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Sep
06

सोनपाठा कृषिकरण/ वनीकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास

सोनपाठा कृषिकरण/ वनीकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास

Broken Bone Tree, Midnight Horror tree Plantation for Medical Tourism Development

औषधि पादप वनीकरण – 54
Medicinal Plant Community Forestation -54

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति -158
Medical Tourism Development Strategies -158
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 261
Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -261

आलेख : विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

लैटिन नाम – Oroxylum indicum
संस्कृत /आयुर्वेद नाम -श्योनाक
सामान्य नाम – सोनपाठा
आर्थिक उपयोग —
सब्जी व कई भोज्य पदार्थ अवयव

—–औषधि उपयोग —

रोग व पादप अंग जो औषधि में उपयोग होते हैं

जड़ें

पत्तियां

छाल

फूल

फल

बीज
रोग जिनके निदान में पादप उपयोगी है
अतिसार
आमवात
मूत्राशय शोथ
अपाचन
स्वास , कफ सर्दी जुकाम , सरदर्द
हड्डी दर्द
दस्त। पेचिस
मुख कैंसर आदि में संसार के कुछ भागों में प्रयोग
त्वचा
रक्तशोधक
बाम का अवयव

दशमूलारिष्ट व च्यवनप्राश में अवयव
बाजार में उपलब्ध औषधि

पादप वर्णन
यह जाती खतरे में है
समुद्र तल से भूमि ऊंचाई मीटर – हिमायी श्रेणियों की घाटी में , 500 -900 , भारत में सर्व्रत्र , गदन किनारे , धुपेली पसंद
तापमान अंश सेल्सियस – 20 -35
वांछित जलवायु वर्णन -पर्वततल घाटी
वांछित वर्षा mm- 850 -1300
वृक्ष ऊंचाई मीटर -9 -15 , कहीं कहीं 50 भी
तना गोलाई सेंटी मीटर – 40 से 50
छाल -मटमैला भूरा
टहनी -लम्बी
पत्तियां -लम्बे
पत्तियां आकार , लम्बाई X चौड़ाई cm और विशेषता – युगल एक मीटर
फूल आकार व विशेषता -
फूल रंग -सफेद -बैंगनी रात को चमगादड़ों को आकर्षित करने हेतु खिलते हैं
फल रंग -मटमैले टांटी या फली
फल आकार व विशेषता
टांटी तलवारनुमा
फूल आने का समय – जुलाई -अगस्त
फल पकने का समय – दिसंबर मार्च
बीज निकालने का समय -टांटी फटने से पहले
बीज/गुठली कितने समय तक अंकुरण हेतु क्रियाशील हो सकते हैं – एक साल

संक्षिप्त कृषिकरण विधि -
बांछित मिट्टी प्रकार pH आदि -तकरीबन सभी मिटटी
वांछित तापमान विवरण – धुपेला स्थान
बीज बोन का समय – मार्च और सिंचाई प्रबंधन सही
बीजों को मंतत पानी में 24 घंटे हेतु भिगोना आवश्यक
नरसरी में बोते समय बीज अंतर – पॉलीथिन बैग में अन्यथा जुताई हेतु गेंहू जैसे खेत त्यार करना होता है ,, गड्ढे 60 x 60 x 60 cm
मिटटी में बीज कितने गहरे डालने चाहिए – 6 cm गहराई व दूरी दो मीटर , रोपण हेतु दूरी दो मीटर
अंकुरण प्रतिशत 80 -90 , 18 -20 दिनों में अंकुरण आ जाते हैं , सिचाई सालभर में छह से आठ किन्तु ग्रीष्म में अधिक
क्या कलम से वृक्ष लग सकते हैं ? हाँ किन्तु बीज भी सही हैं
क्या वनों में सीधे बीज या पके फल छिड़के जा सकते हैं ? हाँ गोबर गोले बनाकर अधिक उत्पादक हो सकते हैं /अथवा कटे-पके फलों व बीजों को नदी या गदनों में बहा देना श्रेयकर
वयस्कता समय वर्ष – तीन साल में फूल आने लगते हैं पांच साल में बीज
कृषिकरण लाभकारी

यह लेख औषधि पादप कृषिकरण /वनीकरण हेतु जागरण हेतु लिखा गया है अतः विशषज्ञों , कृषि विद्यालय व कृषि विभाग की राय अवश्य लें

कृपया इस लेख का प्रिंट आउट ग्राम प्रधान व पंचायत को अवश्य दें

Copyright@ Bhishma Kukreti , 2018 , kukretibhishma@gmail.com

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