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May
18

राहुल गांधी को मोदी पर आक्रमण बंद कर देना चाहिए

राहुल गांधी के नासमझ सलाहकारों को प्र . मं . मोदी पर सीधे आक्रमण बंद कर देना चाहिए

विपणन गुरु : भीष्म कुकरेती

( 18 मई 2018 , कर्नाटक विधानसभा चुनाव उपरान्त ब्रैंडिंग विश्लेषण )

कर्नाटक विधान सभा चुनाव (मई 2018 ) में भाजपा को बहुमत नहीं मिला पर बहुमत के बहुत करीब पंहुच गयी और कॉंग्रेस जीडीएस को समर्थन देने को मजबूर हो गयी है याने कॉंग्रेस का बंटाधार। ऐसे में आकलन आवश्यक है कि राहुल गांन्धी के आक्रमण क्यों नहीं सफलता पा रहे हैं। राहुल गांधी के सफलता के मध्य मोदी छवि सबसे बड़ा रोड़ा है।
यह जगजाहिर है कि राहुल गांधी जो भी बयान देते हैं वह उनके सलाहकार दिलवाते हैं अन्यथा कॉंग्रेसियों को भी मालुम है श्री राहुल गांधी तो अज्ञानियों के गुरुघंटाल हैं। यदि कॉंग्रेस परिवारबाद से कैंसर से पीड़ित न होती तो राहुल गांधी को कॉंग्रेस दफ्तर में कागज इधर उधर उठाने का भी काम नहीं मिलता। जिस मनुष्य को यह मालुम नहीं कि भारतीय अपनी सेना की बुराई नहीं सुन सकता वह भारतीय सेना की बुराई करे व उसका सिपासलाकार दीक्षित सेनापति को सड़क का गुंडा कहे ऐसे राजनीतिज्ञ दल के अध्यक्ष को मूर्ख कहना भी मूर्खता ही होगी। जिस राजनीतिज्ञ और वह भी कॉंग्रेस अध्यक्ष को जनता की रग पता न हो उस के बयान को राजनैतिक जन्मजात मूर्खतायुक्त बयान समझने में कोई हर्ज नहीं। जिसे पता न हो कि आम जनता नोटबंदी से प्रसन्न है और वह आज भी नोटबंदी की आलोचना करे उसे क्या कहा जा सकता है ? याने राहुल जी की समझ पर सबको पता है कि वे अपने आप बयान देने में सर्वथा असमर्थ हैं। यह सर्वविदित है कि राहुल जी या प्रधान मंत्री मोदी जी सलाहकारों की सलाह से बयान देते हैं किन्तु चतुर राजनीतिज्ञ तोतारटंत अनुसार बयान नहीं देते हैं करते हैं । राहुल जी तोतारटंत भाँती बयान देते हैं और लगभग हर बार मूर्ख राजनीतिज्ञ साबित होते जाते रहे हैं । 17 मई को छत्तीसगढ़ में उन्होंने मोदी के एकाधिकारी गुण पर आक्रमण हेतु हिन्दुस्तान की तुलना पाकिस्तान न्यायपालिका से कर दी औरदिन भर टीवी मीडिया में चर्चा मोदी के डिक्टेटरशिप के बजाय राहुल की पाकिस्तान तुलना पर होती रही। इससे इससे बड़ा आत्मघाती बयान तो निरा मुर्ख राजनीतिज्ञ भी नहीं देते हैं।

मोदी पर आक्रमण आत्मघाती कृत है

राजनीति छवि का खेल है याने ब्रैंडिंग का खेल है और कोई माने या न माने ब्रैंडिंग सदा की भांति युद्ध सिद्धांतों पर ही चलता है। जी हाँ ब्रैंडिंग के सभी सिद्धांत युद्ध सिद्धांतों पर ही आधारित हैं और प्रमाणित हैं। वोटरों का मन ब्रैंडिंग युद्धभूमि है। मन या चित्त में ही ब्रैंडिंग युद्ध चलता रहता है। हर व्यक्तिवाची संज्ञा एक ब्रैंड ही होता है। राहुल, नरेंद्र मोदी , जवाहर लाल सभी ब्रैंड हैं।

भारतीय राजनीति में मोदी एक बहुत ताकतवर ब्रैंड है

इसमें दो राय नहीं कि भारतीय राजनीति में मोदी एक ताकतवर ब्रैंड के रूप में उभर कर आया है। राहुल गांधी वास्तव में बहुत ही क्षीण हीन ब्रैंड है। ब्रैंडिंग युद्ध नियम है कि सबसे ताकतवर ब्रैंड पर अन्य सभी ब्रैंड आक्रमण करते हैं। किन्तु क्या वास्तव में आक्रमण करना सही है ? जी दूसरे नंबर के ब्रैंड का पहले नंबर के ब्रैंड पर आक्रमण सही होता है किन्तु आक्रमण कभी भी ताकतवाले स्थान या गुण पर नहीं किया जाता है अपितु शत्रु के कमजोरतम स्थान या गुणों पर जबरदस्त आक्रमण किया जाता है। जैसे राम जब रावण के शरीर पर आक्रमण करते थे तो आक्रमण विफल हो जाता था। राम ने रावण के कोमलतम अंग नाभि पर तीर मारा तो रावण धराशायी हो गया। कुरुक्षेत्र युद्ध में भीम जब जब दुर्योधन के ताकतवर अंगों पर गदा वार करता रहा विफल होता रहा किन्तु जैसे ही भीम ने दुर्योधन के कमजोरतम अंग जंघा पर गदावार किया दुर्योधन धराशायी हुआ।
अब हम ब्रैंड राहुल गांधी द्वारा ब्रैंड मोदी पर आक्रमण का विश्लेषण करें। शुरू से ही मोदी विरोधी मोदी के सबसे ताकतवर गुणों पर ही वार करते रहे। मोदी हिन्दुओं के लिए एक गर्व है (सही या गलत इसे भूल जाईये ) . यहां तक कि जो मोदी ब्रैंड को वोट नहीं देते उन हिन्दुओं की भी सहानुभूति मोदी ब्रैंड के साथ आज भी है। विरोधी सेक्युलरिज्म या मानव हित के नामपर मोदी पर सीधे आक्रमण करते रहे और अपने तीर विफल करते रहे। मौत का सौदागर जैसे अमोघ अस्त्र भी असफल हो गया उलटा इस अस्त्र ने कॉंग्रेस को ही क्षति पंहुचाई। मोदी ब्रैंड की प्रसिद्धि में भाजपा या आर एसएस का उतना हाथ नहीं जितना कि विरोधियों के आक्रमणकारी अपशब्द। अखिलेश यादव का गधा प्रकरण प्रमाण है कि मोदी पर सीधी आलोचना आक्रमण मोदी हेतु लाभकारी है। कर्नाटक चुनाव में राहुल गांधी द्वारा संसद में 15 मिनट के भाषण की प्रार्थना वाले बयान पर तो राहुल जी हंसी के ही पात्र बन गए और मोदी ब्रैंड और भी ताकतवर ब्रैंड बनकर उभरकर आ गए।
राजनीति में विरोधियों द्वारा मोदी की कमजोरी पर आक्रमण आवश्यक है किन्तु आक्रमण ताकत पर नहीं अपितु कमजोरी पर किया जाना चाहिए।

क्या है ब्रैंड मोदी की कमजोरी
मोदी की जो भी कमजोरी होंगी वे जनता के लिए इर्रेलिवेंट अप्रासांगिक हैं। आर एसएस संस्थाओं में घुस रहा है बयान भी अप्रासांगिक आक्रमण है। राहुल गांधी या विरोधियों को समझना चाहिए कि भाजपा के 11 करोड़ सदस्यों के साथियों को आर एसएस का विरोध नहीं भायेगा। मोदी की कमजोर नस मोदी नहीं अपितु उनके मंत्री आदि हैं। यदि राहुल गांधी या अन्य को मोदी ब्रैंड पर आक्रमण करना है तो मोदी नाम लेना सर्वथा बंद कर देना चाहिए। मोदी ब्रैंड को अप्रासंगिक बनाना है तो मोदी नाम की सर्वथा उपेक्षा कर दी जानी चाहिए। राहुल गांधी के एक भाषण में राहुल जी ने 59 बार मोदी का नाम लिया जैसे मोदी मोदी न हों राम हो गए हों. राहुल गांधी जी व अन्य विरोधियों को मोदी रट बंद कर लेनी चाहिए। यदि घरेलू पहलु पर आक्रमण करना हो तो सीधे राजनाथ सिंह पर आक्रमण होना चाहिए। कमजोरी। इन्हे टारगेट किया जाना चहिये। चीन समस्या पर प्रश्न चिन्ह मोदी पर न लगाया जाय अपितु रक्षामंत्री सौ सीतारमण पर आक्रमण किया जाय. इसी तरह किसानों की समस्या हेतु मोदी पर आक्रमण न किया जाय किन्तु कमजोरतम मंत्री राधा मोहन सिंह पर चारों तरफ से इतना वार किया जाय कि मोदी ब्रैंड को राधा मोहन सिंह के बचाव में उतरना पड़े। मोदी ब्रैंड को उनके युद्धभूमि में पछड़ना कठिन है किन्तु राधा मोहन सिंह सरीखे मंत्री को युद्ध क्षेत्र में लाकर ही मोदी ब्रैंड पर आक्रमण का सही तरीका है।
जब तक विरोधियों द्वारा मोदी ब्रैंड की अवहेलना या उपेक्षा न हो तब तक विरोधी मोदी ब्रैंड से पार नहीं पा सकते।

भाजपा की क्या रणनीति हो ?
भाजपा को राहुल गांधी की अज्ञानता को सदा प्रासांगिक बने रहना देना चाहिए और जनसम्पर्कीय क्रियाकलापों द्वारा सिद्ध करते रहना चाहिए कि अज्ञानी का साथ केवल मूर्ख दल ही देते हैं जैसे अखिलेश. भाजपा को राहुल गांधी को उकसाना चाहिए कि राहुल गांधी मोदी ब्रैंड पर अनाप सनाप आरोप लगाते रहें और मूर्ख राजनीतिज्ञ सिद्ध होते रहें।

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