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Feb
10

गाय गोबर मूत्र चिकत्सा पर्यटन विकास

गाय गोबर मूत्र चिकत्सा पर्यटन विकास

Cow Dung Therapy Tourism
चिकित्सा पर्यटन विकास हेतु गोबर मूत्र चिकित्सा विकास -2
Dung , Urine therapy for Medical Tourism Development -2

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 265

Medical Tourism development Strategies -265

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 386

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -386

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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गौ गोबर -मूत्र गुण व चिकित्सा
Cow Dung Urine Therapy Tourism
चिकित्सा पर्यटन विकास हेतु गाय गोबर मूत्र चिकित्सा विकास -1
Cow Dung Urine Therapy for Medical Tourism Development -1

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 264

Medical Tourism development Strategies -264

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 385

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -385

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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किसी भी भूभाग में चिकित्सा पर्यटन विकास करना हो तो गाय गोबर व गाय मूत्र चिकित्सा विकास आवश्यक है।

गाय मूत्र के गुण पिछले अध्याय में उल्लेख हो चूका है। वैसे बहुत से प्राकृतिक चिकित्सा स्पा में गाय गोबर व गौ मूत्र चिकित्सा का उपयोग होता है।
गौ गोबर हानिकारक सूक्ष्म जीवाणुओं व कीटों का नाश करता है व भगाता है। कृषि खाद में गौ गोबर इसी लिए प्रयोग होता है कि गाय गोबर पेड़ पौधों को भोजन के अतिरिक्त जीवाणु -कीट नाशक शक्ति भी देता है।
फ़ूड प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों में प्रदूषण हटाने हेतु गाय गोबर ही प्रयोग किया जाता है। भोज समय भोजन स्थल में गाय गोबर छिड़काव के पीछे गाय गोबर की कीट नाशक शक्ति ही मुख्य कारण है।
प्राचीन काल में गौशाला में प्रसव करवाने के पीछे मुख्य कारण गे गोबर का चिकित्सा गुण ही था
प्राचीन काल ही नहीं कुछ साल पहले तक मकान के दीवारों व फर्श लिपाई गोबर से की जाती थी तो कारण गोबर के बैक्टीरिया विरोधी गुण ही था।
गौ मूत्र व गोबर को पीने के पीछे गोबर मूत्र का चिकित्सा गुण ही उत्तरदायी था।
पंचगाव्य में गोबर , मूत्र , घी गुड़ आदि होता है जिससे चिकित्सा की जाती है।
मच्छारों , झांझ व अन्य कीटों को भगाने हेतु गुपळ या उपल जलाने के पीछे भी मुख्य कारण गोबर की चिकित्सा शक्ति ही है।
अब आधुनिक युग में गोबर व गौ मूत्र से से निम्न उत्पाद चिकित्सा व उपभोग हेतु निर्मित किये जाने लगे हैं -
फर्श सफाई पदार्थ
टूथ पेस्ट
नहाने का साबुन
हाथ धोने हेतु हैण्ड वाश
मुख हेतु फेस वाश क्रीम
शैम्पू

तैल

अगरबत्ती

उपरोक्त पदार्थों का विपणन , प्रचार प्रसार मेडिकल टूरिज्म का भाग बनना चाहिए।
यदि अन्वेषण हो तो लाल मिट्टी के साथ गोबर व मूत्र का संगम कर अन्य पदार्थ भी बन सकते हैं।

Copyright @Bhishma Kukreti, bjkukreti@gmail .com

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