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May
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स्र्व्नाग विषयपति

गुप्त काल में गणराज्यों की दशा व सर्वनाग विषयपति

Republics in Ancient Gupta Era History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur

हरिद्वार इतिहास , बिजनौर इतिहास , सहारनपुर इतिहास -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग – 218

इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

यद्यपि गुप्त सम्राट एकाधिकार व केंद्रित शासन समर्थक थे तथापि कुछ राज्यों गणराज्य भी विद्यमान थे संभवतया इन गणराज्यों के अधिपतियों ने गुप्त सम्राटों की आधीनता स्वीकार की होगी व राजयपाल रूप में स्वतंत्र कार्य करते रहे होंगे। निम्न गणराज्य काल में कार्यरत थे -
मद्र गणराज्य – मध्य पंजाब (महाजन )
कुणिंद गणराज्य — कांगड़ा घाटी (महाजन ) संभवतया कुणिंद राजयपाल के तहत सहारनपुर , हरिद्वार बिजनौर में भी रहे हों किन्तु बुलंदशहर के इंदौर ताम्र शासन से विदित होता है कि स्कंदगुप्त काल में सर्वनाग नामक व्यक्ति अंतर्वेदी (गंगा जमुना दोआब ) का विषयपति था। अतः हरिद्वार सहारनपुर, बिजनौर पर कुणिंद राजयपाल का सिद्धांत नहीं चल सकता है। सर्वनाग ही हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर व उत्तराखंड का विषयपति रहा होगा अधिक सटीक लगता है। ( डबराल )
गोपेश्वर व बाड़ाहाट अभिलेखों से पता चलता है कि विकर्मी पांचवीं छठी सदी में कर्तृपुर पर नागवंशी स्थानीय शासक का शासन था व उत्तराखंड के श्चमी भाग व यामुन प्रदेश पर यदुवंशी नरेशों का शासन था (डबराल ) याने सर्वनाग वंश सत्य प्रतीत होता है
यौधेय – दक्षिण पूर्व पंजाब (महाजन )
अर्जुनानस -आगरा (महाजन )
प्रार्जुना – संकानिका व अभिर – मध्य देश )महाजन) 400 ईश्वी के पश्चात ये सभी गणराज्य नष्ट से हो गए थे।

संदर्भ
वी डी महाजन , अन्सियन्ट इण्डिया , पृष्ठ 525
शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड का इतिहास , भाग 3 , पृष्ठ 309

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India 2018

History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur to be continued Part –

हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास to be continued -भाग -

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