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Sep
13

प्रवासियों का उत्तराखंड में शिक्षा पर्यटन विकास में योगदान 

प्रवासियों का उत्तराखंड में शिक्षा पर्यटन विकास में योगदान 
Contribution of Migrated Uttarakhandis for Education Tourism Development 
उत्तराखंड में शिक्षा पर्यटन संभावनाएं  – 8
Education Tourism  Development in Uttarakhand -8
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना -  411
Uttarakhand Tourism and Hospitality Management – 411 
आलेख -      विपणन आचार्य   भीष्म कुकरेती 
-   उत्तराखंड भाग्यशाली है कि इस क्षेत्र में शिक्षा विकास में प्रवासियों ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई।  कुमाऊं व गढ़वाल विश्व विद्यालय खुलवाने में स्व हेमवती नंदन बहुगुणा का योगदान कौन भुला सकता है और हेमवती नंदन बहुगुणा स्वयं एक प्रवासी ही थे।     शिक्षा पर्यटन हेतु निम्न मुख्य संरचनत्मक संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है (Infrastructure for Education Tourism )-* 
क्षेत्र व छात्रों अनुसार शिक्षण संस्थान खुलना 
* विविध व मांग अनुसार विषय शिक्षण 
*  निपुण शिक्षकों की उपलब्धि 
* छात्रों , शिक्षकों , अभिभावकों , अन्य यात्रियों हेतु वास , रहवास व मनोरंजन की उपलब्धि
 * छात्रों हेतु भोजन व अन्य आवश्यकता पूर्ति की उपलब्धि याने बाजार  
* पुस्तक उपलब्धि याने बुक सेलर्स *
अभिभावकों आदि हेतु दर्शनीय स्थल    

उत्तराखंडी प्रवासियों ने ब्रिटिश काल में शुरू से ही शिक्षा प्रसार में  धन व शारीरिक व अन्य तरह से योगदान दिया।   मल्ला ढांगू के सिलोगी  स्कूल खुलवाने में प्रवासियों का अप्रतिम योगदान रहा है।  स्व सदा नंद कुकरेती को  क्षेत्र के प्रवासी  सिलोगी स्कूल हेतु दान दिया करते थे।  स्व नंदा दत्त कुकरेती ‘मैनेजर साब ‘ हर वर्ष भारत के अन्य शहरों में रहने वाले क्षेत्रीय प्रवासियों से मिलने जाते थे और सिलोगी स्कूल हेतु  सहयोग राशि प्राप्त करते थे।  जसपुर के स्व विष्णु दत्त जखमोला व कड़ती के स्व सूबेदार गोबरधन प्रसाद सिल्सवाल ने सिलोगी में दूकान व मकान चिनवाए थे जो शिक्षा पर्यटन हेतु इंफ्रास्ट्रक्चर ही थे। गैंडखाल में मिडल स्कूल खोलने व चलाने में तल्ला ढांगू  के दसियों प्रवासियों ने कई तरह से योगदान दिया।  किंसूर या पुळ बौण  मिडल स्कूल खुलने व चलाने में बिछला ढांगू के  दसियों प्रवासियों ने धन व अन्य प्रकार से योगदान दिया।  भृगुखाल कॉलेज उदयपुर पट्टी , पौड़ी गढ़वाल की स्थापना व चलवाने में भी कई प्रवासी जैसे ढांगळ  के स्व टीका राम कुकरेती का कई तरह से योगदान  रहा है।    कई प्रवासियों के पुत्र -पुत्री शिक्षक बनकर उत्तराखंड में रहने लगे।  जैसे सिलोगी स्कूल में ग्वील के युवा प्रवासी स्व जानकी प्रसाद कुकरेती लखनऊ छोड़कर सिलोगी बसे    आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के अध्यापक प्रवासियों के निर्मित मकानों में रहते हैं जो एक तरह का योगदान ही तो है।  इसी तरह लगभग सभी क्षेत्रों  के प्रवासियों ने अपने अपने क्षेत्रों में शिक्षा प्रसारण में अप्रतिम योगदान दिया व आंतरिक शिक्षा पर्यटन को विकसित किया।   गुरु राम ऐज्युकेसन ट्रस्ट के महंत स्व इंदिरेश चरण दास भी प्रवासी ही थे जिन्होंने उत्तराखंड, हिमाचल  व पंजाब में शिक्षा प्रसार हेतु अविश्मरणीय योगदान दिया  ।  
Copyright@ Bhishma Kukreti 2019Developing Education Tourism in Pauri Garhwal , Uttarakhand; Developing Education Tourism in Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Developing Education Tourism in Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Developing Education Tourism in Uttarkashi Garhwal , Uttarakhand; Developing Education Tourism in Tehri Garhwal , Uttarakhand; Developing Education Tourism in Chamoli Garhwal , Uttarakhand; Developing Education Tourism in Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Developing Education Tourism in  Udham Singh Nagar Kumaon , Uttarakhand; Developing Education Tourism in  Nainital Kumaon , Uttarakhand; Developing Education Tourism in Almora  Kumaon , Uttarakhand; Developing Education Tourism in Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; गढ़वाल में शिक्षा पर्यटन विकास ; कुमाऊं में शिक्षा पर्यटन विकास , हरिद्वार में शिक्षा पर्यटन विकास ; देहरादून में शिक्षा पर्यटन विकास , उत्तरी भारत में  शिक्षा पर्यटन विकास की स्म्भावनाएँ ; हिमालय , भारत में शिक्षा पर्यटन की संभावनाएं , Contribution of Migrated Uttarakhandis for Education Tourism Development , Developing Education Tourism 

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