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Jun
13

Nagkesar Cultivation

नागकेसर वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

Indian Rose Chestnut Plantation for Medical Tourism in Uttarakhand
(केन्द्रीय व प्रांतीय वन अधिनियम व वन जन्तु रक्षा अधिनियम परिवर्तन के उपरान्त ही सार्थक )
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सार्वजनिक औषधि पादप वनीकरण -16

Community Medical Plant Forestation -16

उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) -118

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 118

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–221)
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 221

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

लैटिन नाम -Mesua ferrea
संस्कृत -नागकेशर , नागपुष्प
पादप वर्णन
वृक्ष उंचाई मीटर- 30 -31
तना गोलाई सेंटीमीटर -90 तक
समुद्र तल से भूमि उंचाई मीटर – 1100 -1700
पत्तिययाँ फूल व फल – शुरुवात में पत्तियां लाल , ऊपरी पत्तियां गहरी हरी व नीचे नीला -मटमैला रंग
फल तिकोने अंडाकार जैसे

औषधि उपयोग

नागकेसर के अंग उपयोगिता – पुंकेसर , फल , बीज , फूल , कलियाँ , पत्तियां , छाल उपयोगी
वमन रोकने हेतु व अन्य पेट पीड़ाओं में
ज्वर ,सरदर्द में

यकृत व तिल्ली की बीमारी में
स्वास व पाचन संबंधी बीमारियों में ,मुख का दुर्गंध हटाता है
कई औषधियों का घटक जैसे चवनप्रास
मूत्र रोग में
प्यास कम करता है
सुगंधित तेल

जलवायु आवश्यकता
भूमि – बलुई व स्पंजी , अम्लयुक्त भूमि नागकेसर हेतु हानिकारक , क्षारयुक्त /अल्कलाइन भूमि भी हानिकारक
धूप – सीधी , 7 घंटे
फूल आने का समय – मार्च जून
फल तोड़ने का समय -अक्टूबर नवंबर

नए नए बीजों से सीधी बुआई भी की जाती हैं
यदि फल पके हों तो बीजों को 24 घंटे तक ठंडे पानी में भिगोये जाते हैं . नागकेशर के बीज जमने का प्रतिशत अधिकतर 100 % होता है।
एक हेक्टेयर में 400 पेड़ लग सकते हैं
जड़ या तने की कलम से भी पेड़ लगाए जाते हैं जो 12 साल में फूल दने लगते हैं
रोपण का समय – एक साल पुरानी डमडमी कली 40 -45 सेंटीमीटर ऊँची कली उपरान्त व शीत ऋतू की वारिश सही समय
खाद आवश्यकता – प्रारम्भिक काल , गोबर सही खाद
सिंचाई आवश्यकता – प्रारम्भ में फिर सामन्य
ओस व सूखे सहने की सहनशीलता पेड़ में है

कीड़ों , जीवाणुओं से बचाव आवश्यकहै इसलिए कृपया विशेज्ञों की राय लें
विशेषज्ञों की राय आवश्यक है

आईये राजनीतिज्ञों , अधिकारियों पर वन अधिनियम परिवर्तन हेतु दबाब बनाएँ ! सर्वप्रथम बन्दर , सूअर व अदूरदर्शिता भगाए जायं !
Copyright @ Bhishma Kukreti /6 //2018
संदर्भ

1 -भीष्म कुकरेती, 2006 -2007 , उत्तरांचल में पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150 अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
2 – भीष्म कुकरेती , 2013 उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन , इंटरनेट श्रृंखला जारी
3 – रामनाथ वैद्य ,2016 वनौषधि -शतक , सर्व सेवा संघ बनारस
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