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Apr
07

डुंकुर बडा जी : व्यंग्य कसो पर पैथर बिटेन

डुंकुर बडा जी : व्यंग्य कसो पर पैथर बिटेन
कुछ व्यक्तियुं चरित्र संस्मरण , लड़ी -1 !
समळौण – भीष्म कुकरेती

म्यार चबोड़ या व्यंग्य लिखण अचाणचक नि ह्वे। यांक पैथर मि मणदु म्यार गाउ जसपुर (ढांगू ) कु कम से कम सौ साल कु इतिहास त जुम्मेवार छैं इ च। म्यार चबोड़ म रूचि इनि सुदी त नि आयी भौत सा व्यक्त्युं हथ च। हमर गाँव म डुंकुर बडा जी अंग्रेजो के जमाने के राजपूत थे जो अंग्रेजों के जमाने के ब्राह्मणु गांव म जन्मी छा। एकमात्र राजपूत परिवार। वु जमन जात पात कु छौ त एक राजपूत परिवार तै सौ बामणु परिवार इ नि सम्भळण छौ बल्कणम पचासेक शिल्पकार परिवार बि। डुंकुर बडा जीक कूड़ हमर कूड़क एक पुंगड़ तौळ छौ तो भौत सा माने म हम एकी थोक म इ आइ जांद छा (जात से न ) . म्यार बडा जी आर्य समाजी छा तो हिन्दू पूजन संस्कृति से म्यार जु बि भिड़ंत ह्वे स्यु डुंकुर बडा जिक इख हुयां पूजनों से ही ह्वे। डुंकुर बडा जी जागरी छा।
मलेसिया जंग्या , मलेसिया कुर्ता , सुडौल सरैल , थांत जन खुट (कृषि कार्य की निसानी ) आज बि याद च। मलेसिया सुलार सिरफ ब्यौ काजम या जागरी काम से दुसर गांव जाणम पैरदा छा वो बडा जी।
बामणु गांवम पांच छै साखी से एक राजपूत परिवार याने सामजस्य आवश्यक रै होलु। एक परिवार याने कैपर सीधा हमला से बचण। डुंकुर बडा जी से मीन यी सीख बल सीधा हमला क बजाय अपरोक्ष हमला ज्यादा कामगार हूंद। म्यार समज आण वल आयु -एज तक डुंकुर बडा जीन एक हास्य -व्यंग्य शैली उपजै ऐली छे अर वा शैली छे चबोड़ , हँसी से कै तै झपोडो , पीटो किन्तु अपरोक्ष रूप से। या शैली छे डुंकुर बडा जी की।
जन कि क्वी नौनु पढ़णो समय खिलणु हो तो डुंकुर बडा जी सीधा नि डांटदा छा बल्कणम बुल्दा छा बल ,” ब्यटा ! कतै नि पढ़न , किताब नि खुलण कखि तू पास ह्वे गे अर फोकटम त्यार बुबा तैं भिल्ली खर्च जि करण पोड़ल !”
कैक नॉन -नौनी क नाक बगणी हो तो नौनु -नौनी ब्वे कुण सलाह हूंदी छे ,” बुबा नि पुंजण नाक। बिचारा माख कनै पुटुक भौरल ?”
डुंकुर बडा जी तुलना करणम बि उस्ताद छा। एक दै लयड़ भदवाड़ , ग्वाठम मीन फ़तेराम जखमोला भैजी , हृदयराम आर्य भैजी अर डुंकुर बडा जी मध्य विचित्र तुलना सूण छौ किन्तु तब मि दस साल से छुटू ही छौ
इनि भौत सा डायलॉग हूंद छा डुंकुर बडा जी का जो चबोड़ व व्यंग्य का उमदा उदाहरण छया। काश मि सब याद रखी सकदो !
Copyright @ Bhishma Kukreti , April 2019

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