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Apr
26

सुरजेवाला का खम्बा नोचना,अपना सर फोड़ना और राहुल जी लहूलुहान !

सुरजेवाला का खम्बा नोचना,अपना सर फोड़ना और राहुल जी लहूलुहान !
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व्यंग्य – भीष्म कुकरेती
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कैपणि बोल हैं बल जब असहाय फील करें तो बिल्लियों को खम्बे को नोचना चाहिए। आजकल कॉंग्रेस को देखकर एक नई कहावत आ चली है बल राजनैतिक विरोधी कोई अभिनव काम करे तो उस माध्यम , उस उद्द्येश्य को ही गाली दो जो माध्यम विरोधी अपना रहा है।
24 अप्रैल के दिन भारत में पोलटिकल मार्केटिंग में एक बिलकुल नया प्रयोग हुआ कि अभिनेता अक्षय कुमार द्वारा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का साक्षात्कार सारे टीवी चैनल दिखा रहे थे। मार्केटिंग का प्रोफेसनल होने के नाते मैं तो इस प्रयोग को इक्कीसवीं सदी का विपणन में एक अभिनव प्रयोग ही मानूंगा। सभी टीवी चैनलों ने इस साक्षात्कार को सारे दिन भर कई बार दिखाया। इन टीवी चैनलों ने इस साक्षात्कार को इसलिए सरे दिन भर नहीं दिखाया कि यह मोदी जी का या अक्षय कुमार का इंटरव्यू है बल्कण में टीवी चैनलों को इंटरव्यू प्रसारण के समय ही पता लग रहा था कि दर्शक चॅनेल से हुक हो गए बंध गए हैं। यहाँ तक कि हिंदूवादी विचारधारा धुर विरोधी चैनल NDTV को भी इंटरव्यू दिखाना पड़ा व इस इंटरव्यू पर नकारात्मक ही सही बहस तो चलानी ही पड़ी क्योंकि यह इंटरव्यू टीआरपी खिंचाऊ इंटरव्यू जो था , दर्शक पिड़ -पिड़ टीवी चैनल देख रहे थे।
कॉंग्रेस के महान विचारक सुरजेवाला का महान विचार भी दर्शकों को सुनने को मिला बल मोदी अक्षय कुमार से बड़े नाटककार या फेल नेता आदि आदि। बेचारे सुरजेवाला ने गुस्से में , खुन्नसमें , निराशा में खम्बा इतने जोर से नोचा कि बेचारे राहुल जी क्या प्रियंका ही लहू लहान हो गए। खम्बा नोचु प्रवक्ता सुरजेवाला ने प्रयोग (नए तरह का इंटरव्यू ) को ही गली दे डाली , प्रयोग की ही ऐसी तैसी कर डाली। सुरजेवाला को वरोध अवश्य ही करना चाहिए इसमें कोई बेवकूफ पप्पू सप्पू भी प्रश्न नहीं करेगा कि सुरजेवाला बिलाव खम्बा क्यों नोच रहा है किन्तु सुरजेवाला के शब्द तीखे थे प्रभावशाली न थे कि दर्शक इंटरव्यू से घृणा करते उलटा कॉंग्रेसी दर्शक भी टीवी के पास आ धमके और टीआरपी बढ़वा गए। बेचारे सुरजेवाला गए थे राहुल जी के लिए पीने के लिए घी लेने और मोदी पर इतना गुस्स हुए कि राहुल जी के लिए मिट्टी तेल ले आये । कॉंग्रेस विरोधी पार्टी है और कॉंग्रेस का काम है भाजपा या मोदी के कमजोर पक्ष पर भयानक से भयानक आघात करना। ‘राफेल घोटाला ‘ या ‘चौकीदार चोर’ वास्तव में मार्केटिंग दृष्टि से प्रशंसनीय आघात है किंतु आघात हेतु कॉंग्रेस को नए अभिनव प्रयोग करने चाहिए था। राजनैतिक संचार संवाद में समाचार बनना सबसे बड़ी कामयाबी मानी जाती है किन्तु 2019 चुनाव में कोन्ग्रेस ने कोई नया प्रयोग न कर दिखा दिया कि कॉंग्रेस में सोच बुढ़ा गयी है, बृद्ध सोच कॉंग्रेस की कमजोरी बन गयी है । कॉंग्रेस को तीर व धनुष भी नए लाने चाहिए थे जैसे नए एग्रेसिव स्पोक्सपर्सन लाये।
पोलिटिकल मार्केटिंग में सरकारी दल या बड़ा दल अपने पर ही आघात करता है याने नए नए माध्यम या न्यूज बनता है। अक्षय कुमार पीएम का इंटरव्यू ले रहा है यही बड़ी न्यूज थी। विरोधियों द्वारा इंटरव्यू बेकार था , इंटरव्यू में भूसा था , बकवास इंटरव्यू या अब मोदी को बादी , बादण , नचनिया (फिल्म वाले ) का सहारा लेना पड़ रहा है जैसे व्यक्तव्य कुछ नहीं खम्बे नोचकर अपने को ही लहूलुहान करने वाले व्यक्तव्य थे। पोलिटिकल मार्केटिंग में मोदी तो जीत ही गए ना !
‘अक्षय – मोदी साक्षात्कार’ पर विरोधी प्रवक्ता इतने गुस्सिया रहे थे इतना बौरा रहे थे जैसे कोई इनकी कोई धरोहर भगा कर ले गया हो। वास्तव में इन विरोधियों का रोष ऐसा ही था जैसे पड़ोसियों की मकई खूब हुयी हो और ये महाराज अपने दादा पड़ दादा को गाली देता हो बल हमारे लिए अच्छे उपजाऊ खेत क्यों नहीं छांटे !

सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती , 26 अप्रैल 2019
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