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Jul
29

नै तरां साहित्य आलोचना पर बि ध्यान दीण जरुरी च !

नै तरां साहित्य आलोचना पर बि ध्यान दीण जरुरी च !
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विमर्श – भीष्म कुकरेती
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सूचना माध्यम अवतरण परान्त नै तरां साहित्य बि अवतरित हूंद। अखबार अवतरण परांत पत्रकारिता साहित्य शुरू ह्वे। इंटरनेट आणो उपरान्त तो भौत सा साहित्य की शुरुवात ह्वे। इंटरनेट या सोशल मीडिया आण से पाठकों म वृद्धि इ नि ह्वे अपितु साहित्यकारों सणि नै बनि आलोचक बि मिलण शुरू ह्वेन।
इंटरनेट कु लाभ या च बल साइत्यकार फटफटाक जाणि जांद बल वेक साइत्य म कथगा जान च , वजन च अर साइत्यन बंचनेरुं तैं कथगा आकर्षित कार , कै रूप म आकर्षित कार इख तक बल यी बि जणे जै सक्यांद बल कथगा संख्या म आकर्षित कार।
इंटरनेट साइत्य म भाषाओं सणि एक नै किस्मौ आलोचक बि मिलणा छन अर या आलोचना च बंचनेरुं आलोचना ज्वा ोऑफलाइन साहित्यम् कम इ दिखणो मिलदी छे। गढ़वाली साहित्य प्रसारण इंटरनेट माध्यम भौत भली अर तीब्र गति से ह्वे। गढ़वाली साहित्य क पुनर्जन्म इंटरनेट ग्रुप जन कि पौड़ी गढ़वाल , कुमाऊं गढ़वाल , यंग उत्तरांचल या मुंबई उत्तरांचल ग्रुप से शुरू ह्वे , ब्लॉग या वेब साइटूंम बढ़ अर फिर नव माध्यम जन कि फेसबुक या व्हट्सप व यूट्यूबम तीब्र वृद्धि ह्वे अर यी सब नव माध्यम दगड़म बंचनेरुं आलोचना बि लैन ज्वा कबि बि पैल गढ़वाली साहित्य म उपलब्ध नि छे। भौत सि जगा तो साइत्य से अधिक महत्वपूर्ण पाठकुं आलोचना दिखे गे।
इंटरनेट माध्यमुं म बंचनेरुं आलोचना का कत्ति पक्ष छन। जनकि –
मुंडळि पौढ़िक टीका टिप्पणी करण वळ अधिक संख्याम छन अर यी पाठक केवल शीर्षक बांचि प्रतिक्रिया दिंदेर हूंदन किन्तु यी साइत्यकार कु ुलार उत्साअ बढाणो बान आवश्यक खुराकौ काम करदन याने उप्रेरणा वास्ता यी बँचनेर आवश्यक छन। म्यार भौत दै अनुभव च बल बगैर भितर बंच्या यी बंचनेर इन प्रतिक्रिया बि दींदन ज्वा अबांछित बि हूंदी। मीन एक लघु नाटक फेसबुक म पोस्ट कार’ क्या नेहरु विरासत धरासायी की जा रही है ?” तो भौत सा कॉंग्रेसी या कॉंग्रेस समर्थक व भाजपा समर्थक बंचनेरुंन बगैर भितर बंच्यां प्रतिक्रिया दीण शुरू कार याने शीर्षक पौढ़ि मेरी आलोचना (कॉंग्रेस समर्थक बंकनेर ) या प्रशंसा (अधिसंख्या भाजपा समर्थक ) करण लग गेन। मीन दुई किस्मौ बंचनेरुं कुण साफ़ लेखी दे बल पैल पूरो नाटक बांचो तब प्रतिक्रिया द्यावो। खैर मि जरा बौळया किस्मौ लिख्वार छौं तो हिम्मत कर दींदो निथर हरेक सायित्यकारम इथगा हिकमत कम ही हूंद जु बंचनेरुं तै हड़कै द्यावो।
कुछ स्टीरिओ टाइप का आलोचक पाठक हूंदन (यी साहित्यकार बि हूंदन तो आम बंचनेर बि ) यूंक ख़ास शब्द हूंदन – गजब , भौत बढ़िया , सुपरब , वह , मेरी दिल की बात आदि। आम पाठक से स्टीरिओटाइप प्रतिक्रिया त पचाये जै सक्यांद किन्तु साहित्यकार से स्टीरिओटाइप कमेंट्स अपाच्य ही माने जाल। कुछ स्टीरिओटाइप प्रतिक्रिया फोटो प्रतिक्रिया हूंदन जु इंटरनेट म उपलब्ध छन जन कि वह , सुपरब , वेरी गुड आदि आदि।
भौत सा असाहित्यिक बंकनेर भौत इ बढ़िया प्रतिक्रिया दींदन अर यि प्रतिक्रिया कबि कबि नै बहस ही शुरू कर दींदन। जैं प्रतिक्रिया से नई बहस। नयो घपरोळ शुरू हो वो इ टीका टिप्पणी साहित्य बान फायदामंद हूंदीन।
भौत बार आम बंचनेर विषय से हटिक प्रतिक्रिया बि दींदन जु वास्तव म पाठक की अंतर्मन म बैठीं बथ हूंदन अर मि तो यूं प्रतिक्रियाओ जग्वाळ म रौंद किलैकि यी इन विषय हूंदन जो पाठक पढ़न चांदन।
कुछ साहित्यकार नेत्र सिंग असवाल जन हूंदन जो निस्पक्छ समालोचना करदन पर भौत इ कम इन पाठक हूंदन। कुछ साहित्यकार सियां रौंदन अर प्रतिक्रिया इ नि दींदन।
कुछ बाइस (bias ) पाठक हूंदन जु आपसे सामाजिक या राजनैतिक रूप से चिढ़दा छन तो यूंकि प्रतिक्रिया पक्सपाती ही माने जाली।
इनि कथगा किस्माक पाठक आलोचना औणी रौंदन जौंक संकलन व एकत्रीकरण आवश्यक च। पर कठिन बि च।
गढ़वळि मा इन पाठकुं आलोचना एकत्रीकरण व प्रकाशन कु सबसे पैल गढ़वाली म डा सतीश कालेश्वरी न कार। उंकी ‘ 2017 म प्रकाशित सुणदा रावा … ‘ काव्य संग्रह म सैकड़ों पाठक आलोचना बि प्रकाशित हुयीं छन। डा सतीश कलेश्वरी वधाई ला पात्र छन जौन ये नयो साहित्य की तरफ ध्यान दे।
साहित्यकारों तै यिं नई किस्मा आलोचना पर अब विशेष ध्यान दीण इ पोड़ल। या आलोचना नया अलंकार नया कहवत युक्त जि हूंद या होली अर यी टिप्पणी पाठकों Insight /इनसाइट छन जो महत्वपूर्ण हूंद।

Copyright @ Bhishma Kukreti July 2019
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