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Feb
18

‘पलायन एक चिंतन’ आयोजित निखालिश भोजन पर्यटन और देवेश आदमी , रूपचंद जखमोला के अनाज दाल व्यापार पर्यटन सहायक माध्यम

‘पलायन एक चिंतन’ आयोजित निखालिश भोजन पर्यटन
और
देवेश आदमी , रूपचंद जखमोला के अनाज दाल व्यापार पर्यटन सहायक माध्यम

Difference between Food Tourism and Food as Tourism Assisting Medium
भोजन पर्यटन विकास -7
Food /Culinary Tourism Development 7
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 393

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -393

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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भोजन पर्यटन व पर्यटकों हेतु भोजन अनाज , यंत्र प्राप्ति सेवा में अंतर् जानना आवश्यक है।

पलायन एक चिंतन का ‘ शीला -बांघाट ‘ क्षेत्र में ‘ऑर्गेनिक किचन ‘ भोजन पर्यटन उदाहरण

अजय रावत द्वारा उन्ही की वाल में फेसबुक में 14 फरवरी 2019 की पोस्ट में एक सूचना मिलती है कि पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड के दोनों नयार संगम तटीय क्षेत्र शीला -बांघाट क्षेत्र में पलायन एक चिंतन संगठन ने ‘ऑर्गेनिक व ट्रेडिशनल किचन ‘ का शुभारम्भ किया व शीला बलूण तोक क्षेत्र में बंजर पड़ी जमीन में जैविक कृषि कर इस किचन में ऑर्गेनिक भोजन परोसेंगे। इस प्रयत्नो गामी कृत में स्वयं अजय रावत , रत्न सिंह असवाल , अनिल बहगुणा , राकेश बिजल्वाण व कृष्ण काला शामिल हैं।

जैविक कृषि अपने आप में पर्यटन गामी माध्यम है और जैविक अनाज दाल , सब्जी से बना भोजन पर्यटकों को परोसना अति विशेष भोजन पर्यटन कहलाया जाता है। ऐसे किचन में अभी अधिकांशतः विदेशी पर्यटक व धनी पर्यटक ही एते हैं जिन्हे जैविक भोजन की महत्ता ज्ञात है। इसे निश मार्केटिंग तहत निश टूरिज्म भी कहा जाता है। सामन्य पर्यटक किचन में भोजन नहीं करेंगे व जैविक पादप खेतों में नहीं घूमेंगे केवल जैविक कृषि प्रेमी ही आनंद लेंगे इसलिए ऐसा कार्य अति विशेष भोजन पर्यटन श्रेणी में आएगा।

रतन सिंह असवाल व अजय रावत के पोस्टों से अनुमान लगता है वे शीला बलूण तोक (मनियार स्यूं ) में जैविक प्रेमी पर्यटकों हेतु विलेज टूरिज्म हेतु सुविधा जुटाएंगे। फ़ूड टूरिज्म का आधार व उद्देश्य विलेज टूरिज्म विकसित करना ही होता है।

रतन सिंह असवाल , अजय रावत के सोशल मीडिया में पहाड़ी भोजन चित्र व विवरण किस तरह विलेज टूरिज्म का प्रचार प्रसार करना चाहिए के प्रशंसनीय उदाहरण हैं

उपरोक्त पर्यटन निखालिश भोजन पर्यटन की श्रेणी का श्रेष्ठ उदाहरण है।

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देवेश आदमी व रूपचंद जखमोला द्वारा पहाड़ी अनाज दाल व्यापार निखालिश भोजन पर्यटन नहीं है

पैनों पट्टी के देवेश रव्वत ‘आदमी ‘ देहरादून में बालावाला स्थान में पहाड़ी अनाज , दाल भाजी के व्यापार में संलग्न हैं व गाँवों में ग्रामीण क्राफ्ट विकास व प्रचार प्रसार हेतु कार्यरत हैं जैसे पादप पत्तल व शिल्पकारों द्वारा निर्मित क्राफ्ट्स /शिल्प वस्तुओं की प्रदर्शनी व प्रचार आदि आदि।

इसी तरह मल्ला ढांगू के रूपचंद जखमोला भी ऋषिकेश में पहाड़ी अनाज , दाल , भाजी सुक्सा आदि का व्यापर करते हैं।

इसी तरह देहरादून में युगवाणी के पास निखालिश पहाड़ी अनाज दूकान , रेवती हॉस्पिटल निकट , हरिद्वार रोड धर्मपुर देहरादून में सेमवाल स्टोर द्वारा पहाड़ी अनाज दाल सुक्सा , बड़ी व्यापार भी पर्यटनोगामी हैं। देवेश रावत आदमी , रूपचंद , सेमवाल स्टोर के कृत्य वास्तव में उत्तराखंडी प्रवासी पर्यटकों को आकर्षित करने वाले भोजन संबंधी कृत्य तो हैं किन्तु निखालिश भोजन पर्यटन श्रेणी में नहीं आते। धर्मपुर देहरादून में ही सेमवाल स्टोर के पास कलसी कुठार (मल्ला ढांगू ) के रावत का ‘रावत सीड्स स्टोर’ वास्तव में भोजन-कृषि पर्यटन का एक उदाहरण है। इस स्टोर में उत्तराखंड पहाड़ों के कृषक पहाड़ी बीज , कृषि यंत्र क्रय हेतु गाँवों से आते हैं तथापि दूसरे शहरों के प्रवासी भी पहाड़ी बीज व कृषि यंत्र क्रय हेतु आते हैं।

सभी भोजन दाल व्यापार निखालिश भोजन पर्यटन नहीं कहलाया जा सकता है। हाँ यह व्यापार पर्यटन विकासोन्मुखी अवश्य होता है।

Copyright @Bhishma Kukreti, bjkukreti@gmail .com

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