«

»

Jul
07

करंज वृक्ष वनीकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास

करंज वृक्ष वनीकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास

Pongam Tree Plantation for Medical Tourism Development

औषधि पादप वनीकरण -33
Medicinal Plant Community Forestation -33
उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति -135
Medical Tourism Development Strategies -135
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 239
Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -239

आलेख : भीष्म कुकरेती ( विपणन आचार्य )

लैटिन नाम -Pongima pinnata
संस्कृत /आयुर्वेद नाम -करंज
सामान्य नाम -करंज , करेंगी
आर्थिक उपयोग -
लकड़ी -हल , बैला गाड़ी आदि आदि
औद्योगिक तेल
बीज खली -खाद
चारा
छाल रेशे
आस पास मिटटी में अमोनिया वृद्धि ,
छाया
कटान रोकथाम

—–औषधि उपयोग —

रोग व पादप अंग जो औषधि में उपयोग होते हैं

जड़ें

पत्तियां
रस कीड़ों के काटने पर उपयोग
आँख आने में क्वाथ रस से चक्षु धोवन
छाल
क्वाथ से घाव धुलाई
फल
कफ व अन्य रोग मूत्र रोग , बबासीर

बीज
हल्दी के साथ त्वचा रोग निदान
अन्य दवाईयों जैसे त्रिफला सहयोगी अवयव
डाइबिटीज कम करने की संभावनाएं खोज आवश्यक
बाजार में उपलब्ध औषधि
विलवाड़ी गुलिका
करंजा तैल
मुरिवेणा

पादप वर्णन
समुद्र तल से भूमि ऊंचाई – 0 -1200 मीटर किन्तु हिमालय में 600 मीटर तक
तापमान -
वांछित जलवायु वर्णन -0 -32 और 50 डिग्री तक सहनशीलता
वांछित वर्षा mm- 500 -2500
वृक्ष ऊंचाई मीटर – 15 -20
तना गोलाई सेंटी मीटर -50 -60
छाल -सिलेटी मटमैला
टहनी – ऊपर छटा कार
पत्तियां – चिकनी , तल में गोल ऊपर अंडाकार
पत्तियां आकार , लम्बाई X चौड़ाई cm और विशेषता -
फूल आकार व विशेषता -घंटाकार गुच्छे में मटर परिवार जैसे
फूल रंग -
टांटी /फली /फल रंग -
फल आकार व विशेषता – टांटी
बीज /गुठली विशेषता, आकार , रंग – बीज १. ५ -२। ५ cm , बीज जमने से पहले बीज बाहर नहीं निकलते टांटी के सड़ने के बाद ही

टांटी /फल पकने का समय – फली के अंदर फरवरी से मई तक
बीज निकालने का समय – एक साल तक भंडार किया जा सकता है
बीज/गुठली कितने समय तक अंकुरण हेतु क्रियाशील हो सकते हैं – एक वर्ष

संक्षिप्त कृषिकरण विधि -
बांछित मिट्टी प्रकार pH आदि -सभी परक्कार की मिट्टी
वांछित तापमान विवरण – धुप पसंद
बीज बोन का समय – मानसून में टांटी को सड़ाकर बीज प्राप्ति कर बोया जाता है
नरसरी में बोते समय बीज अंतर – २. ५ cm – 5 cm
मिटटी में बीज कितने गहरे डालने चाहिए – cm गहराई – मटर
नरसरी में अंकुर रोपण अंतर- 2 से 5 x 2 से 5 मीटर , पेड़ से लाभ प्रभाव डालता है
बीज बोन के बाद सिचाई क्रम -जलवायु अनुसार
अंकुरण समय – देर से दिन , एक मीटर अंकुर की ऊंचाई हेतु 13 महीने लग जाते हैं
रोपण हेतु गड्ढे मीटर x x इसकी जड़े 18 मीटर तक अतः गड्ढे गहरे
रोपण बाद सिचाई – जलवायु अनुसार
नरसरी स्थान छायादार या धुपेली – धुपेली

क्या वनों में सीधे बीज या पके फल छिड़के जा सकते हैं ? टांटीयों को सड़ाकर बीजों को मिटटी में दबा जाय
वयस्कता समय वर्ष -5 /4

यह लेख औषधि पादप कृषिकरण /वनीकरण हेतु जागरण हेतु लिखा गया है अतः विशषज्ञों , कृषि विद्यालय व कृषि विभाग की राय अवश्य लें

कृपया इस लेख का प्रिंट आउट ग्राम प्रधान व पंचायत को अवश्य दें

Copyright@ Bhishma Kukreti , 2018 , kukretibhishma@gmail.com

Medical Tourism Development in Uttarakhand , Medical Tourism Development in Garhwal, Uttarakhand , Medical Tourism Development in Kumaon Uttarakhand ,
Medical Tourism Development in Haridwar , Uttarakhand , Medicinal Tree Plantation for Medical Tourism Development in Garhwal, Medicinal Tree Plantation for Medical Tourism Development in Kumaon; Medicinal Tree Plantation for Medical Tourism Development in Haridwar , Herbal Plant Plantation in Uttarakhand for Medical Tourism; Medicinal Plant cultivation in Uttarakhand for Medical Tourism, Developing Ayurveda Tourism Uttarakhand,

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.