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Sep
09

बसिंगू , बस्यिंग , वासका कृषिकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास

बसिंगू , बस्यिंग , वासका कृषिकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास

Malabar Nut / Vasa Plantation for Medical Tourism Development

औषधि पादप वनीकरण -57
Medicinal Plant Community Forestation -57

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति -161
Medical Tourism development Strategies -161
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 264
Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -264

आलेख : विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

लैटिन नाम -Justica adhatoda
संस्कृत /आयुर्वेद नाम -अटरूस
सामान्य नाम – बस्यिंगू , बस्यिंग , वासका
आर्थिक उपयोग —
सब्जी
बाड़
लकड़ी

—–औषधि उपयोग —

रोग व पादप अंग जो औषधि में उपयोग होते हैं

जड़ें

पत्तियां

छाल

फूल

फल

बीज
रोग जिनके निदान में पादप उपयोगी है
स्वास
कफ
बुखार
फेफड़ों सफाई
यक्ष्मा /टीबी
जोड़ों का दर्द
पेट दर्द मरोड़ , आँतों , पेट की मांशपेशी खिंचाव दोष निवारक
रक्त शोधन
गाल ब्लैडर , यकृत का बैलिंसिंग
मिर्गी (देखें डा आरडी गौड़ के लेख )
डाइबिटीज

बाजार में उपलब्ध औषधि

पादप वर्णन

समुद्र तल से भूमि ऊंचाई मीटर -हिमालयी तलहटी स्थानों में अधिकतर घाटियों , गाड , गदनों में , १३०० मीटर तक
तापमान अंश सेल्सियस – 20 से 27 तक दिन का तापमान
वांछित जलवायु वर्णन -धुपेली जलवायु पसंद , नमी भी आवश्यक यद्यपि घाटियों में होता है
वांछित वर्षा mm- ७०० से १७००
वृक्ष ऊंचाई मीटर – एक से ढाई कभी कभी ६
तना गोलाई म – ढाई से तीन सेंटीमीटर
छाल -भूरी
टहनी – जड़ से पांच छह शाखाएं फूटती हैं और टहनियों से भरपूर
पत्तियां -
पत्तियां आकार , लम्बाई X चौड़ाई cm और विशेषता – १० से १५ सेंटी मीटर लम्बी
फूल आकार व विशेषता -गुच्छों में
फूल रंग -सफेद गुच्छों में
फल आकार व विशेषता – कड़क कडुआ
बीज /गुठली विशेषता, आकार , रंग -
फूल आने का समय – शीत अंत व वसंत व ग्रीष्म मार्च
फल पकने का समय – गर्मियों में फूलों के ऊपर काँटा व फल ट्यूबनुमा
बीज निकालने का समय – मानसून

संक्षिप्त कृषिकरण विधि -
बांछित मिट्टी प्रकार pH आदि – ६. ५ से ७ . ५ तक किन्तु ५ .७ सहन कर सकता है , बलुई , पथरीली पसंद

बीज बोन का समय – मानसून

क्या वनों में सीधे बीज या पके फल छिड़के जा सकते हैं ? हाँ गोबर गोले बनाकर अधिक उत्पादक हो सकते हैं /अथवा कटे-पके फलों व बीजों को नदी या गदनों में बहा देना श्रेयकर
वयस्कता समय वर्ष -

यह लेख औषधि पादप कृषिकरण /वनीकरण हेतु जागरण हेतु लिखा गया है अतः विशषज्ञों , कृषि विद्यालय व कृषि विभाग की राय अवश्य लें

कृपया इस लेख का प्रिंट आउट ग्राम प्रधान व पंचायत को अवश्य दें

Copyright@ Bhishma Kukreti , 2018 , kukretibhishma@gmail.com

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