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Nov
12

चखुलुं अंडा फुड़णो पाप

चखुलुं अंडा फुड़णो पाप

सलाणी लोककथौं जणगरु : आचार्य भीष्म कुकरेती

कथा सुणाण वळि : श्रीमती दमयंती कलीराम कुकरेती (जसपुर ढांगू ) .
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एक दैं मि अर मेरी मां धाणी जाणा था त एक छुटु बेडु डाळम चखुलो घोल देखि मीन नील आकर्षक अंडों पर हाथ लगै दे। आसपास चखुल चूं चूं करणा छा तो मांन जोर की आवाजम ब्वाल – ना ना अण्डों पर हाथ नि लगा त्यार हथ लगाणो बाद चखुलूंन घोल म आण बंद कौर दीण। मि झसकेक भ्युं ऐ ग्यों।
तब मांन या कथा लगै छे -
भौत साल पैल कै गां म एक मनिख छौ सुल्तानु। बड़ो भलो मनिख छा। संत स्वभाव को सुलतान पवित्तर आत्मा छे बल। लोगुं भौत काम आंद छौ। कैक बि मौ मदद करणम पैथर नि रौंद थौ सुलतानू। गाँव वळ सुलतानु भौत बड़ैं करदा था। कुज्याण क्या कांड लगिन धौं बल बुड्या हूण से पैल इ सुल्तानु कुचर काणु ह्वे गे निरपट अन्धो। कथगा इलाज कराई कथगा घड्याळ धरिन धौं पर सुल्तानक आँख ठीक नि ह्वेन कुचरकाणो कुच्यर काण ही राई अर अन्धो ही भग्यान ह्वे।
मरणो बाद बल ज्यूंरा सुलतान तैं भेमाता दरबार म ली गेन। भेमाता (ब्रह्मा ) न निर्णय दे बल सुल्तानन सब पुण्य काम करिन त ये तैं सोरग भयाजो। यु नर्क लैक नी। जु बि एन पाप कौरी छ वांक सजा भूलोक म इ भुक्तिक ऐ गे। बिचारो कथगा साल अंधा राई धौं।
सुल्तानन पूछ – तो भेंटा जी मीन क्वी पाप कार जु मि अंधा हूं ?
भीमाता क जबाब थौ – हाँ तीन पाप कार छौ तो तू अँधा ह्वे।
“मीन क्या पाप कौर जु मि अँधा हूं ?” सुल्तानन पूछ
भीमाता क उत्तर छौ – एक ना तीन पांच छै दैं निरीह चखुलों अंडा फोड़िन जु एक जघन्य पाप च।
या छे पर्यावरण बचाणै कथा।

संदर्भ , भीष्म कुकरेती , सलाण बटें लोककथाएं (श्रृंखला 2003 , रंत रैबार , देहरादून
Copyright@ Acharya Bhishma Kukreti , Mumbai, 2018

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