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Nov
19

द्वी दुबस्ता ढिबरियूं कथा

द्वी दुबस्ता ढिबरियूं कथा

लोक कथा संकलन : आचार्य भीष्म कुकरेती

कथा सुणाण वळि : स्व. श्रीमती कुकरी देवी शीशराम कुकरेती (जसपुर ढांगू )

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( मीन जब गढ़वाल की लोक कथाये कथाघळ म लेखी बल लोक कथाओं मुख्य प्रयोजन प्रबंध विज्ञान की शिक्षा च त कुछ समालोचकों न मेरो ये कथन की आलोचना कार। बल लोक कथा तै विज्ञान व परबध दृष्टि से नि दिखे जै सक्यांद। पर या कथा ज्वा बिनपढ़ीं लिखीं जनान्युं रचित कथा त यी बताणी च बल लोक कथौं म प्रबंध विज्ञान एक आवश्यक अवयव च। मेरी बड़ी ददि (बाबा जीक बोडी ) यीं कथा तै हरेक गर्भवती युवती तै रोकी जरूर सुणांद छे )

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भौत साल पैली कुज्याण कथगा सौण पैली धौं हमर गां मा द्वी द्यूराण जिठाण ढिबरी छा – मयळी अर गरगरी। एक दै बत्थ छन बल द्वी ढिबरी इकदगड़ी आशाबन्द (गर्भवती ) ह्वे गेन। मयळि ढिबरी लौबाणि छे त गरगरी कुछ धुर्या जन छे। मयळि जनि आशाबन्द ह्वे वा सैण भूमि म जावो , कै पाख पख्यड़ म नि चौढ़ धौं। मयळि ढिबरी हमेशा सुचणी रावो वींक बच्चा संत हो , अगनै पैथर दिखण वळ हो। मयळि रोज भगवान तै याद करदी गे। मयळि ढिबरीन हौरुं दगड़ फ्वीं, फ्वीं , फ्वींफाट सब बंद कर दे क्वी ढिबरी लड़णो बि आवो त मयळि काख लग जा। मयळिहिटणम चलणंम , बाच बचनम, घस्स खाणम , पाणी पीणम बड़ो ध्यान द्यावो

ऊना गरगरी हौर बि गरगरी हूंद गे। उच्च पाख पख्यड़ म चढ़ण नई छवाड़ कना कना उच्चा डाळम चौढ़न नि छवाड़ वीं गरगरी न। अर लड़णो तो इन तयार रौंदी छे कि क्या बुलण।

स्वील हूणो बगत आयी त मयळितै स्वीलाक पीड़ा बि नि ह्वे अर द्वी सुंदर चिनख ह्वे गेन। कैन जाणी बि नी बल मयळिकब स्वील ह्वे।

अर बूबा रै गरगरी स्वील हूणो क्या छ्वीं लगाणो तब। एक दिन रात तक वा स्वील पीड़ा म तड़फणी राई। जब कुछ नि ह्वे त वींक मालिकन वींक चिनख अपर हथों न भैर खैंच। चिनख त भैर आयी पर गरगरी क प्राण चल गेन। चिनख जि बची गे। खाडू छौ बल ब्वे खवा।

ये ब्वे बल स्यु खाडू बि बड़ो अन्याड़ निकळ बल। जै कै दगड़ ले लड़ै भिड़ै। रागस छौ रागस। एक दिन कै खस्सी खाडू दगड़ रिकौण म मारे गे। गरगरी न कुछ नि पायी।

Interpretation Copyright@ Acharya Bhishma Kukreti, 2018

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