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Jan
27

बन पिंडालू , पापड़ी , जंगली अरबी की सब्जी ,औषधीय व अन्य उपयोग और इतिहास

उत्तराखंड परिपेक्ष में बन पिंडालू , पापड़ी , जंगली अरबी की सब्जी ,औषधीय व अन्य उपयोग और इतिहास

History /Origin /introduction, Food uses , Economic Uses of Himalayan Gonatanthus pumilus in Uttarakhand context

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आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री )
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वनस्पति शास्त्रीय नाम – Gonatanthus pumilus
सामन्य अंग्रेजी नाम – Dwarf Gonatanthus

हिंदी नाम -जंगली अरबी
नेपाली नाम -पतरकच
उत्तराखंडी नाम – बण पिंडाळू , पापड़ी /पपड़ी
जन्मस्थल संबंधी सूचना – हिमालय में जनस्थल है।
बन पिंडालू बिलकुल पिंडालू जैसे ही होता है किन्तु इसके पत्तियों का रंग अधिक गहरा और पत्तियां हृदय नुमा , अधिक तिकोनी। पत्तियां 8 -15 सेंटीमीटर लम्बी व 5 से 10 सेंटीमीटर चौड़ी होती हैं व लम्बे डंठल से जड़ या कंद जुडी होती है. पानी के नजदीक ही पाया जाता है।
औषधि उपयोग – पत्तियों को मानव घाव व जानवरों के घाव पर एन्टीबायटिक रूप में लगाया जाता है। जड़ों का उपयोग छाती दर्द उपचार में उपयोग होता है। कैंसर के इलाज हेतु भी उपयुक्त माना जा है।

————पत्तों से से गुंडळ —-
बन पिंडालू का गुंडळ या पत्यूड़ बनाने में उपयोग होता है – पत्तों को काटकर उसमे आलण (छोला हुआ बेसन , मकई का आटा आदि ) नमक , मसाले मिलाकर प्रेसर कूकर , अथवा बड़ी पत्तियों के अंदर डालकर तवे में या गरम राख में पकाकर केक बनाया जाता है। फिर केक को काटकर गुंडळ के टुकड़ों को तेल , भांग के छौंके के साथ गरम किया जाता है। ठंडा ही परोसा जाता है।
—-पत्तियों की सब्जी –
बन पिंडालू की पत्तियों से अलग या या अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर सब्जी बनाई जाती है।
—-कंद उपयोग -
कंद का उपयोग भी घरेलू पिंडालू जैसे ही कई भाजी बनाई जाती हैं , सुखी , थिंचोणी , तरीदार आदि। मिश्रित सब्जी भी बनाई जाती हैं।
चूँकि बन पिंडालू अधिक चरचरा होता है तो धीरे धीरे बन पिंडालू का उपयोग घट रहा है

Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

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