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Jun
15

तेजपत्ता वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

तेजपत्ता वृक्ष बनीकरण से मेडिकल टूरिज्म विकास

Indian bay leaf tree Plantation for Medical Tourism in Uttarakhand
(केन्द्रीय व प्रांतीय वन अधिनियम व वन जन्तु रक्षा अधिनियम परिवर्तन के उपरान्त ही सार्थक )
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सार्वजनिक औषधि पादप वनीकरण -18

Community Medical Plant Forestation -18

उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन ( रणनीति ) 120

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Medical Tourism Development in Uttarakhand ( Strategies ) – 120

(Tourism and Hospitality Marketing Management in Garhwal, Kumaon and Haridwar series–223
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग -223

लेखक : भीष्म कुकरेती (विपणन व बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

लैटिन नाम Cinamomum tamala ,
Indian Bay Leaf Tree
तेजपत्ता
उतकट , ताम्ल पत्र

पादप वर्णन
सदाबहार , 100 वर्ष तक जीने वाला वृक्ष
क्षेत्र – हिमालयी उष्ण कट बन्धीय क्षेत्र
समुद्र तल से भूमि ऊंचाई – 300 -2400 मीटर तक
वृक्ष उंचाई मीटर-8 मीटर
तना गोलाई सेंटीमीटर -150
अन्य भाग

फूल व फल

आर्थिक उपयोग
भू संरक्षण -कामयाब वृक्ष , छाया
गरम मसाले , तेल कई मसालों, मिठाईयों , चॉकलेट व औषधि उद्यमों में

औषधि में अंग उपयोगिता
छाल
पत्ती
तेल
औषधि उपयोग
टूथ पौडर . मुखवास , दांत दर्द
कफ स्वास रोधक
यूटेरस बीमारियों में
सूजन या हड्डी /मासंपेशियों के दर्द में छल गुदगी प्रयोग
ट्यूबरकुलसिस में
स्थूलता कम करने हेतु
अंजन या सुगंधित द्रव मिठाई व अन्य भोज्य पदार्थों में प्रयोग
कृमि नाशक
प्रसूति स्राव रोकथाम , एनीमिया में
यकृत व तिल्ली में मूत्रवर्धक उपयोग
नेत्र जलन , स्राव रोकथाम में उपयोग
कई फुंदी जनित रोगों में

जलवायु आवश्यकता
भूमि – बांज बुरांस भूमि व जलवायु उपयुक्त अर्थात उत्तरमुखी जंगलों में उपयुक्त . 27 अंश सेल्सियस तापमान सही याने उष्ण व वास्प आवश्यक। जैविक खाद व भूमि के गुण तेजपत्ता के गुणों को प्रभावित करता है। जमीन दलदली नहीं होनी चाहिए
पत्ते तोड़ने का समय -अक्टूबर -नवंबर
छाल निकालने का समय नवंबर -जनवरी
फूल आने का समय – मई
फल आने /पकने का समय – जून जुलाई
फल तोड़ने का समय -जून -अगस्त
बीज बोन का समय – मानसून , बीजों को फल से तोड़ कर तुरंत बलुई मिट्टी की तैयार क्यारियों में बोया जाता है
मिट्टी – बांज बुरास वाली
रोपण का समय – बीज बोन के 10 – 15 दिन बाद या कुछ अधिक , वृक्ष रोपाई में कम से कम 2 मीटर अंतर्
सीधी बुवाई या पेड़ों से बीज गिरने से अंकुरण का प्रतिशत 10 %
जंगलों से कलियाँ एकत्रित कर भी रोपण किया जाता हैं
कलम व एयर लेयरिंग पद्धति से भी रोपण किया जा सकता है

खाद आवश्यकता -प्रारंभिक आवश्यक -सितंबर व मार्च
सिंचाई आवश्यकता – आवश्यक
वयस्कता समय- पत्ते 8 -9 साल में

कीड़ों , जीवाणुओं से बचाव आवश्यकहै इसलिए कृपया विशेज्ञों की राय लें
विशेषज्ञों की राय आवश्यक है

आईये राजनीतिज्ञों , अधिकारियों पर वन अधिनियम परिवर्तन हेतु दबाब बनाएँ ! सर्वप्रथम बन्दर , सूअर व अदूरदर्शिता भगाए जायं !
Copyright @ Bhishma Kukreti 15 /6 //2018
संदर्भ

1 -भीष्म कुकरेती, 2006 -2007 , उत्तरांचल में पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150 अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
2 – भीष्म कुकरेती , 2013 उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन , इंटरनेट श्रृंखला जारी
3 – रामनाथ वैद्य ,2016 वनौषधि -शतक , सर्व सेवा संघ बनारस
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