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Jun
14

मौलसिरी , बकुल वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

मौलसिरी , बकुल वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

Spanish Cheery , Bakula Plantation for Medical Tourism in Uttarakhand
(केन्द्रीय व प्रांतीय वन अधिनियम व वन जन्तु रक्षा अधिनियम परिवर्तन के उपरान्त ही सार्थक )
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सार्वजनिक औषधि पादप वनीकरण -17

Community Medical Plant Forestation -17

उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) 119

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 119

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–222
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 222

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

लैटिन नाम – Mimusops elengi
सामन्य नाम -बकुल या मौलसिरी
पादप वर्णन

वृक्ष उंचाई मीटर- सामन्य तः 12 -15 मीटर ऊँचा वृसदाबहार वृक्ष किन्तु 30 मीटर तक जा सकता है
तना गोलाई सेंटीमीटर -50 cm या कम
समुद्र तल से भूमि उंचाई – उष्ण कटबंधीय वृक्ष , 600 मीटर मैदानी इलाका , भाभर, तराई क्षेत्र में उगाने लायक अलग अलग प्रकार की मिट्टी में होसकता है , उत्तराखंड बायो डाइवर्सिटी बोर्ड मौलसरी वृक्ष रोपण का धार्मिक वृक्ष बागवानी लगाओ योजना अंतर्गत लोगों मध्य प्रचार भी करता है।
फूल व फल – साल भर आते रहते हैं , सफेद फूल सुबह शाम अच्छी सुगंधित हवा छोड़ते छोड़ते हैं , पीले चिकने अंडकार बीज आकर्षक लगते हैं। चमकदार काले अंडाकार बीज भी करहक होते हैं
आर्थिक उपयोग
धार्मिक उपयोगी व बगीचे में सुगंध हेतु लगाए जाते हैं। सूखे फूल गद्दों व तकियों में रुई के साथ भरे जाते हैं
इमरती , पुल निर्माण , कृषि उपकरण हेतु मजबूत लकड़ी
औषधि उपयोग
मैलसिरि वृक्ष के अंग उपयोगिता
छाल , फूल व फल -बीज
सरदर्द , नाकबंद , हेतु भाप थिरेपी
मुखवास , दांत , मसूढ़े तगड़े करने व गंध हटाने, गरारा करने हेतु छाल, पत्ती , बीजों से औषधि निर्माण
सर्दी जुकाम, बुखार उपचार हेतु औषधि
कीड़ों के काटने या जानवरों के काटने पर छाल , बीज से पेस्ट औषधि
नेत्र औषधि
अधिक मात्रा के उपयोग से हानि हो सकती है अतः चिकित्स्क की सलाह आवश्यक

जलवायु आवश्यकता
भूमि – भाभर की भूमि या कुछ ऊपर की भूमि

फल तोड़ने का समय – वर्ष भर
बीज बोन का समय – बीज निकालने के कुछ समय पश्चात बीज बोना श्रेयकर। भण्डारीकृत अच्छी फसल नहीं देते हैं। बीजों को 24 घंटे तक मंतत /वार्म पानी में भोगोया जाता है फिर तैयार छायादार क्यारियों में बो दिया जाते हैं। थायो यूरिया ट्रीटमेंट से बीज अंकुरण 77 % तक हो पाते हैं
अंकुरण 17 दिन या अधिक देर से आते हैं।
रोपण का समय – अंकुरण के एक माह पश्चात पॉलीथिन बैग में लगाए जाते हैं और जब पौधा एक सवा साल में डमडमा हो जाय तो गड्ढों में लगाए जाते। हैं
सीधे भिगोये बीज भी बोये जा सकते हैं किन्तु अंकुरण प्रतिशत कम – दक्षिण उत्तराखंड में नयार घाटी , या गदन किनारे जहां ऊंचाई 2000 फ़ीट से कम हो, गरम जलवायु हो वहां भी लग सकते हैं
खाद आवश्यकता -प्रारम्भिक काल
सिंचाई आवश्यकता -प्रारम्भिक काल
जड़ कलम या अन्य कलम से भी वृष लगाए जाते हैं।
कीड़ों , जीवाणुओं से बचाव आवश्यकहै इसलिए कृपया विशेज्ञों की राय लें
विशेषज्ञों की राय आवश्यक है

आईये राजनीतिज्ञों , अधिकारियों पर वन अधिनियम परिवर्तन हेतु दबाब बनाएँ ! सर्वप्रथम बन्दर , सूअर व अदूरदर्शिता भगाए जायं !
Copyright @ Bhishma Kukreti /6 //2018
संदर्भ

1 -भीष्म कुकरेती, 2006 -2007 , उत्तरांचल में पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150 अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
2 – भीष्म कुकरेती , 2013 उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन , इंटरनेट श्रृंखला जारी
3 – रामनाथ वैद्य ,2016 वनौषधि -शतक , सर्व सेवा संघ बनारस
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