली ? चलो यी अन्वेषक त क्षमा लैक छन किन्तु पिछ्ला द्वी सहस्त्र वर्षों मा कैन बि हर्बल बग किलिंग औषधि किलै अन्वेषित नि कौर ह्वेलि ? अब बाबा रामदेव या श्री श्री रवि शंकर से अपेक्षा च कि मान तै इन हर्ब या हर्बल मेडिसिन खोजिक द्यावो जु पर्यावरण का वास्ता भी सर्वोचित हो। उन यचुरी अर राहुल बाबा तैं त यूं से उम्मीद नी च पर मैं तैं उम्मीद च कि अगला द्वी सालुंम हिट की जगा हर्बल औषधि अवश्य मार्केट मा ऐ जाल।
इति मतकुण: हत्या प्रकरण : अध्याय समाप्त ।

25/1 / 2018, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,

*लेख की घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने हेतु उपयोग किये गए हैं।
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—– आप छन सम्पन गढ़वाली —-
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