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Jan
20

हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का ‘अंध युग’ अर्थात तिमर युग इतिहास

हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का ‘अंध युग’ अर्थात तिमर युग इतिहास
Dark Age of History after Harsha Vardhan death

Ancient History of Haridwar, History Bijnor, Saharanpur History Part – 277

हरिद्वार इतिहास , बिजनौर इतिहास , सहारनपुर इतिहास -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग – 277

इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती

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हर्ष की मृत्यु सन 647 ई मन गया है। हर्ष का कोई पुत्र न था न ही उसने किसी सुयोग्य व्यक्ति को राज्य उत्तराधिकार सौंपा। सन 647 के पश्चात स्थानेश्वर , कान्यकुब्ज का इतिहास अज्ञात ही है। कोई भौतिक सख्सी नहीं मिलते कि यह लिखा जाय कि फलां राजा या जागीरदार ने इन क्षेत्रों में राज किया।
डबराल लिखते हैँ कि हर्ष मृत्यु पश्च्चात हर्ष साम्राज्य में उथल पुथल मच गयी और स्थानीय राजा (जागीरदार ) अपने अपने राज्य स्थापित करने में जुट गए (1 ). हर्ष साम्राज्य के सीमावर्ती राजाओं ने भी अपने राज्य सीमा वृद्धि करने हेतु कतिपय राजाओं ने हर्ष साम्राज्य पर अधिकार कर लिया। कामरूप नरेश (प्राचीन आसाम ) ने अपनी राज्य सीमा पश्चिम व दक्षिण में बढ़ा ली। मगध राजा गुप्त नरेश आदित्यसेन ने अपनी शक्ति बढ़ा ली व महाराजाधिराज विरिद धारण कर ली (1 ) .
भोट तथा नेपाल आक्रमण
चीन के कतिपय ऐतिहासिक पत्रों से पता चलता है कि भोट नरेश ने नेपाल की सहायता से चीन की सहयता हेतु मध्य देश पर आक्रमण किया। चीन नरेश हर्ष के उत्तराधिकारी अर्जुन को बंदी बनाकर ले गए (2 )
किन्तु भारत में कोई साहित्य उपलब्ध नहीं है जो उपरोक्त साक्ष्य दे सके (2 )
पलेटा व तालेश्वर शासन तिमिर युग पर कुछ प्रकाश डालते हैं कि भोट आक्रमण कल्पित ही है। पलेटा शासन से अंदाज लगता है कि प्राचीन दक्षिण उत्तराखंड (हरिद्वार , सहारनपुर ) पर आदिवर्मन का राज्य था। यह केवल अंदाज ही है। और शायद बिजनौर पर भी आदिवर्मन का राज रहा हो (अगले अध्याय में )

सन्दर्भ :

1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 404

2 -Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 405

Copyright@ Acharya Bhishma Kukreti , 2018

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