«

»

Sep
22

मेडिकल टूरिज्म हेतु निवेशक सम्मेलन में योजना महत्व

मेडिकल टूरिज्म हेतु निवेशक सम्मेलन में योजना महत्व

(ठंठोली (ढांगू ) में वैद्यराज कण्डवाल की बसाहत में निवेश या तकनीक हेतु योजना महत्व का उदाहरण )

How to Organize Medical Tourism Investment Summit -A Guide
मेडिकल टूरिज्म हेतु निवेश सम्मेलन आवश्यकता – 5
Investment for Investment Medical Tourism Development -5
उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 168
Medical Tourism development Strategies -168
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 271
Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -271

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

मेडिकल टूरिज्म , टूरिज्म या उद्यम विकास हेतु कोई भी निवेशक सम्मेलन हो सम्मेलन सफलता सही योजना , योजना को कार्यबनित करने की सही रणनीति व कार्य पर निर्भर करती है।
मेडिकल टूरिज्म निवेशक सम्मेलन उर्याने हेतु भी योजना की परम आवश्यकता होती है। मेडिकल टूरिज्म निवेशक सम्मेलन छोटा हो या बड़ा पारदर्शी योजना आवश्यक है। सटीक योजना निवेशक सम्मेलन की आधारशिला है। योजना बनांने हेतु पांच क की आवश्यकता होती है – क्या , कहाँ , कब , कौन और कितना
उद्देश्य निश्च्तिकरण
मेडिकल टूरिज्म हेतु प्रोडक्ट की आवश्यकता जैसे -
ऐलोपैथी चिकित्सालय , आयुर्वेदिक चिकित्सालय , योग सेंटर्स ,नेचरोपैथी सेंटर्स , वेलनेस सेंटर्स होटल्स , गेस्ट हाउसेज , व इन प्रोडक्टों की सहायता हेतु ट्रेंड , कम परीक्षित श्रमिक व अन्य सेवाओं हेतु श्रमिक श्रमिक , परिहवन व्यवस्था हेतु विभिन्न प्रोडक्ट्स व श्रमिक , रोगियों व सहोदरों हेतु टूर स्पॉट्स आदि आदि
स्थान चिन्हांकन (कहाँ ) – उपरोक्त प्रोडक्ट्स व सेवायें किन किन स्थानों भूभागों में स्थापित होंगी – जैसे ऐलोपैथी चिकित्सालय – देहरादून , उधम सिंह नगर ; आयुर्वेद केंद्र – धार्मिक यात्रा लाइन , नेचरोपैथी कुमाऊं क्षेत्र , योग केंद्र – धार्मिक यात्रा पंक्ति क्षेत्र , फ्लोरीकल्चर – यात्रा लाइन क्षेत्र ;
समय (कब ) – सभी हेतु समयबद्ध योजना व प्रशासनिक व्यवस्था
धन आवश्यकता – उपरोक्त प्रोडक्टों को स्थापित करने व संचालित करने हेतु कितने धन की आवश्यकता होगी व वह धन कहाँ कहाँ से आ सकता है।
आंतरिक मानव आवश्यकता , बाह्य मानव शक्ति (कौन कौन) – इन योजनाओं को क्रियावनित हेतु संभावित कौन कौन निवेशक , उत्पादक , सेवा दायी व्यक्ति या संस्थान
इंवेस्टमें सम्मेलन हेतु स्थान व संचालन योजना
इन्वेस्टमेंट सम्मिट करने हेतु भी योजना आवश्यक हैं
१- इन्वेस्टमेंट सम्मिट हेतु एक थीम /उद्देश्य व इन्वेस्टरों को लाभ सुनिश्च्तिकरण
२- स्थान व दिन निश्चित करना
३- अपने संसथान में टीम बनाना -
प्लानिंग टीम
प्रशासनिक टीम – कैसे योजना को क्रियावनित किया जाएगा।
न्यूतेर भट्याने हेतु मार्केटिंग व जन सम्पर्क टीम या बाह्य विपणन व जन सम्पर्क टीम
प्रायोजक टीम
स्वयं सेवक टीम
४ इन्वेस्टमेंट सम्मिट हेतु बजट – निम्न कार्य हेतु बजट निर्धारण व धन आवश्यक होता है
स्थान /होटल
मेहमानों के ठहरने , भोजन , मनोरंजन हेतु
मेहमानों हेतु परिहवन बजट
भाषण करता व सलाहकारों की फीस
मार्केटिंग का व्यय
कई गतिविधियों हेतु बजट
उपरोक्त टीम के व्यय
५ – सम्मिट दिन निश्चतिकरण – कि संभावित मेहमान पंहुच सकें
६- होटल , भोजन , मनोरंजन , परिहवन व्यवस्था कौन कौन संस्थान करेंगे और उनके लिए बजट प्रवाधान व धन उपलब्धि व प्रशासनिक अड़चन दूर करना व लोच रखना (फ्लेक्जिबलिटी )
७ – आंतरिक स्पीकरों का निश्चतिकरण
७- विभिन विभागों के मध्य समन्वय व संवाद साधन की स्पस्ट नीति
८- अकस्मात काल में निर्णय लेने की स्पष्ट नीति
उपरोक्त विषयों को फिर कई उपभागों में विभाजित किया जाता है व प्रत्येक उप विभाग अपनी कार्यकी योजना बनाता है जिसे माइन्यूट प्लांनिंग कहा जाता है और इन योजनाओं में भी क्या , कहाँ , कब , कौन व कितना व्यय का पूरा ध्यान रखा जाता है। सबसे मुख्य कार्य एक विभाग का दुसरे विभाग में संवाद पंक्ति/कम्युनिकेशन लाइन का होना आवश्यक होता है।
यदि योजना सही हों व कार्य करता समर्पित हों, प्रेरित हों तो निवेशक सम्मेलन सफल होते हैं।

ठंठोली (ढांगू ) में वैद्यराज कण्डवाल की बसाहत व निवेशक योजना उदाहरण

हमें यह मन में घर कर लेना चाहिए बल जहां भी उपचारक होगा वह स्थान स्वयमेव मेडिक टूरिस्ट प्लेस बन जाता है। ठंठोली के कण्डवालों को ठंठोली बसना – भूतकाल में निवेशक योजना व मेडिकल हब निर्मित करने का सबसे सुंदर उदाहरण है
सन 1970 तक मल्ला ढांगू (गंगा सलाण , द्वारीखाल या ढांगू ब्लॉक पौड़ी गढ़वाल ) में ठंठोली गाँव आयुर्वेद चिकत्सा हेतु एक महत्वपूर्ण गाँव था या मेडिकल टूरिस्ट प्लेस था . किन्तु रिकॉर्ड अनुसार ठंठोली का गोर्खाली शासन में कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है जो कि लोक कथ्यों से भी प्रमाणित होता है बल ठंठोली गाँव की स्थापना गोर्खाली शासन के पश्चात ही हुयी।
ढांगू में अंग्रेज शासन व ततपश्चात भी ढांगू निवासी चिकत्सा हेतु ठंठोली के कंडवालों , वरगडी -नौड के ब्लूनियों , गडमोला के बड़थ्वालों, झैड़ के मैठाणियों , कठूड के कुछ कुकरेती परिवार , गैंड के गौड़ों पर निर्भर था। बलूनी , मैठाणी , कंडवाल ढांगू के मूल निवासी नहीं थे व बड़थ्वाल ढांगू में चौदहवीं सदी से बस रहे थे। किन्तु लगता है बड़थ्वाल लोग चिकत्सा में 1890 बाद ही आये।
कण्डवाल जाति की परम्परा
मूल रूप से कंडवाल या तो कांड , कांडाखाल (डबराल स्यूं ) या किमसार (उदयपुर ) क्षेत्र के हैं . कण्डवालों की एक विश्ष्ट विशेषता है कि पारम्परिक रूप से कंडवाल पंडिताई भी करते थे और वैद्य भी होते थे ।

ढांगू में कण्डवालों की क्यों आवश्यकता पड़ी ?

यह निर्विवादित है बल मल्ला ढांगू पर चौदहवीं सदी से लेकर ग्वील गाँव बसने तक जसपुर का कब्जा था और मल्ला ढांगू के हर कोने पर कुकरेतियों का कब्जा था (मालिकाना हक ) । (कठूड , मळ , गटकोट दृष्टान्त हैं ) . उन्नीसवीं सदी में १९३ ५ -५० के लगभग जसपुर वालों ने एक ? या दो कंडवाल भाइयों को ठंठोली में बसाया क्योंकि जसपुर व अब ग्वील भी के कुकरेती पंडिताई , तान्त्र मंत्र के कर्मकांड नहीं करते जब कि बाकी सब स्थानों में कुकरेती पंडिताई , तंत्र मंत्र , कर्मकांड व वैदकी कार्य भी करते हैं।
मेरे चचेरे चाचा जी स्व मोहन लाल कुकरेती व बडेरी दादी जी स्व क्वाँरा देवी ने मुझे कथा सुनाई थी कि किस तरह जसपुर वालों ने कण्डवालों को मिन्नत कर ठंठोली में बसाया था और उन्हें अपनी बहिन ब्याही थी । एक पंक्ति का यह लोक कथ्य है किन्तु मेडिकल सुविधा जुटाने का बहुत ही उम्दा उदाहरण है जो आज भी मेडिकल सुविधा प्रबंध में अति प्रासंगिक उदाहरण है।
चूँकि उस समय जसपुर याने मल्ला ढांगू में चिकत्स्क नहीं थे तो यह आवश्यक हो गया बल जसपुर क्षेत्र में किसी पारम्परिक वैद्य परिवार को बसाया जाय। जसपुर वालों की रिस्तेदारी डबराल स्यूं के डबरालों से चौदहवीं सदी से ही थी किन्तु पारम्परिक रूप से डबराल जाति पंडिताई हेतु प्रसिद्ध थी किन्तु वैदकी में नगण्य ही थे। किमसार (उदयपुर पट्टी ) जसपुर से 49 -50 किलोमीटर दूर है किन्तु जसपुर बड़ेथ वालों के किमसार से वैवाहिक संबंध सदियों से थे। मेरी बूड दादी ग्रेट ग्रैंड मदर किमसार की कंडवाल थी जिनकी शादी मेरे बूड दादा जी से संभवतः 1860 -70 में हुयी थी। किमसार से जब वैवाहिक संबंध थे तो जसपुर के सयाणो ने योजना बनाई कि कंडवाल वैद्य को ठंठोली में बसाया जाय।
फिर जसपुर के सयाणो (नेतृत्व वर्ग ) ने वैद्य की आवश्यकता पहचानने के बाद ठंठोली गाँव चुना जहां कण्डवालों या अन्य वैद्य को बसाया जा सकता था। ठंठोली जसपुर से मात्र चार पांच किलोमीटर पर धार याने बसने लायक स्थान था जहां उस समय के अनुसार पानी प्रचुर मात्रा में था व बड़ा गदन भी था। वैद्य या डाक्टर बसाने हेतु सही स्थान जहां पंहुचना सरल हो आवश्यक हो ठंठोली बिलकुल सही स्थान था। ठंठोली में कौन जमीन मुहिया कराएगा किसका भाग जाएगा व उसे क्या कम्पेन्सेशन दिया जाएगा सभी पर विचार विमर्श हुआ ही होगा (आंतरिक निवेशक सम्मेलन ) फिर जसपुर के सयाणा किमसार गए वहां भी कई निवेशक सम्मेलन हुये होंगे जिसमे वैद्य हेतु जमीन व शादी के लाभ (इंवेस्टमेंट इन्सेन्टिव्ज व रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ) भी किमसार के कंडवाल नेतृत्व को बताया होगा व कई तरह से प्रेरित किया होगा। हाथ पात भी जोड़े गए होंगे।
तब जाकर कंडवाल वैद्य को ठंठोली बसाया गया। दादी जी का कहना था बल वैद्यराज को शिल्पकार परिवार भी प्रदान किया गया था। संभवतया यह परिवार लोहार वृति के थे क्योंकि ठंठोली में टम्टा आदि जाती नहीं थीं। शिल्पकार मुहिया कराने का अर्थ है बल परीक्षित श्रमिक की उपलब्धि करवाना। श्री चक्रधर कंडवाल अनुसार ठंठोली में प्रथम पुरुष श्री धर्मा नंद जी थे जिनकी शादी री से हई थी। किन्तु लोक कथ्य अनुसार कण्डवालों को जसपुर कुकरेती ने बहिन ब्याही थी। इसका अर्थ निकलता है बल कम से कम दो कंडवाल वैद्य ठंठोली में बसाये गए थे।
यदि हम उपरोक्त कथ्य पर ध्यान देंगे तो पाएंगे बल कंडवाल वैद्य को ठंठोली में बसाने हेतु जसपुर वालों ने वही प्रक्रिया अपनायी जो किसी वाह्य संस्थान को मेडकल सेंटर खोलने हेतु प्रेरित किया जाता है।
जसपुर वालों द्वारा कंडवाल वैद्य बसाने में निम्न प्रक्रियाएं अवश्य हुईं -
१- आवश्यकता पहचानना – जसपुर क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा न होना
२- उद्देश्य निश्चित करना – जसपुर क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना
३- संभावित निवेशक की पहचान – किमसार के कंडवाल
४- आंतरिक मीटिंगें
५- चिकत्सा सुविधा केंद्र हेतु स्थान चयन – ठंठोली
६- आंतरिक निवेश – ठंठोली में किसी भाई की जमीन मुहैया कराना
७- निवेशकों हेतु इंसेंटिव व लाभ दिखलाना – ठंठोली गाँव में बगैर सिरानी या बगैर खैकरी का कब्जा , मकान व्यवस्था , शादी , शिल्पकार व्यवस्था
८- जनसम्पर्क व मार्केटिंग – जसपुर वालों का किमसार में अपने सगे संबंधियों तक मंतव्य पंहुचाना , सगे संबंधियों से सहायता लेना
९- निवेशक सम्मेलन – जसपुर वालों का किमसार में कई बैठकें करना (यहाँ पर वेन्यू आपनी जगह नहीं दुसरे स्थल पर जैसे भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा विदेशों में CEO s से मिलना ) व बाद में किमसार वालों का जसपुर आना व ठंठोली का आकलन
१० – रिकॉर्ड में दाखिल खारिज प्रक्रिया पूरी करना आदि आदि

*** लोक कथ्य – स्व श्री मोहन लाल कुकरेती व स्व श्रीमती क्वाँरा देवी उर्फ़ कूकरी देवी लखेड़ा कुकरेती के साथ वार्ता पर आधारित है अतः यह उनका दृष्टिकोण था।

Copyright@ Bhishma Kukreti , 2018

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.