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Apr
29

बिसिरि न रे

बिसिरि न रे

कवि नाम : विजयलक्ष्मी बमोला
Poetry by : Vijayalakshmi Bamola
(Chronological History of Garhwali Poem, verses)
s = आधी अ
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला – )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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बिसिरि न रे
जनि वोट मंगणौ बगत
शरू ह्वेगे नेतौं चमरट
येकी जि सूणा कि वेकी जि
ळम खुणै जि ह्वेगे रगर्यट
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बड़ा बड़ा नेता आणा छन गौं मा
छ्वटा बड़ाs टप प्वड़ना खुटों मा
हौरि दिन त हिट नि सकदा
अबारि सड़म उगड़ना भीटों मा।
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उंदार नि द्यखणा उकाळ
हाथ जोड़ी रिंगणा धार खाळ
इन्नो करला हम उन्नो सरला हम
बस बोली कै चली जांदि हर साल
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वोट त दीणा छवां त्वे
पर सूणी ल्हे अंक्वै
गौं -गाळों बिसरि न रै
हैंका दा आणो हक्क नि ख्वे।
( आभार – चिट्ठी पत्री , जुलाई दिसंबर 2002 , पृष्ठ 29

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