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Jan
31

उत्तराखंड परिपेक्ष में छोपछीनि /कुकरदार की सब्जी ,औषधीय व अन्य उपयोग और इतिहास

उत्तराखंड परिपेक्ष में छोपछीनि /कुकरदार की सब्जी ,औषधीय व अन्य उपयोग और इतिहास

History /Origin /introduction, Food uses , Economic Uses of Himalayan Smilax, Smilax aspera in Uttarakhand context

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आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री )
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वनस्पति शास्त्रीय नाम – Smilax aspera
सामन्य अंग्रेजी नाम – Smilax, Prickly Ivy
संस्कृत नाम -छोपछीनि , द्वीपांतरा
हिंदी नाम -कुकुरदार
छोपछीनी /कुकरदार लतानुमा पौधा है जो पेड़ों पर चढ़कर 45 मीटर तक लम्बी लता रूप ले लेता है। छोपछीनी /कुकरदार के पत्ते गदगदे व हृदय शक्ल के होते हैं। सफ़ेद फूल वाले छोपछीनी /कुकरदार के फल पककर लाल व सुखकर भूरे या काले हो जाते हैं। छोपछीनी /कुकरदार हिमालय में 1200 -2500 मीटर की ऊंचाई में पाए जाते हैं।
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संदर्भ पुस्तकों में वर्णन – भावप्रकाश निघण्टु में द्वीपांतरा नाम से उल्लेख हुआ है।

— औषधीय उपयोग —
छोपछीनी /कुकरदार का मुख्य उपयोग औषधि हेतु होता आया है। छोपछीनी /कुकरदार के विभिन्न भागों का उपयोग , सिफिलिस , साजोफेनिया, पेट दर्द , बबासीर , नपुंसकता जैसी बीमारियां दूर करने हेतु होता है।
—– भोज्य पदार्थ उपयोग —
छोपछीनी /कुकरदार के कच्चे डंठल की कलियों से हरी सब्जी बनाई जाती है जैसे एस्पेरेगस की सब्जी बनाई जाती है। छोपछीनी /कुकरदारके कंद को किसी तरीदार सब्जी में भी डाला जा सकता है। किन्तु मुख्यतया छोपछीनी /कुकरदारडंठल कली की सब्जी या कंद का सब्जी में उपयोग वास्तव में वैद्यों के परामर्श से ही उपयोग किया जाता है। जब अकाल या कम सब्जी का समय हो तो छोपछीनी /कुकरदारके क्लीनुमा डंठलों की सब्जी बनाई जाती है।

Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

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