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Dec
04

योग गुरु बी के एस आयंगार को भी शुरू में अंग्रेजी नहीं आती थी

योग गुरु बी के एस आयंगार को भी अंग्रेजी नहीं आती थी

उत्तराखंड चिकित्सा सेवा निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षकों की आवश्यकता

Foreign language Conversant Yoga Instructors for Medical Services Export Development
Health Services Export Strategies -4
चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति – 4

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 227

Medical Tourism development Strategies -227

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 334

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -334

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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कल जब इस लेखक ने सॉस मीडिया में उत्तराखंड से मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु योग प्रशिक्षकों की कमी चर्चा की तो एक प्रबुद्ध ग्रामीण उत्तराखंड में महाविद्यालय में सेवारत प्राध्यापक की टिप्पणी थी कि उत्तराखंड में योग अध्यापक बेरोजगार हैं। समस्या कुछ और है। योग सीखने या योग पर्यटन हेतु विदेशी पर्यटक ऋषिकेश, हरिद्वार में अधिक आते हैं और उन्हें हिंदी ज्ञान नहीं होता तो उन्हें योग या अन्य धार्मिक ज्ञान हेतु हिंदी नहीं विदेशी भाषा जानकार प्रशिक्षक ही चाहिए। सर गुड मॉर्निंग गुड इवनिंग से विदेशियों को योग नहीं सिखाया जा सकता। सर गुड मॉर्निंग या ‘योगा बैग इन फोर्टी रुपया ‘से गैर हिंदी भाषियों को ताम्बे का लोटा या रामनामी थैला तो बेचा जा सकता है किन्तु योग नहीं सिखाया जा सकता। विदेशियों को योग सिखाने हेतु विदेशी भाषा जानकार होना आवश्य्क है।
उत्तराखंडी हिंदी से इतना प्रेम करते हैं कि हिंदी हेतु अपनी मातृभाषा तो त्यागते ही हैं अंग्रेजी व विदेशी भाषा सीखने के बहाना भी खोज लेते हैं। यहां तक कि अंग्रेजी माध्यम में पढ़े भी अंग्रेजी से दूर रहने का बहाना खोजने में उस्ताद दीखते हैं।
एक गलत फहमी यह है बल किसान पुत्र या गरीब घराने के , शिल्पकार घराने के पुत्री पुत्र कैसे अंग्रेजी सीखेगा। यह केवल बहाना है।
प्रसिद्ध योग गुरु बी के ऐस आयंगर की अंग्रेजी माध्यम में योग पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और सबसे अधिक विदेशों में बिकने वाले लेखक हैं। आचार्य आयंगर को भी अंग्रेजी नहीं आती थी किन्तु योग सिखाने के तीस वर्ष तक उन्हें अंग्रेजी ज्ञान ना के बराबर ही था। जब उन्होंने अंग्रेजी में पुस्तक लिखने की सोची तो अंग्रेजी सीखी और ऐसी सीखी कि आज उनकी पुस्तकें योग पुस्तकों में सर्वाधिक निर्यात होती हैं। उनके ‘लाईट ऑन योग सूत्र ऑफ पतंजलि ‘ में उनकी प्रस्तावना में आयंगर लिखते हैं बल प्रशिक्षण शुरू करने के ३० साल बाद भी उनका अंग्रेजी ज्ञान सामन्य ही था। मेहनत से उन्होंने अंग्रेजी भाषा में पारंगत हासिल की व प्रसिद्ध लेखक बने। विदेशी भाषा सीखने की कोई उम्र नहीं होती व कोई समय या जाति बंधन नहीं होता है।
शल्य शास्त्र पितामह सुश्रुत भी शिल्पकार थे किन्तु उन्होंने भी संस्कृत अध्ययन किया व सुश्रुत संहिता की रचना की जो संसार की पहली शल्य चिकित्सा पुस्तक है। भाषा सीखने हेतु जाति कोई बंधन नहीं होटापितु आत्मबल बंधन होता है।
यदि कमाऊ योग पप्रशिक्षक बनना है तो अंग्रेजी ही नहीं एक अन्य विदेशी भाषा का जानकार होना भी आवश्यक है। उत्तराखंड समाज को ऋषिकेश , हरिद्वार में विदेशी भाषाएँ शिक्षण कोचिंग क्लासेज स्थापित करने ही चाहिए। योग प्रशिक्षण विद्यार्थियों को योग संग संग अंग्रेजी व एक अन्य भासा भी सीखनी आवश्यक है। ऋषिकेश में विदेशी भाषा सीखने के कोचिंग सेंटर्स में वृद्धि आवश्यक है और यह सरकार नहीं अपितु समाज का उत्तरदायित्व है।

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2018, bjkukreti@gmail.com

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