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Dec
07

पक्षी निहारण पर्यटन का उत्तराखंड हेतु महत्व

पक्षी निहारण पर्यटन का उत्तराखंड हेतु महत्व

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -1

Bird Watching Tourism in Uttarakhand -1

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 337

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -337

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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इस लेखक को कोई ज्ञान नहीं है कि उत्तराखंड में प्रशासनिक स्तर पर कोई बर्ड फेस्टिवल या पक्षी निहारण मेला आयोजित हुआ हो। दिसंबर 2018 में कोटद्वार में पक्षी मेला या बर्ड फेस्टिवल आयोजित हो रहा है जिसकी भुरू भूरी प्रशंसा होनी चाहिए।

पक्षी मनुष्य को सदा से आकर्षित करते रहे हैं व प्रेरणा स्रोत्र भी होते हैं।

भौगोलिक सूचना हेतु पक्षी महत्वपूर्ण हैं

पक्षी निहारन आनंद तो देता है किन्तु साथ में जैविक प्रक्रियाओं व भविष्य में परिवर्तन सूचना भी देते हैं।

पक्षी पर्यावरण हेतु आवश्यक हैं जैसे पेड़ पौधे पराग गण व बीज विकिरण

पक्षी पर्यटन पर्यावरण शिक्षा में सहयोगी है

पक्षियों का सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व होता है जैसे घुघती

कई पक्षी आय साधन भी हैं जैसे मुर्गी पालन

पक्षियों का पालतू पशुओं के स्वास्थ्य से सीधा संबंध होता है अतः मनुष्य हेतु आवश्यक

पक्षी निहारण पर्यटन

पक्षी निहारण पर्यटन में पर्यटक पक्षियों को विभिन्न कोण से देखने आते हैं जिसमे निम्न पर्यटक मुख्य होते हैं

१- पक्षी जैविक अनुसंधान विद्यार्थी या वैज्ञानिक

२- मूर्धन्य फोटोग्राफर्स /चित्रकार

३- पर्यावरण विशेषज्ञ

४- पर्यावरण प्रेमी

५- पक्षी प्रेमी

६- टूरिज्म लेखक व पत्रकार

७- लाइफ साइंस अन्वेषक , लेखक व पत्रकार

८- जिओग्राफिक टीवी चैनल जैसे संस्थान

९- कृषि विशेषज्ञ जो पक्षियों का कृषि व वन्य जीवन पर प्रभाव अध्ययन हेतु आते हैं

१०- जल व भू विज्ञान अध्ययन कर्ता

उपरोक्त सभी पर्यटक प्रीमियम श्रेणी के पर्यटक होते हैं . इनमे कई पर्यटक जनसम्पर्क में विशेषज्ञ होते हैं जैसे सम्पादक व फोटोग्राफर्स या चित्रकार जो पक्षी स्थल की छवि वृद्धि हेतु प्रभावशाली सिद्ध होते हैं।

प्रीमियम पर्यटक होने के कारण आय के अच्छे साधन भी हैं। पक्षी निहारण से किसानों को भी कई ज्ञान लाभ ही नहीं मिलता अपितु ग्रामीण टूरिज्म या प्राकृतिक पर्यटन को भी संबल मिलता है।

उत्तराखंड हेतु पक्षी निहारण पर्यटन प्रचार प्रसार अत्त्यावष्यक है।

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2018, bjkukreti@gmail.com

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