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Aug
19

बेडू , अंजीर वनीकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास

बेडू , अंजीर वनीकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास

Himalayan Fig/Punjab Fig Tree Plantation for Medical Tourism Development

औषधि पादप वनीकरण – 40
Medicinal Plant Community Forestation -40

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति -142
Medical Tourism Development Strategies -142
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 246
Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -246

आलेख : विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

लैटिन नाम – Ficus plamta
संस्कृत /आयुर्वेद नाम -
सामान्य नाम – बेडू , अंजीर
आर्थिक उपयोग —
चारा
जलाने हेतु लकड़ी
बंजर धरती उपयोग
कृषि यंत्र निर्माण
कलियाँ व कच्चे फल भुज्जी /सब्जी
ड्राई फ्रूट्स /मिठाई उद्योग

—–औषधि उपयोग —

रोग व पादप अंग जो औषधि में उपयोग होते हैं

दूध

फूल

मुख्यतया फल

बीज
रोग जिनके निदान में पादप उपयोगी है
कब्ज
मस्से हटाने
अल्सर
ब्लैडर बिमारी
फेफड़ों के रोग
काँटों को मांस से भार करने में मददगार
फोड़े पकाने में दूध / latex उपयोग
डाईबिटिज
फंगल बीमारियों में उपयोग

बाजार में उपलब्ध औषधि

पादप वर्णन – ग्राम प्रेमी पेड़ जो जंगलों में नहीं गाँव या खेतों के पास उगता है , फ़ालतू बंजर धरती , अम्लीय , क्षारीय धरती प्रेमी
समुद्र तल से भूमि ऊंचाई मीटर – 500 -२००० तक
तापमान अंश सेल्सियस – पहाड़ी क्षेत्र
वांछित जलवायु वर्णन -मध्य हिमालय प्रेमी
वांछित वर्षा mm- सामन्य , सूखी जलवायु सहनशील
वृक्ष ऊंचाई मीटर – 6 -10
तना गोलाई मीटर – आधा मीटर , धरती अनुसार
छाल -सफेद से मटमैली
टहनी – बहुत जिन पर पत्तियां निकलती हैं
पत्तियां – गोल व कोनेदार

फूल आकार व विशेषता जिसे सामन्य जन फल कहते हैं वः वास्तव में फूल भंडार है
फल रंग – शुरू में हरे पककर बैननि
फल आकार व विशेषता – गल २. 5 cm डाईमीटर
बीज /गुठली विशेषता, आकार , रंग – फल के अंदर बिलकुल छोटे गोल उन्हें बोना कठिन होता है
फूल आने का समय – मार्च
फल पकने का समय – जुलाई -अगस्त
बीज निकालने का समय – जुलाई अगस्त
बीज/गुठली कितने समय तक अंकुरण हेतु क्रियाशील हो सकते हैं – वर्ष भर

संक्षिप्त कृषिकरण विधि -
बांछित मिट्टी प्रकार pH आदि – बलुई , फ़ालतू जमीन , अम्लीय , क्षारीय , रगड़ प्रेमी , धूप प्रेमी वा छाया से दूर
वांछित तापमान विवरण – सामन्य उत्तराखंड की पहाड़ियां
बीज बोन का समय – नरसरी में वसंत
नरसरी में बोते समय बीज अंतर – cm बीज बहुत छोटे होते हैं अतः नदियों व जल धारा में बहाकर वनीकरण किया जाता है। आजकल ड्रोन से भी बीज छिड़के जाते हैं
मिटटी में बीज कितने गहरे डालने चाहिए – 2 cm गहराई , बालू में बीज डालकर
नरसरी में अंकुर रोपण अंतर- लम्बाई के बाद एक साल बाद रोपण लायक
बीज बोन के बाद सिचाई क्रम – बहुत कम तीब्रता का फुहार डालकर

रोपण हेतु गड्ढे मीटर १/2 x १/२ x १/२
रोपण बाद सिचाई – दो साल तक
नरसरी स्थान छायादार या धुपेली -
क्या कलम से वृक्ष लग सकते हैं ? वयस्क तने व जड़ों से कलम से ही नए पौधे उगाने चाहिए
क्या वनों में सीधे बीज या पके फल छिड़के जा सकते हैं ? गोबर गोले बनाकर अधिक उत्पादक हो सकते हैं /अथवा कटे-पके फलों व बीजों को नदी या गदनों में बहा देना श्रेयकर
वयस्कता समय वर्ष – ५

यह लेख औषधि पादप कृषिकरण /वनीकरण हेतु जागरण हेतु लिखा गया है अतः विशषज्ञों , कृषि विद्यालय व कृषि विभाग की राय अवश्य लें

कृपया इस लेख का प्रिंट आउट ग्राम प्रधान व पंचायत को अवश्य दें

Copyright@ Bhishma Kukreti , 2018 , kukretibhishma@gmail.com

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