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May
22

क्षत -विक्षत , घायल विपक्ष EVM पर भगार क्यों लगा रहा है ?

क्षत -विक्षत , घायल विपक्ष EVM पर भगार क्यों लगा रहा है ?

(एक्जिट पोल या असलियत भांप कर ! )
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हिंदी घपरोळ : भीष्म कुकरेती
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जैसे ही 19 मई संध्या से टीवी चैनलों में एक्जिट पोल रिजल्ट आये मोदी विरोधी खेमों व उनके ठकुड़खोरों के मुंह से EVM पर लांछन , अभियोग व भगार के तीर चलने लगे। 21 मई को सभी क्षत विक्षत दलों के नेता लुहू लुहान स्थिति में चुनाव आयुक्त के पास क्या करने गए पता नहीं किन्तु प्रेस कॉन्फ्रेंस से पता चला बल EVM पर लांछन लगाने गए थे।
विपक्ष वास्तव में EVM को माध्यम बनाकर अपनी नाकमयाबियों को लुकाने छुपाने का असफल कार्य कर रहा है।
भरत से भागता वामपंथ सबसे पहला कारण है। प्रत्येक विपक्षी दल में शातिर , शैतान वामपंथी थिंक टैंक बैठा है और वह जनता है भारतीय जनता वामपंथ को बिना हिंसा के सात समुद्र पर डुबाने तैयार है। शातिर वामपंथी थिंक टैंक नहीं चाहता कि सभी भारतियों को पता चले कि विपक्ष की हार याने शातिर वामपंथी थिंक टैंक की असफलता। इसलिए EVM पर लांछन लगाकर बामपंथी थिंक टैंक जिन्दा रहना चाहता है।
कर्नाटक में जेडीएस -कॉंग्रेस सरकार गठन पर विपक्ष ने एकता दर्शन का फोटो सेसन किया जो बाद में कोलकत्ता में ममता बनर्जी की एक रैली में भी फोटो सेसन चला। किन्तु चुनाव एकता के इन पुरोधाओं की पोल खुल गयी। केरल -बंगाल में बामपंथ व कॉंग्रेस का गठबंधन हुआ ही नहीं, उत्तर प्रदेश में भी बुआ बबुआ ने शहजादे को बैठने को दर्री तक नहीं दी , कजीरवाल -शहजादे गठबंधन के नकली समाचार चलवाते रहे किन्तु खटास कैसे जाती ? दिल्ली में भी कजीरवाळ व शहजादे में गठबंधन नहीं हुआ। ममता बनर्जी ने शहजादे को बैठने हेतु दर्री तो छोडो एक तिनका भी नहीं दिया। बिहार में लालू नहीं चाहते थे बल उनके राजकुमार तेजश्वनी के समानांतर राष्ट्रीय स्तर पर कन्हय्या नेता चुनाव जीते अतः बिहार में भी विपक्षियों का बड़ा गठबंधन न बन स्का। उल्टा लालू ने कन्हय्या को हरवाने के लिए कई प्रपंच्च लड़े। चंद्र बाबू नायडू जो टीवी चैनलों में बिपक्ष गठबंधन का सर्वे सर्वा बन कर ऐंठ रहा था उसने भी दुर्योधन बन फिरोज जहांगीर गांधी के पौत्र की पारिवारिक पार्टी को पांच गाँव भी नहीं दिए आंध्र में भी फिरोज गांधी की पारिवारिक पार्टी व चंद्र बाबू नायडू की पारिवारिक पार्टी में भी दिखने को ठग बंधन नहीं हुआ। महाराष्ट्र व तमिलनाडु को छोड़ कहीं भी फिरोज जहांगीर परिवार की पार्टी व अन्य परिवारों की पार्टियों में कोई गठबंधन न हुआ। अब जब विपक्ष को आशंका हो गयी कि वे चुनाव हार रहे हैं तो सबसे बड़ा प्रश्न जनता पूछने वाली है – मूर्खो ! जब गठबंधन आवश्यक था तो तुमने गठबंधन क्यों नहीं किया ? और जनता इस प्रश्न पूछने में भरमा जाय हेतु विपक्ष द्वारा EVM का सहारा लिया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त फिरोज जहांगीर गांधी परिवार की जागीर पार्टी जो राष्ट्रिय स्तर पर सबसे बड़ी पार्टी थी ने मोदी आक्रमण में मोदी छोड़ बाकी विषयों में ढुल मुल नीति अपनायी। फिरोज पौत्र या फिरोज पौत्री किसी एक नारे पर केंद्रित नहीं रहे कि जनता मध्य कोई हव्वा बनती।
माया अखिलेश, ममता , तेजश्वनी , तृण मूलियों, बामपंथियों ने या उनके टुकड़खोरों ने बहुत बार क्या हर बयान में बेरोजगारी की बात उठायी किन्तु बेशर्मों की बेशर्मी देखिये सन 1977 से सयुंक्त उत्तर प्रदेश , सयुंक्त बिहार, बंगाल में इन्ही दलों का राज रहा और आज भी इन्ही प्रदेशों से बेरोजगारी के कारण सर्वाधिक पलायन हो रहा है । बेरोजगारी तर्क जनता मध्य मोदी विरोध में तीर न बन सका क्योंकि बेरोजगारी मिटाने हेतु इन बेशर्म पार्टियों के पास कोई विकल्प न था , ना ही आज है । अब अपनी बेशर्मी लुकाने हेतु EVM को बलि का बकरा बनाया जा रहा है
मोदी का राष्ट्रवाद बुरा है या भला इस पर बहस हो सकती है किन्तु सभी प्रजातांत्रिक पारिवारिक जमींदारों के पास राष्ट्रवाद के विरुद्ध या समांतर कोई विकल्प न था कि मोदी को हरा सकें
विकास विकास वास्तव में मोदी निर्मित मुद्दा है ही नहीं हर भारतीय गाहे बेगाहे विकास विकास बरड़ाता रहता है। विपक्षी दलों विशेषतः फिरोज जहांगीर गांधी परिवार की प्राइवेट प्रॉपर्टी कॉंग्रेस नव विकास हेतु कोई विकल्प न दे सकी।
फिरोज गांधी के पौत्र व पौत्री किसानों के दुखों पर मगर मच्छी आंसू बहाने में अवश्य सफल हुए किन्तु इन दोनों मूर्खों ने जनता को कभी यह नहीं बताया कि वे कौन से उपाय हैं जो किसानों की दशा सुधरने में सफल होंगे। उपायविहीन रोदन करना अब फिरोज गांधी पौत्र -पौत्री का धर्म बन गया है।
एक्जिट पोल सही निकलता है गलत यह तो 23 मई के 12 बजे ही पता चलेगा। किन्तु विपक्ष डरा है और अपनी कई नीतिगत नाकमयाबियों छुपाने लुकाने हेतु EVM हथकंडा अपनाने को मजबूर है।
23 मई के बाद कई नए खेल होंगे जो हमे देखने को मिलेंगे।

Copyright @ Bhishma Kukreti मई 2019
विपक्ष क्यों ईवीएम पर ठीकरा फोड़ रहा है पर लेख

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