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Dec
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सेल्स वळुं विकास नापणो पैमाना

सेल्स वळुं विकास नापणो पैमाना

चबोड़ , चखन्यौ , मसखरी : भीष्म कुकरेती चबोड़ाचार्य

हरेक तबकौ विकास नापणो अपण अपण तरीका हूंदन। जन कि बल कॉंग्रेस अध्यक्ष याने गळ्या प्रौढ़ बौड़ तैं शौचालय क्रान्ति क्रान्ति नि दिखेंद या बहिन मायावती नि मणदि बल शौचालय क्रान्ति से सबसे बिंडी फैदा दलित व गरीबुं तैं ह्वे या अमित शाह तैं केरल आयुर्वेद टूरिज्म क्रान्ति म विकास नि दिखेंद। युंकुंण अपणी पार्टी की सरकार ही विकासौ पैमाना च तो तराजू च, माणु च , पाथु च । मुकेश अम्बानी कुण विकासमुखी सरकार माने ज्वा सरकार अम्बानी तैं वैका कूड़म हवाई जाज उतारणो इजाजत दे दे।
मतबल हरेक कौमौ विकास नापणो अलग , बिगळ्यूं पाथो हूंद , माणु हूंद , परोठी हूंद। इनि सेल्स वळु बि विकास का सीधा अर्थ हूंद बल उपभोक्ताओं की खरीदी ताकत याने बाइंग पावर या बाइंग पोटेंशियलिटी । सेल्स वळ बगैर सरकारी सांख्यकी पोथी देखिक बि पता लगै लीन्दन बल ये शहर की उपभोक्ता खरीदी तागत ह्वेलि।
मि जब रफ़ि कम्पनी म नौकरी पर लग त मेरी तनखा छे 421 रुपया (420 नि छे किलैकि 420 भली संख्या नि मने जांद छे ) . खैर जब मि तै कम्पनी न भैर टूर पर जाणो डीए डेली अलाउंस बताई तो सामन्य शहरुं डी ए भत्ता छौ 18 रुप्या दिनकी , कुछ शहरों डी. ए . छौ 22 रुप्या दिनकी अर पूना को डी ए छौ 26 रुप्या दिनकी . मि फट से बींगी ग्यों बल पूना म सबसे अधिक रेडिओ बिकदा ही ह्वाल , मर्फी ना सै त हौर ब्रैंड तो बिकदा ही होला। याने कै बि शहर को खरीदी सामर्थ्य पता लगाण हो तो सर्वप्रथम सेल्स वळु दिनकी भत्ता याने डेली अलाउंस पता लगाण जरूरी च।
फिर सन 80 तक भारत म कार एक दर्शनीय वस्तु छे तो यदि कै कस्बा म कार दिखे जावन तो हम उपभोक्ता खरीदी तागत का अंदाज लगै लींद छा।
मीन सिगरेट शुरू कार जब मी एमएससी करणु छौ अर फोर स्क्वायर सिगरेट से शुरू कार। तब भी अर आज भी फॉर स्क्वायर सिगरेट हर जगा नि मिल्दी। जु कै कस्बा म फॉर स्क्वायर सिगरेट मिल जावो तो मि क्या क्वी बि अंदाज लगै लीन्दो छौ बल ये कस्बा म किंग साइज कंज्यूमर छैं छन। फॉर स्क्वायर माने लिव किंग साइज लाइफ।
सेल्स वळ अमूनन दारु सारू का कुढबी हूंदन। यदि कै बड़ो शहर म तब मैक्डोल नंबर वन नि मीलो तो समजी ल्यावो यु शहर नामौ शहर च किन्तु खरीदी शक्ति म म्यार गाँव से बि छुट च। फिर ब्रैंडेड बियर मिलण याने तब गोल्डन बियर , पिल्सनर , किंग फिशर ब्रैंड कै कस्बा म मिल जावो तो समजो बल ये कस्बा की उपभोक्ता खरीदी शक्ति छैं च।
बियर पर याद आयी बल सन 80 का आसपास बिजली को कुहाल छा। तब कस्बौं म बियर बारम बियर चिल्ल्ड ना बियर ग्लास म बरफ डाळी पिए जान्दि छे। कसम से बियर की ही कसम बल बियरै ग्लासुंद बरफ क्यूब डाळे जांद छौ। यदि कै कस्बा म बियर बारम चिल्ल्ड बियर मिलदी छे तो समजी ल्यावो बिजली ठीक च याने विधायक को डेरा होलु। विधायक को डेरा याने ठीक ठाक बिजली याने कुछ तो खरीदी पावर च।
रेडीमेड ड्रेसेज की कथगा दूकान छन से भी हम शहर की उपभोक्ता खरीदी शक्ति अंदाज लगान्द छा कबि अब ना। अब त टेलर इनि हर्चि गेन जन गढ़वालम किसान .
फिर बियर बारम चखना या मंचिंग उपलब्धता बि हम तै बथान्द छौ बल शहर कै लायक च। चिकन चिल्ली या टंगड़ी कबाब उपलब्धि भी विकास का पैमाना छा।
आपन बि बुलण बल यु खळचट्टी क्या छ्वीं लगाणु च। महाराष्ट्र म कथ्या कस्बा इन छा जख ब्रैंडेड कंडोम याने गैरसरकारी निरोध बि लाला जी उधार बिच्दा छा। तो हम बुल्दा बि छा बल जै गाँव /कस्बा म निरोध बि उधार बिकदो उख तीन बैंडो रेडियो क्या बिकल !
फिर कुछ समय बाद जब जनान्युं ब्रा चोली जमानो (अधिक चलन ) आयी तो ब्रा /चोली की दुकानुं संख्या से बि पता चलदो छौ बल कस्बा न कथगा विकास कार।
जब मि कार से घुमण लगी ग्यों तो भी ग्रामीण हाइवे पर शराबखाना ही यार क्या ज्यादातर सेल्स वळु उपभोक्ता खरीदी तागत का अंदाजा लगाणो सर्वोत्तम माध्यम छा अर आज बि। महाराष्ट्र म सबसे अधिक किसान आत्म हत्त्या उखी करदन जै क्षेत्र म हाई वे का बार म किसानुं अधिक भीड़ हो।
उन उपभोक्ता खरीदी ताकत पता लगाणो हौर बि सरल इंडिकेटिव छन किन्तु यी सेक्रेट छन तो अबि नि बताणा आयी।

सर्वाधिकार : भीष्म कुकरेती चबोड़ाचार्य , दिसंबर , 2018
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