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Jan
29

ब्वार्युं भजण-भगण याने कुल कलह पुराण

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ब्वार्युं भजण-भगण याने कुल कलह पुराण
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कखला बखली पंडित ::: भीष्म कुकरेती

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भजण , भजाण अर बिपदा मा भजन गाण मनुष्यौ नियति च। कुल कलह याने मुख्यतया सास-ब्वार्युं तनातनी। पैल जब तीन तलाक जन विषयों पर पंडित , पादरी अर मौलवी कुछ नि बुलण दींद छा त सास की धौंस औंसी दिन बि चल जांद छौ अर ब्वारी औंस क्या भाई खव्वा दिनौ कुण बि मैत अटक जांदी छे।
मि जब तक गाँव जाणु रौ त क्वी मैना इन नि रै होलु जब अडगैं (क्षेत्र ) मा कैं ब्वारिक भजणो या कै बेटिक भाजिक मैत आणो सूचना नि मिलदी हो धौं। अब सास भगण चांदन पर बिचारिक ब्वे बाब त रौंद नीन अर भाई लोग बैणी अर्थ रक्छा बंधनौ कुण मनी ट्रांसफर का अलावा कुछ नि जाणदन त इन मा सास जगा की जगा जमीं रौंद।
हमर जिना एक छे डौळी बौ। वींक अर वींक सासु बीच तून खूब लगद छा जन संसद मा कम्युनिष्ट अर भाजपायूं लगदन। जन भाजपा वळ बोल द्यावो कि इजरायल से सीमा सुरक्षा बान द्रोण खरीदणैन त कम्युनिष्ट बाबल मचै दींदन बल द्रोण खरीदे जाल त चीन की सीमा का क्या ह्वाल। कम्युनिष्ट चीन की चिंता मा इथगा पागल ह्वे जांदन कि कॉंग्रेस संसद कुंवां मा ऐ जांदी। संसद अध्यक्षम एकी विकल्प बचद कि संसदै कार्यवाही ही बर्खास्त करे जाव . इनि डौळी बौ अर भिरंग्या बोडीम तून इन मा बि लग जांद छा कि डौळी बौ कै डीलु लेकि पंद्यरम /धरड़म जावो। इनमा डौळी बौम मैत भजणो अलावा विकल्प नि हूंद छौ।
मंथा दादि अर बिंदरा काकी याने सासू -ब्वारी की कथा कळकळी ना अपितु ओज भरीं च। दुयुं क मैत एकि जि छौ। द्वी सास ब्वार्युं म जब झगड़ा हूंद छौ त गाँव वळुं तै इतिहास की नई नई जानकारी मिलदी छे। सास ब्वारीक मैत की महा पोल खोलदी छे त ब्वारी सासुक मैत की हुईं या निसुणी सब घटनाओं ब्यौरा देकि सासु तै इथगा शर्मशार करदी छे कि सास बि हीनग्रंथि शिकार ह्वेक सुचण लग जांदी छे कि इन परिवार म जनम लीण से बढ़िया तो जनम नि हूंद त ठीक छौ। दुयुंमा एक हैंक तैं बगैरकपड़ा उतार्यां नंगा करणो छौंपा दौड़ हूंद छे। अर जब सास ब्वारिक झड़ददी तैं दुघर्या ना तिघर्या सिद्ध कर दींदी छे त ब्वारिम मैत सटकणो अलावा कुछ विकल्प नि बचद छौ। फिर एक द्वी दिन बाद ददा या काका अपण ससुरास जांद छा अर बिंदरा काकी तै वापस लांद छा।
एक दिन त हद ह्वे गे। सुबेर सुबेर घाम आणो कुछ देर बाद मंथा ददि अर बिंदरा काकी मध्य झगड़ा छज्जा मा ही शुरू ह्वै गे अर छज्जा ही कुरुक्षेत्र बण गे छौ । चौक मा दादा न्यार बटणम व्यस्त त काका निसुड़ लछ्याणम व्यस्त छा। द्वी महान योगियों तरां ये कलह संसार से बिरक्त छा। अर दादिन फिर से सिद्ध कर दे कि बिंदरा काकीक झड़ददि तिघर्या छे। अब ब्वारी से नि सये गे वींन बि सिद्ध कर दे कि सासु क पड़ददा कै नजीबाबादी घुड़ैतौ जण्यू छौ।

मंथा दादी कुलपोल खुलण नि सै साकी अर वा गुस्सा मा दाथी लेकि कखि अटकी गे। ब्वारी तै बि गुस्सा आयी अर वा बि थमळि लेकि कखि अटकी गे। स्याम दैं पता चौल कि मंथा दादी अर बिंदरा काकी मैत भाजी गेन। सन्यासी बाप बेटान वैदिन अपण चिनख मार अर यीं दुखद घटना तैं सुखद घटना म बदल दे। दुसर दिन द्वी सास ब्वारी दगड़ी ड्यार ऐन अर दुयुंन स्वतः निर्णय ले कि चुल्ल अलग हूण आवश्यक च। बस तब बिटेन वा काकी कबि बि मैत नि भागी।
फूंदी बौक मैत नयार किनारा छौ याने माछुं गां। वींक अर सासु मध्य खूब झगड़ा हूंद छौ। एक दिन गृह युद्ध विश्व युद्ध म बदल गे। याने सास -ब्वारी मध्य कहासुनी हाथापाईम बदल गे। ब्वारी मल्ल्युद्ध मा हारी गे। तो फूंदीन उठायी एक धोती एक बिलौज अर बुल्द बुल्द चल गे बल मि मैत जैक कै हैंका कुण बैठ जौलू पर ते रांडक मुक नि दिखण। ब्वारी मैत भाजी गे। थोड़ा देर बाद ब्वारी क्या दिखदि कि सास बि नै धोती अर नै अंगुड़ पैरिक ब्वारी क पैथर पैथर आणि छे। ब्वारिन कुटबाग ब्वाल , ” ये रांड ! धौळी मा फाळ मारणै जादि। क्या छे म्यार पैथर आणि ?”
अर सासुक बचन सूणी त ब्वारी लक्ष्मण पत्नी उर्मिला ह्वे गे याने सासु भक्त ह्वै गे । सासून जबाब दे , ” हूं ! तू अपण बूबा की सैणी ! मैत जैली अर अफिक माछ खैली हैं ? मीन बि माछ खाणो त्यार मैत आण। ” द्वी दगड़ी ब्वारिक मैत चली गेन। खैर इन घटना त सैकड़ों मा एक ही हूंदी छे।
अच्छा एक बात आपन बि नोट करि ह्वेलि कि ब्वारी मैत तबि तलक भजदी छे जब तक ब्वारी माँ नि बण जा। माँ बणी ना अर ब्वारी मैत नि भजदी छे।
अजकाल ब्वारि मैत नि भगदन , अर यदि भाजी बि गे त पैथर बिटेन तलाक अर बहू प्रताड़न कु नोटिस ऐ जांद।
अचकाल बेट्यूं भजणो घटना जि बढ़ गेन बल चाहे देस हो या परदेस।

29/1 / 2018, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,

*लेख की घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने हेतु उपयोग किये गए हैं।
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—– आप छन सम्पन गढ़वाली —-
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