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Nov
06

जसपुर , ग्वील , ढांगळ अर ख्याड़ाक् कुकरेती बग्वाळ किलै नि मनांदन

जसपुर , ग्वील , ढांगळ अर ख्याड़ाक् कुकरेती बग्वाळ किलै नि मनांदन

सलाणी लोककथौं जणगरु : भीष्म कुकरेती

कथा सुणाण वळि : स्व.कुकरी देवी कुकरेती पत्नी स्व . शीशराम कुकरेती , जसपुर

सामन्य तौर पर गढ़वाळम दिवाळी असलम गौपूजा त्यौहार च। गौपूजा ही लक्ष्मी पूजा च गढ़वाळम। गढ़वाळम दिवाळी मतबल चौदसी अर औँसी कुण सन्नी , छन्नी , गौशालाम गोरुं तैं फूल लग्यां पींड खलाण, पींडु मने झंग्वर , भात , बाड़ी क छुट छुट गोळीं म फूल अर धनतेरस , बग्वाळ अर दिवाळी रात द्यु जगाण। द्वी दिन स्वाळ पक्वड़ , भूड़ा बि बणदन अर वीं मौक इक बि बंटदन जौंक दिवाळी नि हो वे साल। जौंक दिवाळी हूंद वु बरजाति मौका गोरुं तै पींड बि खलांदन। अब त पटाखा बि ऐ गेन। गढ़वाळम बग्वाळ अर औँसी दिवाळी महत्वपूर्ण हूंद। हौर गांवक कुकरेती बि बग्वाळ अर औंसी दिवाळी इनि मनांदन जन आम गढ़वळि मनांदन पर जसपुर , ग्वील (मल्ला ढांगू ); ढांगळ अर ख्याड़ा (उदयपुर ) का कुकरेती बग्वाळ नि मनांदन। यी कुकरेती अर जसपूरक जखमोला औंसी दिन गोरुं तै पींड सन्निम ही खलांदन पर बग्वाळि दिन ना त पींड खलांदन ना ही स्वाळ पक्वड़ बणांदन। यांक अलावा जसपुरौ जखमोला बि बग्वाळ नि मनांदन बल्कण म द्वी जाति लोक गोधन मनांदन।
गोधन मनाणो तरीका बि भिन्न च। गोधनौ दिन जसपुर , ग्वील अर ख्याड़ा का कुकरेती लोग गाजा बाजा का साथ दुफरा उपरान्त बौणम गोरुं तैं पींड खलांदन। ढोल दमाऊ का साथ लोग दगड़ी पींड लेक बौण जांदन अर उखी पींड खलांदन। बड़ा उत्साहजनक व आनंद दायक माहौल हूंद छौ बौण या खाली सारीम गोरुं तैं पींड खलाण। ये ही दिन कुकरेती स्वाळ भूड़ा पकांदन।
कुकरेत्यूं बग्वाळ नि मनाण अर गोधन मनाणो पैथर एक लोक कथा च बल भौत साँख्युं पैलि (दादी जी बुल्दी छे बल गुरख्याणि से बि पैल ) यूं गांवक कुकरेती बि बग्वाळ इ मनाँद था। पर एक साल इन भयंकर घटना ह्वे बल कि क्या बुलण तब। कुकरेत्यूं बग्वाळ मनाणै तयारी करीं हि छे बल निराश ह्वै अर एक बुड्या जी सोरग चल गेन। बस तब बिटेन कुकरेत्यूंन बग्वाळ मनाण बंद कौर दे। कई साखी बीत गे छा बग्वाळ छुड्यां कि एक गोधन क दिन कुटुंब म एक नौनी पैदा ह्वे अर बस येइ ख़ुशी म कुकरेती गोधन मनाण लग गेन।
इनि जसपुर का जखमोलाौं इक बि बग्वाळि दिन क्वी सोरग चल गे पर कुछ साल बाद गोधना दिन कै जखमोला की गौड़ी बिए गे तो जखमोला लोक बि गोधन मनाण मिसे गेन।
बस या च गोधन मनाणो कथा।

संदर्भ , भीष्म कुकरेती , सलाण बटें लोककथाएं (श्रृंखला 2003 , रंत रैबार , देहरादून
Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai, 2018

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