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Jul
21

गढ़वाली में क्रिया विधान (1): कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन- (35)

सम्पादन : भीष्म कुकरेती

गढ़वाली में क्रिया विधान (Verbs of Garhwali Language)

अबोध बंधु बहुगुणा ने गढ़वाली क्रिया विधान का बहुत ही संक्षिप्त रूप में विवेचन किया और वहीं रजनी कुकरेती ने क्रिया विधान का विस्तार पूर्वक विवेचना की है

गढ़वाली की क्रियाएं

१- नामिक क्रियाएं

२-समस्त क्रियाएं

३-व्युत्पन्न क्रियाएं

४- मूल अथवा साधारण क्रियाएं

५-सयुंक्त क्रियाएं

नामिक क्रियायों के उदहारण

अधिकतर देखा गया है कि गढवाली में संज्ञा, सर्वनाम व विशेषणों की धातुओं पर आण , औणो, अण, एण , औण, याण प्रत्यय लगाणे से नामिक क्रिया बनायी जाती हैं

मूल —————– प्रत्यय ————————————–क्रिया

संज्ञा————————अण , आण एण, याण, औणो

रंग —————————————- ————–रंगण, रंगाण, रंगेण,रंग्याण , रंगौणो,

सर्वनाम

अपणु ——————–औ ण ——————————————– अपणौण

विशेषण ——————-अण , आण एण, याण, औणो, यौण

नेडू/न्याड़ ————————–औण/आण —————————–निडौण /निडाण

बौळ———————————–एण /याण ——————————बौळेण, बौळयाण

पुरू ————————————यौण/ याण——————————पुर्याण, पुर्यौण

समस्त क्रियाएं

१- योगित क्रियाएं

उठण -बैठण , चलण – फिरण

२- ध्वनि अनुसरणात्मक क्रियाये

अधिकतर प्रत्यय औण व आण हैं

ध्वनि ——————-प्रत्यय ————-क्रिया

फड़ -फड़ ————— आण —————फड़फड़ाण

भिण- भिण————-आण /औ ण ——–भिणभिणाण / भिणभिणौण

व्युत्पन्न क्रियाएं

मूल क्रिया———————-प्रथम प्रेरणार्थक———————द्वितीय प्रेरणार्थक

(सकर्मक व अकर्मक)

रुण /रोण ————————-रुलाण/रुलौण———————-रुलवाण/रुवाण.रुलवौण लौ ण

दीण /देण————————- दिलाण/दिलौण——————–दिलवौण

गढ़वाली में सकर्मक मूल क्रियाएं

मन्न (क्या रै ग्ज्या तैं अपण भै किलै नि मणदु ?,

समजण/समझण ( चल ! मी तैं जादा इ लाटो समजदी हैं?)

गढ़वाली में अकर्मक मूल क्रियाएं

भाई न अब सीण/सेण च

ढिबर भगणा छन

गढवाली में संयुक्त क्रियाएं

अ बाध्यताबोधक संयुक्त क्रिया

धातु -पोड़ (पड़ना )

१- कृदंत स्वरुप

वर्तमान काल कर्मवाच्य

——————————एकवचन —————————बहुवचन ————————-

पुरुष —————-पुल्लिंग /स्त्रीलिंग —————————पुल्लिंग/स्त्रीलिंग

उत्तम ————- पोड़दो——————————————– पोड़दो

मध्यम ————पोड़दें ——————————————–पोड़दों

अन्य —————पोड़दु/ दि————————————–पोड़दिन/दन

वर्तमान काल कर्त्री वाच्य

——————————एकवचन —————————बहुवचन ——————

पुरुष ———–पुल्लिंग————स्त्रीलिंग —————पुल्लिंग————-स्त्रीलिंग

सभी पुरुषों में . ———-पोड़दु/ पोड़दि/पोड़दन और सभी लिंगों में

————————–भूतकालिक कल्पना कर्मवाच्य

१- कृदंत होने पर सभी पुरुषों के एकवचन में ‘पोड़दु’

२-सभी पुरुषों के बहुवचन में ‘पोड़दा’

भूतकालिक कल्पना कर्त्री वाच्य

सभी पुरुषों के एकवचन व बहुवचन में प्रयोग –पोड़दु/पोड़दि/पोड़दा

भूतकाल कर्मवाच्य

पुरुष ——–एकवचन—————बहुवचन

उत्तम——–पोड्योञ—————पोड़याँ

मध्यम ———–पोडें —————-पोडयाञ

अन्य पुरुष——- पोडि————– पोडेन

( ड को ड़ पढ़े )

भूतकाल कर्त्री वाच्य

भूतकाल कर्त्री वाच्य में सभी पुरुषों के एकवचन व बहुवचन में ‘ पोडि/ पोडेंन’ प्रयोग होता है

भविष्य काल – कर्मवाच्य

भविष्य काल – कर्मवाच्य के एकवचन वाले उत्तम पुरुष व अन्य पुरुष में –पोड़लु ‘ प्रयोग होता है

भविष्य काल – कर्मवाच्य के एकवचन वाले मध्यम पु. में ‘पोड़लि’ प्रयोग होता है

भविष्य काल – कर्मवाच्य क एसभी पुरुषों , सभी वचनों में ‘पोड़ला’ प्रयोग होता है

भविष्य काल कर्त्री वाच्य

भविष्य काल कर्त्री वाच्य के सभी पुरुषों, सभी लिंगों व सभी वचनों में पोड़लु /पोड़लि /पोड़ला का प्रयोग होता है

भविष्यकाल कल्पना क्रम वाच्य (कृदंत की उपस्थिति)

पुरुष ————– एकवचन—————— बहुवचन

उत्तम —————पोडौञ ———————पोडां

मध्यम —————-पोडे——————— पोडां

अन्य —————–पोडु ———————-पोड़ोन

भविष्यकाल कल्पना कर्त्री वाच्य (कृदंत की उपस्थिति)

सभी पुरुषों के सभी लिंगों व वचनों में पोडु /पोड़ोन का प्रयोग होता है

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