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Dec
23

गिचू खोलण चैंद

गिचू खोलण चैंद
- By रमेश हितैषी, Ramesh Hitaishi

कुछ त ब्वाला क्या च हुणु,
भलु बुरू बिंगण चैंद,
सपन ह्वेक लाटु नि हुणु,
अपणु फर्ज निभाण चैंद।
ऊँल कंदुड़ रुवाकु बुजू मर्यूं,
सुविचारुकि धै लगांण चैंद,
कबि त काली रात खुललि,
निरास कबि नि हूण चैंद।
मनकि मऩ मा नि रखणी चैंद,
भैर बोलि दीण चैंद।
तुम चै मानो न मानो,
कुछ न कुछ सिखै दींद।
उ अलग बात च कि,
उंका मनमा टीस रैंद,
चुप रईक कुछ नि हूणु,
कैकू त गिचू खुल्यू चैंद।
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Garhwali Awakening Poem ,
Inspiring Poem

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