«

»

Nov
09

एकेश्वर महादेव स्थापना कथा

एकेश्वर मंदिर थरपणै लोक कथा
Folk Story about emerging Ekeshwar Temple

सलाणी लोककथाजणगरु : आचार्य भीष्म कुकरेती

कथा सुणाण वळ : श्री मदन मोलासी , पयासू , कफोळस्यूं , पौड़ी गढ़वाल।

-

या कथा प्रसिद्ध पट्टी चौंदकोट पट्टी क च। कफोळस्यूं म एक पहाड़ी मुंडेश्वर /मुन्डेशर म एक मंदिर च मुंडेश्वर मादेव मंदिर या खैरलिंग मादेव मंदिर । खैर लिंग पशु बलि कुण प्रसिद्ध मंदिर छौ। चौंदकोटम बि एक प्रसिद्ध देवस्थल च एकेश्वर मादेव। मुंडेश्वर पर्वत अर एकेश्वर पर्वत श्रेणी अमिण समिण छन अर बीचम एक बड़ो गदन च। मुंडेश्वर व एकेश्वर मध्य दूरी होली २० -२५ किलोमीटर।

एक दिनै छ्वीं छन बल एक ग्वेर मुंडेश्वर पहाड़ी म गौर चराणु छौ , मजा से बल तमाखू चिलम पर सोड़ बि लगाणु छौ। अचाणचक तै ग्वेराक नजर समिणा पहाड़ी पर पोड़ अर ग्वेर क सांस जख्या तक्खी रै गे। तै समिणा पहाड़ी (अब एकेश्वर डांड ) म गोर एक भेळम इन पौंछि गे छा जु गोर नि बौड़ये जांद त गोरुन भेळ लमडण छौ अर तड़ तड़ाक तड़म लग जाण छौ। ऊना कै ग्वेर क सूद भेद बि नि छौ। मुंडेश्वर पहाड़ी से समिणा पहाड़ी म धै सुणयाणौ क्वी मतबल इ नि छौ पर ग्वेर इथगा आतंकित ह्वे गे छौ बल वैन धै लगाण शुरू कर दे बल , ” हे (गौड़ी ) बौड़ जा रे , हे (गौड़ी ) बौड़ी जा रे , बौड़ जा रे ! ” पर आवाज उख कनै पौंछण छे , ग्वेर मुंडेश्वर डांड बिटेन किराणु राई बल ” हे (गौड़ी ) बौड़ जा रे , हे (गौड़ी ) बौड़ी जा रे , बौड़ जा रे ! ” पर कैन सुण छौ।

ग्वेर निराश ह्वे गे अर दुखी ह्वे गे , निरस्यूं ग्वेरन एक गोळ पत्थर (लोड़ी ) उठायी अर मुंडेश्वर मादेव क सुमिरण कार बल हे मुंडेश्वर मादेव जु मि त्यार सच्चो भगत होलु तो ये पत्थर तै समिणो डांड पंहुचे दे। अर ग्वेरन ु पत्थर (लोड़ी )समिणा डांडा तरफ घुर्रै दे घुर्र। ग्वेरन खौंळेण इ छौ उ पत्थर पुट गोरु समिण पोड़ अर गोर वापस भेळ से दूर चलि गेन। गोर भेळुंद लमडण से बच गेन।

जब एकेश्वर वळुं तै पता चौल कि क्या क्या ह्वे तो ऊन वे पत्थर तै उखम खडा पुटुक धार याने लोड़ि थरप दे (स्थापित ) अर मथि छुटि सि द्वी पथरै कूड़ी चिण दे अर लिंग (लोड़ी ) तै इगासर नाम देकि पुजण शुरू कर दे। धीरे धीरे इगासुर मादेव की मानता बढ़दी गे , इना उना क लोग बि चढ़ावा चढ़ाणो आण मिसे गेन। इन माँ लोगुंन उखम बड़ो उच्चो मंदिर निर्माण कार। आज एकेश्वर, इगासर , इगासुर मंदिर एकेश्वर तहसील को भौत बड़ु प्रसिद्ध मंदर च।

त या च इगासर मादेब क कथा।

Copyright@ Acharya Bhishma Kukreti, 2018

Emerging Temple Folk stories from Pauri Garhwal South Asia ; Folk stories from Chamoli Garhwal, South Asia ; Folk stories from Rudraprayag Garhwal, South Asia ; Folk stories from Tehri Garhwal; Folk stories from Uttarkashi Garhwal, South Asia ; Folk stories from Dehradun Garhwal; Folk stories from Haridwar Garhwal, South Asia ; Folk Stories from Choundkot Garhwal, South Asia
पौड़ी गढ़वाल की लोक कथाएं ; चमोली गढ़वाल की लोक कथाएं ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल की लोक कथाएं ; टिहरी गढ़वाल की लोक कथाएं ; उत्तरकाशी गढ़वाल की लोक कथाएं ; देहरादून गढ़वाल की लोक कथाएं ;चौंदकोट गढ़वाल की लोक कथाएं

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.