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May
25

मेडिकल टूरिज्म में हिमाचल से प्रतियोगिता


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उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति )

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) –

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

Copyright @ Bhishma Kukreti /5 //2018
संदर्भ

1 -भीष्म कुकरेती, 2006 -2007 , उत्तरांचल में पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150 अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
2 – भीष्म कुकरेती , 2013 उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन , इंटरनेट श्रृंखला जारी
3 – शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड का इतिहास part -6
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उत्तराखंड का सीधा मुकाबला दिल्ली से है

Delhi is Major Competitor ofor Uttarakhand

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उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन 95

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 95

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–197)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 197

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

मेडिकल टूरिज्म में हर चिकित्सा दायी क्षेत्र ग्लोबल प्रतियोगिता करता रहता है। योग चिकित्सा के के मामले में स्विटजर लैंड भी उत्तराखंड से प्रतियोगिता कर सकता है
मेडिकल टूरिज्म दृष्टि से उत्तराखंड के दो क्षेत्र मुख्य प्रतियोगी हैं -
ऐलोपैथी में दिल्ली
प्राकृतिक व वैकल्पिक चिकित्सा में हिमाचल प्रदेश।

दिल्ली की विशेस्ताएं जो उत्तराखंड में नहीं मिलती हैं
दिल्ली देश की राजधानी होने से दिल्ली का नाम भारत में या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रसिद्ध है।
दिल्ली में मेडिकल फैसिलिटीज उत्तराखंड के मुकाबले कहीं अधिक हैं।
दिल्ली में कई नामी गिरामी सरकारी चिकित्सालय पहले से खुले हैं जिनका नाम प्रसिद्ध हैं
दिल्ली में दवाईयां भी सर्वत्र उपलब्ध हैं
दिल्ली में प्राइवेट हॉस्पिटल्स व प्राइवेट डॉक्टरों की संख्या कहीं अधिक है। इमरजेंसी में सभी सहूलियतें मिल सकती हैं।
राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली आने -जाने के लिए सड़क , रेल व हवाई जहाज सुविधाएँ कहीं अधिक हैं
दिल्ली में आंतरिक परिहवन व आवास -भोजन सिविधाएँ अधिक व वृहद स्तर पर हैं

मेडिकल टूरिज्म में दिल्ली से प्रतियोगिता करना सफल रणनीति नहीं हो सकती है

उपरोक्त तथ्य साफ़ साफ़ निर्देश देते हैं कि ऐलोपैथी चिकित्सा में दिल्ली के साथ प्रतियोगिता कठिन है। यद्यपि प्राइवेट चिकित्सा संस्थान खुलवाने के अच्छे अवसर उत्तराखंड में हैं किन्तु वे कम ही पड़ेंगे।
दिल्ली से प्रतियोगिता आवश्यक है अतः उत्तराखंड को ऐसे मेडिकल प्रोडक्ट निर्मित करने पड़ेंगे जिसमे दिल्ली आगे न आ सके।

उत्तराखंड मेडिकल पर्यटन के सुनहरे वर्ष जब गांधी जी ने उत्तराखंड यात्रा की

Gandhi Visiting Uttrakhand

( ब्रिटिश युग में उत्तराखंड मेडिकल टूरिज्म- )

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उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) 96

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 96

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–198)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 19

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )
मेडिकल टूरिज्म इतिहास में गांधी जी की मसूरी व कसौनी यात्रा हमेश याद रखा जायेगा। दोनों बार गांधी जी यात्राएं मेडिकल टूरिज्म संबंधी यात्राएं थीं।

Gandhi Ji was interested knowing about Uttarakhand by his own experience. Mahatma Gandhi reached Haridwar on 5th April 1915 at the Kumbh Occasion. Mahatma Gandhi visited Gurukul Kangari on 6th April 1915. Mahatma Gandhi visited Rishikesh, Swargashram and Lakshman Jhula on 7th April 1915. Mahatma Gandhi came to Gurukul again in 1916. In 19129, Gandhi reached Haridwar. Gandhi reached Mussoorie vi Dehradun and he rested there for 15 days. गाँधी जी ने मसूरी की यात्रा दुबारा 1946 में की

Gandhi Ji Visiting Kumaon region

In June 1921, Gandhi ji reached Kumaon. First he reached to Bareli on 13th June from Savarmati . Gandhi delivered a speech in Bareli in a public meeting. Gandhi reached Haldwani from Bareli in morning on 14th June 1921. Govind Ballabh Pant and other Kumaon degnities were present for his welcome in Hldwani . Devdas Gandhi, Mrs Kasturba Gandhi , Gandhi’s Secretary Pyarelal , Jawahar Lal Nehru, Acharya Kriplani, Sucheta Kriplani were with Gandhi. Mahatma Gandhi delivered a speech in public meeting in Haldwani and collected donation for Harijan Kalyan.

Gandhi reached Nainital around 11 AM from haldwani by car. The lodging arrangement for Gandhi was at Takula village two miles away from Nainital. Gandhi started his journey from Takula Village at five Pm for Nainital. People decorated town by flags and welcome gates. A procession was with Gandhi and band was in front. Gandhi was in open car and Govind Ballabh pant was also in car. Everywhere crowd was there in Nainital and joy was visible. Wives of British officers and other Lords were watching the procession with curiosity and surprise.

At 7 PM, the meeting started at Malla tal where Gandhi delivered speech. People donated Chanda too. Gandhi returned to Takula.

Gandhi spent Night in Takula. In next morning, Gandhi walked to Nainital. he delivered speech before women. Women donated money and their jewels to Gandhi .

In day time , Gandhi reached to Almora. There was huge procession for Gandhi . Unfortunately a young man Padma Singh came under Gandhi car and died in hospital. Gandhi went to hospital to see the youth. Goind Ballabh Pant attended funeral. Mukandi Lal barrister met Gandhi in Ranikehet.

On 21st June 1929 Gandhi reached to Kasauni. Badri Datt Pande was with Gandhi there. He was astounded by watching Himalaya. Next day, Gandhi reached Bageshwar and laid foundation stone for Swaraj Bhavan.

Gandhi stayed there for a few days. Gandhi wrote commentary on Anashakti Yoga of geetaa there. Gandhi stayed in Kumaon from june to 4th july. Gandhi reached Kashipur via Ramnagar Gandhi delivered speech and got donation too. Govind Ballabh Pant, Badri datt Pande and Mohan Joshi were with him in Kashipur.

Copyright @ Bhishma Kukreti 21 /5 //2018

मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक बाजार पर एक नजर
Medical Tourism Global Views

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उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति )

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) –

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

मेडिकल टूरिज्म बहुत पुराना विचार है। हजारों साल पहले पाषाण युग में भी मेडिकल टूर होते थे। उत्तराखंड तो मेडिकल टूरिज्म हेतु सैकड़ों वर्षों से भारत में प्रसिद्ध रहा है। भूतकाल में मेडिकल टूरिज्म कुटीर उद्योग जैसा था किन्तु वर्तमान में चिकित्सा , स्वास्थ्य लाभ पर्यटन ने अब संगठित रूप ले लिया है। वर्तमान में कई देशों मेडिकल टूरिज्म या चिकित्सा पर्यटन विकास मंत्रालय भी खोले गए हैं।
ट्रांसपेरेंसी मार्केट एजेंसी के अनुसार वैश्विक स्वास्थ्य पर्यटन का व्यापार 1916 में उस$ 46. 46 बिलियन या दस अरब डॉलर का था व सन 2025 तक स्वास्थ्य पर्यटन में 14 . 9 % की वृद्धि होगी व व्यापार US $ 160 . 8 बिलियन डॉलर तक पंहुच जायेगा ( एक बिलियन = 1000 x 1000000 =एक अरब ) .
पेसियंट्स बियोंड बॉर्डर्स के रपट अनुसार वर्तमान में 5 देश स्वास्थ्य पर्यटन हेतु अति प्रसिद्ध हैं -
मलेसिया
मलेसिया स्वास्थ्य पर्यटन का सरताज है और प्रतिवर्ष मलेसिया में 5 लाख विदेशी स्वास्थ्य लाभ हेतु पर्यटन करते हैं। मलेसिया के चिकित्सालय व समाज चिकित्सा पर्यटकों के मित्र माने जाते हैं। चिकित्सालयों में परिष्कृत उपकरणों व टेक्निकल स्टाफ के अतिरिक्त मलेसिया में चिकित्सा व्यय 20 % कम लागत भी है (विट्रो फर्टिलाइजेशन उदाहरण ) .
भारत
पेसियंट्स बियोंड बॉर्डर रपट अनुसार भारत में प्रति वर्ष 2 50 000 चिकित्सा पर्यटक प्रवेश करते हैं और इन पर्यटकों के चेहते शहर बंगलोर , चेन्नई , दिल्ली व मुंबई हैं। भारत के मुख्य ग्राहक पाकिस्तान , मैम्यार , बंगलादेश , मालदीव हैं। भारत कम लागत में चिकित्सा हेतु प्रसिद्ध हो रहा है और अमेरिकी , कनाडा अरब देशों , ब्रिटेन , अफ़्रीकी क्षेत्रों को भी आकर्षित कर रहा है। चेन्नई सबसे अधिक पर्यटक आकर्षित करता है (30 -40 %)चिकित्सा पर्यटन में भारत प्रगति कर रहा है।
भारत फर्टिलिटी , ऑर्थोपेडिक , ऑर्गन ट्रांसप्लांट , कार्डिक चिकित्सा हेतु अधिक पसंद किया जाता है।
भारत में निम्न चिकित्सा आकर्षित करने में सफल हैं -
कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट
कार्डियक ट्रीटमेंट
दंत चिकित्सा
कान , नाक व आँख
आँख चिकित्सा
पाचन तंत्र चिकित्सा
नस या तंत्रिका चिकित्सा /न्यूरोलॉजी
मेघविज्ञान चिकित्सा या किडनी संबंधी चिकित्सा
गुर्दा स्थानांतर /किडनी ट्रांसप्लांट
स्त्री रोग चिकित्सा
मूत्र रोग चिकित्सा
आध्यात्मिक चिकित्सा जैसे योग

टर्की
टर्की की विशेषता है कि यहां अमेरिकी डॉक्टर रोजगार करने को उत्साहित रहते हैं और उन्होंने इस सुंदर देश को चिकित्सा पर्यटन में प्रसिद्धि दिला दी है। तुर्की के मुख्य ग्राहक यूरोप व अमेरिका क्षेत्र के हैं व कार्डियक , कैंसर , ऑर्थोपेडिक चिकित्सा हेतु प्रसिद्ध स्थान माना जाता है। टर्की आँखों के शल्य क्रिया हेतु भी प्रसिद्ध है।
ब्राजील
पेसियेंट्स बियोंड अनुसार २ लाख विदेशी चिकित्सा हेतु ब्राजील जाते है। ब्राजिक कॉस्मेटिक सर्जरी हेतु प्रसिद्ध है। ब्राजील में कॉस्मेटिक सर्जरी व्यय संयुक्त राज्य अमेरिका से 30 -50 % कम है।
थाईलैंड
पेसियेंट्स बियोंड बॉर्डर्स अनुसार थाईलैंड के बैंकॉक शहर में बुमरुंगार्ड इंटरनेशनल प्रति वर्ष 12 लालख से अधिक रोगी चिकित्सा हेतु इस चिकित्सालय में भर्ती होते हैं और प्रतिदिन 1000 के लगभग विदेशी रोगियों की चिकित्सा होती है।

मेडिकल टूरिज्म के ग्राहकों के बारे में ममहत्वपुर्ण जानकारियां –
Same Facts about Medical Tourism

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उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) 98

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 98

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–200)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग -200

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

मेडिकल टूरिज्म असोसिएसन ने अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दीं हैं -

64 % रोगियों के पास हेल्थ इनसुएरेन्स नहीं होता
83 % ग्राहक अपने एक साथी के साथ रोग निदान हेतु पर्यटन करते हैं
33 % रोगी कॉस्मेटिक सर्जरी हेतु पर्यटन करते पाए गए हैं
90 % रोगियों के साथी अन्य पर्यटन कार्यों में समय व्यतीत करते हैं।
अधिकांश अमेरिकी मेडकल टूरिस्टों का मानना है बल उन्हें विदेशों में अमेरिका से अधिक व्यक्तिगत महत्व मिलता है
80 % रोगी विदेशों में कम लागत के कारण ही विदेशों में चिकित्सा करवाते हैं
कई रोगी उच्च तकनीक से सुसज्जित चिकित्सालयों के कारण ही विदेशों में चिकित्सा करवाते हैं -बगलादेश व पाकिस्तान व अफ़्रीकी नागरिक भारत में चिकित्सा पर्यटन उच्च तकनीक उपलब्धि के कारण ही पर्यटन करते है।
बहुत से विदेशियों का व्यय होटल व्यय व हॉस्पिटल व्यय में कोई विशेष अंतर् नहीं होता है।
रोग निदान के बाद जाते समय रोगी खूब खरीदी भी करते हैं

-वैकल्पिक चिकित्सा ही उत्तराखंड मेडिकल टूरिज्म हेतु विकल्प है

Complmentary and Alternative Therepies is the game for n Uttarakhand Medical Tourism

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उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति )

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) –

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

विद्यमान वैश्विक व्यापारिक काल में उत्तराखंड के सदूर गाँव के वैद्य से विश्व का कोई अन्य वैद्य प्रतियोगिता करता रहता है। उत्तराखंड के पारम्परिक पर्यटन -धार्मिक व पहाड़ पर्यटन को एक सहयोगी पर्यटन की शक्त आवश्यकता है और वह पर्यटन है – मेडिकल टूरिज्म।
मेडिकल टूरिज्म में ऐलोपैथिक टूरिज्म सर्वोत्तम टूरिज्म है किंतु दिल्ली व अन्य शहरों में वर्तमान विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ उत्तराखंड प्रतियोगिता नहीं कर सकता है। तो उत्तराखंड मेडिकल टूरिज्म विकास हेतु ‘वैकल्पिक चिकित्सा ही सर्वोत्तम विकल्प है।
कुछ वैकल्पिक चिकित्साओं का निम्न लिस्ट है -
आयुर्वेदिक चिकित्सा
योग चिकित्सा
प्राकृतिक चिकित्सा
मृदा चिकित्सा
हर्बल या पादप जैसे पत्ती चिकित्सा या हर्बल स्नान चिकित्सा , जैसे कंडाळी झपांग चिकित्सा
जल चिकित्सा
एक्यूप्रेसर चिकित्सा
अक्युपंचर चिकित्सा
तिब्बती /भोटिया चिकित्सा
ध्वनि या संगीत चिकित्सा
फल चिकित्सा
सिरोवस्ठी चिकित्सा
मुट्टु (जोड़ों के दर्द हेतु ) चिकित्सा
सर्वकम अभ्यंगम – तरोताजा चिकित्सा
आध्यात्मिक चिकित्सा जैसे विपासना , विज्ञानं भैरव आधारित चिकित्सा
खिलाड़ियों हेतु आध्यात्मिक चिकित्सा
अन्य कर्मकांड आधारित चिकित्साएं
उपरोक्त चिकित्साओं हेतु भी उत्तराखंड शासन व समाज को कई कार्य करने होंगे जिनकी चर्चा आगामी अध्याओं में की जायेगी

हिमाचल से प्रतियोगिता अवश्यम्भावी है
Uttarakhand has to Compete with Himachal

उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) -100

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 100

Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series– 202
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 202

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

धार्मिक पर्यटन छोड़ हर पर्यटन में हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड का प्रबल प्रतियोगी है , गैर धार्मिक पर्यटन में हिमाचल उत्तराखंड से आगे ही है। आम ग्राहकों के मन में भी हिमाचल की छवि अच्छी ही है।
सन 2005 में हिमाचल सरकार ने मेडिकल टूरिज्म विकास हेतु हिमाचल की ताकत व कमजोरियों का विश्लेषण इस प्रकार किया था। देखें ये ताकतें व कमजोरियां उत्तराखंड परिपेक्ष्य में क्या हैं
मेडिकल टूरिज्म में हिमाचल की ताकत
ताकत ———————————————————- उत्तराखंड संबंध में टिप्पणी
दुनिया में दुर्लभ 5 प्रकार की जलवायु ——————————- वही
राजनीतिक व सामाजिक स्थायित्व ————————————- वही
शांतिप्रिय व आतिथ्य पूर्ण राज्य ———————————— वही
प्रदूषण मुक्त ————————————————————— वही
दुर्लभ साहसिक , इकोटूरिज्म , आस्था , संस्कृति , हेरिटेज पर्यटन आदि प्रसिद्ध —- वही
ठीक ठाक शिक्षा ———————————————————— वही
धार्मिक टूरिज्म विशेष बौद्ध धर्मी ———————————————— हिन्दू धार्मिक पर्यटन
ठीक ठाक इंफ्रास्ट्रक्चर ——————————————————–वही , कुछ बेहतर
सेवों व अन्य फलों की प्रसिद्धि ————————————————— कुछ भी नहीं

कमजोरियां
हवाई यात्रा ———————————————————————— वही
कठिन जलवायु में पर्यटकों की परेशानी —————————————-वही
प्रशिक्षित गाइडों की कमी ——————————————————वही
कम विदेशी पर्यटकों आगमन ————————————————–वही उत्तराखंड हिमाचल से बहुत पीछे है
बहुत से स्थानों में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था न होना ————————वही
कमजोर मार्केटिंग विदेशों व देश में ——————————————-वही
कोई नया पर्यटक स्थल न आना ———————————————–टिहरी झील
लैंड एक्विजेशन समस्या ——————————————————– वही
वनों का निर्वनीकरण की समस्या ————————————————वही
समुचित फंड की कमी ————————————————————वही
याने कि हिमाचल हर बिंदु में उत्तराखंड जैसा ही है। ऐसे में उत्तराखंड की विशेष पग उठाने आवश्यक हैं।
ऐसा लगता है हिमाचल ने इस दिशा में कुछ कदम उठाने शुरू कर दिए हैं किन्तु मेडिकल टूरिज्म बाबत उत्तराखंड शासन नीति स्पष्ट नहीं है। भगवान भरोसे ही है शासन
हिमाचल में कृषि हिमाचल की ताकत हैं और पहाड़ी उत्तराखंड में कृषि उत्तराखंड की कमजोर। हिमाचल पलायन मार ऐसे नहीं झेल रहा है जैसे उत्तराखंड। उत्तराखंड में प्रवासियों के बाहर होने से मानवीय व बौद्धिक श्रमिक सबसे बड़ी समस्या है। यदि हिमाचल की ताकत वासी हैं तो उत्तराखंड ताकत प्रवासी .

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