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Jun
03

बेल वनीकरण

बेल वनीकरण

Cultivation of Wood Apple or Bel/Bael Tree

(केन्द्रीय व प्रांतीय वन अधिनियम व वन जन्तु रक्षा अधिनियम परिवर्तन के उपरान्त ही सार्थक, अन्यथा निरर्थक )
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सार्वजनिक औषधि पादप वनीकरण -

Community Medical Plant Forestation -

उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति )

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) –

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

लैटिन नाम -Aegle marmelos
पादप वर्णन
बेल तरह तरह की जलवायु मशान कर सकता है किन्तु जल भरे भूमि में नहीं उग सकता है। बेल 1200 मीटर ऊंचाई व गगरम जलवायु में होता है , पथरीली , बलुई मिटटी में भी उग जाता है। उत्तराखंड में दक्षिण में गंगा , हिंवल किनारे के जंगलों में बहुतायत में पाया जाता है बेल के लिए मध्य शीत व खूब ग्रीष्म जलवायु सही जलवायु है।
बेल दो तरह का होता है छोटा फल वाला व बड़े फल वाला बेल
औषधि उपयोग
बेल ऊर्जा वृद्धकारक है बेल बहुत सी बीमारियों में औषधि के रूप में प्रयोग होता है
बेल अपच, मरोड़ आदि की औषधि में प्रयोग होता है।
बेल शर्रेर के शक़्कर को नियंत्रित करता है
यकृत की कई कमजोरियों को दूर करता है
गर्भवती स्त्रियों हेतु लाभकारी है
बेल बालों व त्वचा हेतु लाभकारी है
बेल रक्तचाप हेतु लाभदायी ही
बेल पत्तियां जोड़ो के दर्द , अलसर , व पीलिये निबटान , कृमि नाशक हेतु प्रयोग होता है
बेल फूल , जड़े व छा ल भी औषधि में प्रयोग होता है। तने से गोंड प्राप्त होता है।
शिव लिंग पर बेल पत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है ऋग्वेद में बेल को लक्ष्मी स्थान माना गया है

भूमि
बलुई याने मकई वाली मिट्टी , तूंग वन वाली मिट्टी , पथरीली भी चल सकती है , व कम चिकनी मिट्टी गड्ढों में बीज बोना ही सही माना जाता है। गड्ढों की दूरी कम से कम 8 मीटर सही दूरी है , बेल जलभरान भूमि में नहीं उग सकता है। गड्ढों में ऊपरी कृषि मिट्टी डाली जाती है व गोबर खाद ही सही खाद है , बेल को रोपण द्वारा या जड़ काटने से भी उगाया जा सकता हैं किन्तु रोपित वृक्षों से फल बहुत बड़े अंतराल की बाद 15 वेश में आते हैं
जलवायु
मानसून , मध्य शीत व ग्रीष्म ऋतुएँ आवश्यक हैं
फल तोड़ने का समय
अधिकतर फल जनवरी या फरवरी तक पक जाते हैं जब फल पीले हो जाय तो तोड़ लेने चाहिए . एक पेड़ से 800 फल भी आ जाते हैं किन्तु सामन्यतया 400 फल लग ही जाते हैं
बीज बोन का समय
पके फलों से बीज निकालकर छाया में सुखाया जाता है। बीज बोन का जुलाई अगस्त या फरवरी मार्च सही समय है। पहाड़ों में जुलाई व अगस्त ही सही समय है। सिंचाई की आवश्यकता ग्रीष्म में पड़ती है।

Copyright @ Bhishma Kukreti 3/6 //2018

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