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Jul
10

चेक डैम श्रृंखला भूमिगत जल संचयन हेतु आवश्यक

चेक डैम श्रृंखला भूमिगत जल संचयन हेतु आवश्यक
Series of Check dams for ground water recharge

जल बचाओ श्रृंखला -10
Water Conservation series – 10

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विमर्श : भीष्म कुकरेती
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ढलानों में पहाड़ी क्षेत्रों में व सूखे क्षेत्रों में चेक डैम निर्माण सदियों पाहे ही शुरू हो गया था। ढलानों में गड्ढे , खाळी व जल धारा को गदन से खाली धरती पर लेजाकर भूमिगत जल स्तर वृद्धि भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। चेक डॉम याने वह निर्माण जिससे नाले व नदी की तीब्र धारा पर प्रतिरोध लगे और जल संचय हो या भूमिगत जल संवर्धन हो। । चेक डैम निर्माण प्रथा हरप्पा सभ्यता से पहले मौजूद थी। कौटल्य के अर्थ शास्त्र में स्थायी व अस्थायी जल भंडारण का उल्लेख मिलता है। कल्हण साहित्य से पता चलता है कश्मीर में डैम निर्माण विधि आठवीं नवीन सदी में भी अपनायी जाती थी।
चेक डैम कई विधियों व तकनीक से निर्मित होते हैं।
आम चेक डैम निर्माण वहीं निर्मित होते है जहां दस एकड़ भूमि आवश्यक है और चेक डैम की गहराई कम से कम दो फ़ीट होती है। अधिक से अधिक 6 फ़ीट की गहराई होती है। चूँकि चेक डैम अस्थायी निर्माण होता है अतः निर्माण सस्ते मटीरियल प्रयोग होते हैं जैसे मिटटी पत्थर , सीमेंट आदि।
चेक डाम से जल गति कम होती है अतः भूमि संरक्षण हेतु चेक डैम ा आवश्यक होते हैं।
चेकडैम बाढ़ रोकने में सक्षम होते हैं।
बहुत बार चेक डैम श्रृंखला से नाले में बहुत देर तक जल बहाव होता रहता है तो जल कमी दूर करने में चेक डैम उपयोगी होते हैं।
चेक डैम से भूमिगत जल स्तर वृद्धि होती है।
चेक डैमों में यदि हानिकारक रसायन जल प्रवेश करे तो वह हानिकारक होता है।
चेक डैमों का रख रखाव व डैमों से मिटटी बाहर करना भी आवश्यक है

Bhishma Kukreti July 2019

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