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Jul
16

सुदामा चरित नाटिका ( गढवालि भाषा मा

सुदामा चरित नाटिका ( गढवालि भाषा मा ) नरोत्तम दास जी से प्रेरित
Garhwali Drama by Sachida nand Semwal
स्टेज मा सुदामा अर वूं कि पत्नी सुशीला टूटीं फूटीं झोपडि का भीतर बेठ्यां छन ।
सुशीला कु सुदामा से – ( दोहा )
हे स्वामी जी कृष्ण तुमारा , बचपन का छन मीत ।
दीन दयाल छन प्रभु , करिल्या वूं से प्रीत ।।
गाना – लय – केल बजै मुरूली ।
दु:ख होयुं च अति भारी , हो स्वामी हथ जोडिक बिनती ।
द्वारिका का नाथ स्वामि , कृष्ण जि भगवान ।
दु:ख दरिद्र हरि देंदा दिन दयाल नाम ।
जावा हो स्वामी जी तुम तख , हथ जोडिक विनती ।
सुदामा कु सुशीला से – गाना
लय – द्वी हजार आठ भादों का मास ।
सुण मेरी बामणी प्राण पियारी ।
समझोंदु त्वेकु तें मेरी बामणी ।।
सुख अर दु:ख होंदा जीवन का साथी ।
भगतों का मुख से या बात नि स्वांदी ।
सुशीला कु गाना -
सूणा बामण प्राण आधार मि लांदू विनती ,
जावा जावा जावा दुं स्वामी कृष्ण जी का पास
अन्न का कुठार द्यौला धन का भण्डार ।
सुदामा – जब तु लगीं च मेरा पैथर कि जा जा जा जाण क , त मि जोलु कृष्ण जी का पास पर ल्याण क्या च ? यख त द्वी दाणि चौंलु कि भी नी ।
सुशीला – तुम तैयार होवा अर मि परखोला कि दीदी मुंगे चौंल पैंछा गाडी ल्योंदू ।
सुशीला स्टेज बटि भैर आंदि परदा बंद होंदु अर भितर परखोला कि दीदी कु कमरा फेर तैयार ।
परखोला कि दीदी – दोहा -
बामणि बैंण कख बिटी , आई यख तू आज ।
झट पट बतलै दे भुलि , क्या च तेरु काज ।।
सुशीला – तेरा बामण जी आज कखि जाणा छया । दीदी ! द्वी मुठि चौंल पैंछा दी दे ।
वु दीदी खुशी से द्वी मुठि चौंल देंदि अर सुशीला घौर जैक सुदामा तें दीक वूं तें द्वारका भेजदी ।
सुदामा जी द्वारका पौंछदा । लोगों तें पूछीक पाण्डाल मा कृष्ण दरवार का द्वारपाल से बोलदा – दोहा -
हे चाकर जी भगवान तें , ली जा यो रेबार ।
दीन सुदामा भैर मूं , करणु तुमारी याद ।।
द्वारपाल भितर जै कि कृष्ण से – महाराज ! भैर मूं यौक गरीब बामण आंयूं च उ अपडु नौ सुदामा बतौणू ।
कृष्ण जी सुदामा कु नाम सुणदी दरवार छोडिक अपडा दगड्या का पैरूं मा सेवा लगैक गला मिलदा ।
कृष्ण कु सुदामा से –
तर्ज – जौं भयुं कि होणि होलि ऊ कठा राला ।
पैलागु सुदामा तुम कख बे आयां ,
कन खुद मिटाई त्वेन हे दगड्या ।
आज तक यख नि आया कख रंया ?
यूं खुट्युं का हाल यन कख होंया ।
तुमारि हालत देखि ओंदि दया ।
कृष्ण जी सुदामा तें अपणा आसन मा बिठैक पाणि कि परात मंगौंदिन अर रौदा रौंदा वूं का पैर धौंदा ।
फिर खाण हूण खिलैक बेठाल्दा । फिर सुदामा से वैका बदन मा टटोलि कि बोलदा गाना -
कख लुकायो ऐ सुदामा , भाभि न भेजी छो मि कु कलेवा ।
स्कुल मा त्वेन चना चबैन , मिकु नि दीन्या अफ्वी खैन ।
देखा दुं अब त बुड्या ह्वे गेन , पुराणि आदत कखि नि गैंन ।
अर चौंलु कि पोटली मां बटि द्वी मुठी चौंल खे देंदान , तीसरी मुट्ठि खाण से पैलि रुक्मिणी कृष्ण जी कु हाथ रोकदी द यु गाना बोलदींन – लय – नीरू घिंघोरा कि दाणि खेजा ।
स्वामि जी जरा तुम रुका दूं ,
सोचि बिचारिकि काम कनू ।
द्वी लोक दील्या तुम दान यनू ,
अफूक नी चैंदू ठौर जनू ।
अब सुदामा – अच्छू मि अब घौर चलदू मेरी घरवालि मेरु इन्तजार ह्वलि कनी ।
कृष्ण पाण्डाल का रस्ता तक सुदामा तें भेजण क आंदा अर यु गाना बोदा – लय – आज चलि जौलू , भोल चली जोलू , परस्यों तें चली जोलू । कबूतरी देवी ।
जावा मेरा भैजी जावा तुम घौर , नाराज ना होया ।
भाभी जि तें द्वी हाथ जोडीक , परणाम बोलि दींया ।
बाटा घाटा पुन समलीक जाण , ढ्वौल अर ढुंगु देख्या ।
कुशल रौला फिर भेंट होली , आशीष देई जाला ।
नी होयी सेवा भक्ति हमूं से , नाराज नी होण ।
कुशल रोला फिर सेवा करला , आशीष देई जैया ।
रौंदा रौंदि कृष्ण वापिस अपणा दरवार मां आंदा अर सुदामा जी चली जांदा । परदा बंद ।
सुदामा जी कु रास्ता मां गाना -
तरज – ” तुम्ही मेरा मंदिर तु ही मेरि पूजा ” वाला गाना कि चार ।
नि जांदू नि जांदू मैं त , तती बोलि मैंन ।
बणीगे पर्वाण स्या त , जिदी करी तीं न ।
निरदयी च कृष्ण तू त नि च त्वैकु दय्या ।
चिफली च घिच्ची तेरी बोद फिर अय्या ।
स्टेज मा अनेक सेविकाओं दगडि सुशीला सजी धजी क बैठीं च । पाण्डाल मा भैर बे सुदामा जी आंदा अर गीत गांदा – लय – उडी जा कागा बादलों बीच वाला गाना से मिलती जुलती
कख होली मेरी स्या टूटीं झोपडी ,
या सुध नी रे मी तें अपडी ।
क्या भूलि गौं मि बाटु वो घर कू ,
कख होलि मेरी बामणी प्यारी ।
सुशीला भैर ऐक सुदामा तें सेवा लांदि अर दोहा बोलदी -
हे स्वामी जी देखा दूं , लीला कृष्ण अपार ।
राज पाट दीले हमु कु , करली हमारु उद्धार ।
Copyright@ Sachida Nand Semwal, 2019 Garhwal Uttarakhand ,
Garhwali drama Sudama Krishan Charitra

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