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Jun
28

शहरों में सड़क जल संचयन आवश्यक

शहरों में सड़क जल संचयन आवश्यक

(Urban Road Side Water Harvesting )
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विमर्श : भीष्म कुकरेती
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भारत पेय जल कमी को वर्षों से झेल रहा है और कारण सामने दीखते हैं।
भारत की कुल जनसंख्या संसार की जनसंख्या का 16 % है
भारत में संसार के पेय जल का हिस्सा कुल 4 % है याने 12 % पेय जल की कमी तो पेय जल की उपलब्धि से ही है
भारत में बगैर योजनाओं के शहरीकरण होने से जल संकट गहराता जा रहा है। शहरों या कारखानों को जल ग्रामीण क्षेत्रों से ही मिलता है याने शहरियों ने प्राकृतिक जल स्रोत्रों पर अधिकार किया हुआ है।
भारत की सबसे बड़ी समस्या है कि भारत वर्षा जल का केवल 6 % ही वर्षा जल का संचयन करता है जबकि सामन्य विकसित देश वर्षा जल का 250 % वर्षा जल को संचयित कटने में सफल हुए हैं।
शहरीकरण से भूमि को सीमेंट कंक्रीट से पाट दिया है और जल संचयन की समस्या पैदा कर दी है। भारत में वर्षा जल की कमी नहीं है किन्तु जल संचयन न होना समस्या भारत में जल संकट पैदा कर रहा है. सरकारी योजनाओं का भी दुरपयोग जैसे गांवों में वर्षा जल संचयन हेतु जो मदद सरकार करती है बहुत से परिवार उससे व्यक्तिगत टंकी बना देते हैं।
यह एक बिभीषिका ही है कि शहर में वर्षा ऋतू जल भराव समस्या से जूझते हैं और ग्रीष्म ऋतू में भूमिगत जल समस्या से जूझते हैं।
शेरोन में जो परम्परागत जल संचयन संसाधन थे जैसे कुंए , तालाब , रौखट /खाळी/बॉडी थे वे अब प्रायः समाप्त कर दिए गए हैं या पाट दिए गए हैं , भूमि को कंक्रीट से पाट देने से , बृक्षीकरण में भयंकर कमी आने से जल संचयन वास्तव में ना के बराबर ही है। अमीर जनसंख्या भूमिगत जल याने ग्राउंड वाटर को उपयोग हेतु मोटर आदि प्रयोग क्र ग्राउंड वाटर लेवल कम करने में कोई कस्र नहीं छोड़ रहे हैं। याने शहर भूमिगत जल /ग्राउंड वाटर भी अपरोक्ष रूप से ग्रामीण क्षेत्र से ही चूस रहे हैं।
हर भारतीय शहर जनसंख्या दबाब सहन कर रहा है। गरीबों हेतु जल वास्तव में बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
विशेष वर्ग भूमिगत जल /ग्राउंड वाटर को चसोड़ता जा रहा है किन्तु यह विशेष वर्ग भूमिगत जल वृद्धि हेतु रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहा है।
श्हरों में खली जमीन न होने से 80 % प्रतिशत से अधिक वर्षा जल नालों से बहकर नदी या सीधे समुद्र में बाह जाता है और भूमिगत नहीं हो पाता है।
आज आवश्यकता है कि हर शहर में प्रत्येक भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जबरन हो और नगर पालिकाएं सड़क वर्षा जल जल संचयन/ road water harvesting की योजनाएं बनाकर जल संचयन करें।
सड़कों द्वारा वर्षाजल समुद्र में चला जाता है तो इस वर्षा जल को भूमिगत करना अति आवश्यक है।
गटर /नालों में गड्ढे / बनाये जांय जो वैज्ञानिक ढंग से वर्षा जल को भूमिगत जल में मिला दे और भूमिगत जल स्तर बढ़ा सके। इन गड्ढों में स्तिथि अनुसार फिलटर व रिचार्जिंग सिस्टम होने आवश्यक हैं।
यदि आज से ही नगर पालिकाएं सड़क जल संचयन urban road water harvesting पर ध्यान नहीं देंगे तो आने वाले दिन जल संकट में वृद्धि ही करेगा।
समाज व सामजिक संथाओं को नगर पालिकाओं पर अति दबाब बनाना चाहिए कि हर नगर पालिका रोड वाटर हार्वेस्टिंग हेतु योजना बनाये व उन योजनाओं को धरातल पर उतारे भी।

भारत सरकार व राज्य सरकारों को नियम परिवर्तन भी करने चाहिए जिससे प्रत्येक नगर पालिका जल संचयन को प्राथमिकता दे।
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Copyright @bhishma kukreti June 2019

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