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May
21

नि बिसरण वळ ढांगूs पाण्युं समळौण – 1

नि बिसरण वळ ढांगूs पाण्युं समळौण – 1

जसपुर , ग्वील , सौड़ , बड़ेथ का कुछ जल स्रोत्र -1
(उन पंद्यर /जल सोतों को नमन जो तब प्यास बुझाते थे )
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ढांगू सांस्कृतिक इतिहास – भीष्म कुकरेती
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आजै साखी तै जल स्रोतों , जल सोतों या पाणि छोयों महत्व पता नि किलै आज पाणी बोतल ऐ गेन , घर घर गाऊं म नळ ऐ गेन। किन्तु 1975 तक यात्रा या गोर चराण व अन्य कृषि काम म प्राकृतिक जल स्रोतों या जल सोत या छोवा , नौल्यूं आवश्यकता भौति अधिक छे।
जसपुर , ग्वील , बड़ेथ का कुछ पाणी सोत
हमर गाँव का मुख्य द्वी धरड़ , मुड़ी पाणी अर मथि पाणी तो हर तरां की तीस बुझांदा छा । जन हौर गां का पंद्यर। डिस्ट्रिक्ट बोर्ड सड़क पर अर महादेव चट्टी -सिंगटाळी मार्ग पर यु पाणी छौ तो यात्रियों का वास्ता अमृत दायी छौ। मैल पाणी म पानी कूल से आंद तो अर ऊंचाई खूब छे। इन बुले जांद बल मगर स्व लोकमणी बहुगुणा जी न दान दे थौ। एक छुटु शिलालेख बि थौ पर मीन नाम नि बाँची। मोटर सड़क आण से यु पाणी खंड मंड ह्वे गे अर 9 ” x 9 ” को शिलालेख कख गे यु भगवान तै बि नी पता। हम अपण इतिहास की क्या कीमत समजदां यु जसपुरौ मथि पाणी धार मगर को शिलालेख की तौहीन से पता चलद। जब धन नि छौ अर पत्थरौ मगर निर्मित करण मकान निर्माण बरोबर ही छौ तब लोकमणी ताऊ जीन मगर दान दे तो बहुत बड़ी बात छे और आज हमम यु शिलालेख हूण से हम तब की जातीय आर्थिक दशा , हमर पुरखों द्वारा ग्राम समाज का प्रति अपण भागीदारी , पर प्रकाश पड़ सकद छौ किन्तु सब खंड मंड। स्व लोकमणी बहुगुणा (जन्म 1900 का करीब ) अपण बगता बड़ा ज्योतिषाचार्य छा मतबल त्रिविज्ञ छा। ज्योतिष गणित म ऊंक मुकाबला म अमाल्डु डबराल स्यूं का स्व जयराम उनियाल ही छा। याने ऊं तै मगर कखन लाण अर कन लाण को ज्ञान बि छौ। फिर शिलालेख पर लेख गुदणो काम जसपुर म ह्वे या भैर ह्वे ईपर बि जसपुरौ इतिहास मौन च। इनि नासमझी म झणि कथगा ऐतिहास गवाह वस्तु खतम करि दिनी धौं। ये जल स्रोत्र से जसपुर वळ धन , प्याज की खेती करदा छा अर इख्मी जसपुरम मुख्य पणचर जमीन छे बस ।
ये मुख्य पंद्यर का मथि द्वी जल स्रोत्र हौर छा एक स्रोत्र तौळ त हौज बि बण छौ जु कुल्याणो काम आंद छौ। पलायन का कारण यूँ स्रोत्रों पर ध्यान नि दिए गेन तो सूख गे छ अर अब केवल एक स्रोत्र बच्यूं च जख से नळ अयाँ छन किन्तु एक समस्या जु मि दिखणु छौं बल ये पाणीन सुखण च। ये स्रोत्र का ऊपर कुळैं जंगळ ऐ गे याने ये जल स्रोत्र की बेसमय मौत निश्चित च। यदि जसपुर वाळ मिथाळ अर बांजै जंगळ नि लगाल समझो कुछ समय बाद यु स्रोत्र इतिहास बण जाल। चूँकि अब गढ़वाली कहावतें नई साखी का पास नि रै गेन तो जल बचाव का कोई पारम्परिक ज्ञान नी च तो जल स्रोत्रन समाप्त हूणी च
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