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Nov
03

खमण गांवम एक लखेड़ा मौक कूड़ पश्चिमोत्तर किलै च ?

खमण गांवम एक मौक कूड़ पश्चिमोत्तर किलै च ?

सलाणी लोककथा बटोळदेर – भीष्म कुकरेती

कथा सुणान्देर : श्री शिव चरण कुकरेती (कठूड़ ) व श्री सोहन लाल जखमोला (जसपुर मल्ला ढांगू , पौड़ी गढ़वाल )

दक्षिण गढ़वाल या कखि बि जु गांव तपड़ा या धारम ह्वावो त अधिकतर कूड़ दक्षिणोत्तर हूंदन या कबि कबि अपवादम पूर्वोत्तर कूड़ ह्वे सकद। हां जु गाँव पश्चिम मुखां पख्यड़ म ह्वावन त नियम धियम सब बंद ह्वे जांदन। धार मंगक गांवम पश्चिमोत्तर मुखी कूड़ भौत ही कम मिल्दन। सामान्यतया , जख दक्षिणोत्तर कूड़ ह्वावन वै गांवम पश्चिमोत्तर कूड़ भल नि मने जांद। दक्षिणोत्तर या उत्तर मुखी गांवुंम उत्तरमुखी कूड़ असलम जलवायु याने सुबेर से श्याम क धूप मिल्दो रावो सिद्धांतौ कारण हूंदन।
खमण (डबरालस्यूं , पौड़ी गढ़वाल ) गांव मंडुळ नगदन मथि उत्तरम व हिंवल नदी मथि पूर्वम धार म बस्युं च। तैल गाँव खमणम भौगोलिक स्थिति इन च बल अधिकतर कूड़ दक्षिणोत्तर छन कुछ पूर्वोत्तर कूड़ छन (जगा कमी कारण ) ।पर एक खमणम एक लखेड़ा मौक एक कूड़ पश्चिमोत्तर च। अर यु कूड़ जगा कमी कारण पश्चिमोत्तर नी अपितु कुछ हैंक वजै से पच्छिमोत्तर च।
लोक कथा अनुसार खमण डबराळुं गाँव छौ जु दूण दैज म डबराळुंन ग्वीलक कुकरेत्यूं तैं दे दे छौ। संख्या दृष्टि से इन बुले सक्यांद बल खमण कुकरेत्यूं गां च , पर इख एक द्वी जातिक कुछ हौर जाति मवस बि छन। यी प्रवासी अघिकतर समिण रिख्यड (उदयपुर पट्टी , पौड़ी गढ़वाल ) से खमण बसीं छन। रिख्यड अर खमण बीच हिंवल नदी च अर खमण रिख्यड क पूर्व म च।
तो एक लखेड़ा मौक पश्चिमोत्तर कूड़ च जु तैल गांवक हिसाब से अजीब इ बुले जालो। ए कूड़ो पश्चिमोत्तर हूण पर मल्ला ढांगू म कथा इन चलदी बल -
बल भौत पुरण समौ बात च बल रिख्यडम एक लखेड़ा युवा तै खमण बसनण आवश्यक ह्वे गे (अधिकित्र घरजवैं बात हूंदी ) पर वे युवा की ब्वे तैयार नि छे। एक तो छुट लौड़ से बिंडी प्रेम अर फिर डौर बि बल कुज्याण ब्वारी लौड़ै हिफाजत करदी बि च कि ना। अबक सि ब्वे थुड़ा छे तब तब क्वा ब्वे चांदि छे लौड़ निर्वासित ह्वे जावो। खैर जब युवा तै खमण बसण जरूरी ही ह्वे गे तो युवा लखेड़ा की ब्वन शर्त धर दे बल ” त ठीक च पर त्यार कूड़ इन हूण चयेंद जु मि त्यार रुसड़म हर समौ आग देख सौकुं , उज्यळ देख सौकूं। अर त्यार रुसड़ हर समय खुलु हूण चयेंद। ” सब्युंन बुडड़ी शर्त मानी अर युवा लखेड़ा कुण
खमणम ठेठ पश्चिम म कूड़ चीण अर रुसड़क मुक रिख्यड जिना कार। अब बुडड़ी रोज रुसड़ जिना सुबेर बिटेन रात तक तक लगैक दिखणि रौंदी छे। कबि दिन म धुंवा नि दिख्यावो या रात उज्यळ नि दिखे त बुडड़ी धै लगान्दी छे बल क्या ह्वाइ।
त या च सामन्य धरड़ौ गां मा दक्षिणोत्तर कूड़ो कथा।
(नोट – या कथा मल्ला ढांगू वळुंन सुणाइ। जु कुछ हौर सूचना हो तो कथा म सुधार बि ह्वे जाल )

Interpretation Copyright@ Bhishma Kukreti 2018
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