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Apr
25

चिर सुंदरी भुंदरा बौ का नेहरू आलोचना पर प्रियंका बाड्रा को उत्तर

चिर सुंदरी भुंदरा बौ का नेहरू आलोचना पर प्रियंका बाड्रा को उत्तर

विमर्श : भीष्म कुकरेती

चिर सुंदरी भुंदरा बौ – हैल्लो ! हैल्लो ! भीषम !
मैं – हेलो बौ जी , भाभी जी नमस्कार
भुं. बौ – हैं ये मरतण्या , मरी आवाज में रामारूमी क्यों देवर जी ? क्या देवरानी ने बेलनास्त्र या जिह्वास्त्र चला दिया क्या सुबै सुबै ?
मैं – नई बौजी। मैं फिरोज जहांगीर गांधी की पोती प्रियंका बाड्रा के दुःख से अति दुखी हूँ।
भुं. बौ – वोये झूठे ! तू तो आपातकाल से इंदिरा कॉंग्रेस का निप्पत्त विरोधी रहा है और तुझे प्रियंका पर कळकळी , फिरोज पोती पर दया करुणा उमड़ रही है ? ऐसा फरेब क्यों देवर जी ?
मैं – तेरी सौं , सौरी आपकी बहिन की सौं , मुझे मिसेज बाड्रा पर सच्ची मुच्ची दया आ रही है। उसका दुःख सहा नहीं जा रहा।
भुं. बौ – अरे फिरोज पोती ने कर के दिया कह क्या दिया जो तुझ निप्पट इंदिरा कॉंग्रेस विरोधी को किसी कॉंग्रेसी और वह भी फिरोज गाँधी के परिवार सदस्य पर दया आ रही है ?
मैं – आज उसने अपने भाषण में दुःख जताया बल कॉंग्रेस विरोधी नेहरू जी की आलोचना करते हैं। अपरोक्ष रूप से फिरोज जहांगीर पोती रो रही हैं कि नेहरू विरासत , जवाहर लाल लीगेसी खत्म की जा रही है।
भुं. बौ – मी तईं फिरोज जहांगीर पोती के रोने पर तरस नहीं अपितु उसके भारतीय संस्कृति के बारे में जानकारी न होने पर क्रोध आ रिया है बल।
मैं -हैं प्रिंयंका जैसी भद्र महिला पर क्रोध ?
भुं. बौ – राजनीती में कोई भद्र या अभद्र नहीं होते जनाब। फिरोज जहांगीर गाँधी पोती ने सम्भवतया अपने पड़ नाना की पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ इण्डिया नहीं बाँची।
मैं -भाभी जी ! प्रियंका के रोदन से नेहरू रचित डिस्कवरी ऑफ इण्डिया का क्या संबंध ?
भुं. बौ – देवर जी ! पूरा संबंध है यदि फिरोज जहांगीर पोती ने अपने पड़ नाना नेहरू जी की पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इण्डिया बंचि होती ना , तो पता चल जाता कि गैर कॉंग्रेसी नेहरू बिरासत को धूल में मिला कर सही राजनैतिक कार्य कर रहे हैं।
मैं – क्या बात कर रहीं है बौ जी आप ? क्या भंगुल जमा रही हैं ?
भुं. बौ – अरे जिसे भी भारत के इतिहास की थोड़ी सी भी समझ है उसे पता है गैर कॉंग्रेसियों को सर्व प्रथम नेहरूवाद को भारत वासियों के दिमाग से उगटाना , निपटाना होगा। और यह दो हजार साल पहले भी हुआ , सात सौ साल पहले भी हुआ और आज भी हो रहा है और कल भी होता रहेगा।
मैं – दो हजार वर्ष पहले भी नेहरूवाद…
भुं. बौ – तू भी न पिंडालू , घुँइया खाके बात करता रहता है।
मैं – क्यों ?
भुं. बौ -नेहरूवाद नहीं प् र…
मैं -पर क्या ?
भुं. बौ – देखो देवर जी ! बौद्ध धर्मियों ने जातक कथाएं या बौद्ध साहित्य में बुद्ध को महान दिखने हेतु क्या किया ?
मैं – बौद्ध साहित्य में बुद्ध के सामने सनातन धर्म के मुख्य प्रतीकों को बुद्ध के सामने घुटने टिकाये गए दिखलाया गया
भुं. बौ – बिलकुल सही बुद्ध के सामने ब्राह्मण , राजपूत व धनी बैश्यों को बुद्ध के सामने बौने दिखाए गए वास्तव में उनकी बेज्जती ही की गयी और इसे कहते हैं ब्राह्मणवादी सनातन धर्म की बिरासत को बुद्ध के सामने समाप्त करना। और यह साहित्य जनता के बीच प्रचारित भी किया गया , बौद्ध भिक्षुओं द्वारा।
मैं – हाँ एक वाद द्वारा दूसरे याने प्राचीन वाद को नष्टीकरण का रकार्य बौद्ध धर्मियों ने किया कि नहीं ?
भुं. बौ – अरे वाह देवर तो भाभी को बिल्कुल समज गे। बधाई।
मैं – चेला आपका
भुं. बौ – फिर ज़रा याद कर , वैष्णव धर्मी श्रीमद भगवत को इसमें भी तो
मैं -इसमें क्या ?
भुं. बौ – हैं बिचारा तू वैष्णवी होकर भी नहीं समझा।
मैं -क्या
भुं. बौ – श्रीमद भागवत याने वैष्णव धर्मी पोथी। इसमें वेदों के देव राज इंद्र की बेज्जती की गयी और इंद्र से उप्पर विष्णु या विष्णु अवतार को स्थान दिलवाया गया कि नहीं ?
मैं – हाँ हाँ महभारत व तमाम वैष्णवी साहित्य में इंद्र की बेज्जती ऐसी की गयी कि इंद्र के मंदिर ही नहीं निर्मित हुए यहाँ तक कि राजाओं के सिक्कों में इन्द्र को सफाचट गुम कर दिया गया। यह था वैष्णवी करता धर्ताओं का वेदों के प्रतीकों को ध्वस्त करने की कथा।
भुं. बौ – ब्वा भई ब्वा।
मैं -हूँ हूँ
भुं. बौ – फिर इस्लामिक राजा आये तो उन्होंने क्या किया ?
मैं – इस्लामिक राजाओं ने हिन्दू धर्म या सनातन या बौद्ध, जैन धर्मी प्रतीकों को नस्ट किया व अपने प्रतीकों को आगे लाये।
भुं. बौ – सही वे सही थे क्योंकि शासन में धनद से अधिक प्रतीकों का महत्व होता है। किसी के भी आस्था प्रतीकों को ध्वस्त कर दो और शासन कर लो यह है शासन की रीति।
मैं – हाँ हाँ
भुं. बौ -अंग्रेजों ने भी भारतीय प्रतीकों की बुनयाद हिलायी और शासन किया कि नहीं ?
मैं -हाँ हमारे प्रतीकों का इतना नष्टीकरण किसी काल में नहीं हुआ अब भी वर्तमान में हम अपने प्रतीकों को स्वयं नष्ट करने पर तुले हैं।
भुं. बौ – जरा कार्ल मार्क्स का धर्म संबंधित सिद्धांत तो टटोलो।
मैं -मार्क्स ने कहा था बल धर्म एक अफीमची का नशा है।
भुं. बौ -मार्क्स ने भी धर्म पर आघात किया याने धर्म की बिरासत को मटियामेट करने की चेस्टा की तभी मार्क्स प्रसिद्ध हुआ कि नहीं ?
मैं – हाँ धर्म व कैपिटलिज्म की चूल हिलायीं तो ही मार्क्स प्रसिद्ध हुआ।
भुं. बौ – जरा तमिल नाडु में द्रविड़ दलों का इतिहास टटोलो तो सही ?
मैं – हाँ सभी द्रविड़ दलों ने नेहरू विरासत को समाप्ति पर जोर दिया।
भुं. बौ – और आंध्र में ?
मैं – तेलगु देशम याने नेहरू विरासत को नेपथ्य में धकेलना
भुं. बौ – और मुलायम सिंह , चारा श्री लालू यादव ने क्या किया ?
मैं – लोहिया काल से ही नेहरू वाद की नींव खपचयी जा रही थी इन यादवों ने आखरी कील ठोकीं नेहरूवाद पर। इन लोहियावादी राजनीतिज्ञों ने भी नेहरू विरासत को ध्वस्त करने की पूरी चेस्टा की अब कॉंग्रेस के साथ हैं। ..
भुं बौ -होने को तो अब डीएमके भी फिरोज गाँधी पोते पोतियों के संग है पर एक सत्य है द्रविड़ आंदोलन वास्तव में नेहरू वाद के खिलाफ ही था। नेहरू के सामने ही चुनौती दी गयी थी। इसी तरह भारत में बामपंथी तो नेहरू वाद क्या मोहन दस करमचंद गाँधी वाद को ही नष्ट करने को संलग्न थे
मैं – हैं गाँधीवाद की जगह मोहन दस करमचंद गाँधीवाद बोल रही हैं ?
भंु क्योंकि फिरोज जहांगीर गाँधी के परिवार वास्तव में गाँधी वादी हैं ही नहीं अपितु नेहरूवादी है इसलिए आज से मैं गांधीवाद की जगह सदा मोहन दस करमचंद गाँधीवाद कहूंगी।
मैं – तो ?प्रियंका का रोना गलत है क्या ?
भुंदरा बौ – बिलकुल ! अरे जिस नेहरू खानदान ने महात्मा गाँधी की बिरासत को ही मिट्टी में मिला दिया हो उसे नेहरू की आलोचकों की आलोचना का क्या अधिकार ? उल्टा नेहरू , फिरोज जहांगीर परिवार को धिक्कार जिन्होंने महात्मा गांधीवाद को नेहरूवाद से समाप्त किया
मैं मतलब कॉंग्रेस को हटाना है तो विरोधियों को नेहरू लिगेसी समाप्त करनी ही होगी ?
भुंदरा बौ – द्रविड़ आंदोलन, तेलगु देशम आंदोलन , , बामपंथ आंदोलन , जनसंघ आंदोलन , ममता आंदोलन , यादवो द्वारा तथाकथित समाजवादी आंदोलन , केजरीवाल आंदोलन , मायावती आंदोलन तो यही शिक्षा दे रहा है कि कॉंग्रेस विरोधियों को कॉंग्रेस की जड़े हिलानी हैं तो नेहरू की विरासत को जनता के मन से उतारो।
मैं बिचारि प्रियंका बाड्रा !
सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती 24 अप्रैल 2019
कृपया इस लेख को दलगत राजनीती दृष्टि से न देखकर प्रतीकों का पर्टकों का नष्टीकरण कैसे किया जाता है दृष्टि से देखें

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